कीट रोग भगाओ, उत्पादकता बढ़ाओ, 694 पदों के सृजन को मंजूरी मंत्री अशोक चौधरी की प्रोफेसर की नौकरी पर सबसे बड़ा खुलासा: क्या वाकई हुआ फर्जीवाड़ा फिर हो रहा सियासी खेल?, वि.वि. सेवा आयोग ने किया क्लीयर हर नागरिक को मिले भरोसेमंद और निष्पक्ष न्याय, बोले डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा बेगूसराय में पुलिस वाहन और तेल टैंकर की भीषण टक्कर, SI समेत तीन पुलिसकर्मी घायल गंगा घाट स्वच्छता अभियान: ऑक्सफोर्ड बिजनेस कॉलेज के छात्र-छात्राओं ने बढ़-चढ़कर लिया भाग पटना के इस ब्लॉक में लॉजिस्टिक पार्क और फिनटेक सिटी की स्थापना, जमीन अधिग्रहण को लेकर DM ने किया विजिट मुजफ्फरपुर में GTSE सेमिनार: छात्रों के सपने को दिशा देने का लिया संकल्प Bhagalpur में GTSE सेमिनार का भव्य आयोजन, विद्यार्थियों को मिली सही दिशा और प्रेरणा मुख्य सचिव ने की BIRSAC के कार्यों की समीक्षा, विज्ञान प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के अधिकारी रहे मौजूद चीनी मांझे की चपेट में आने से कटी डॉक्टर की गर्दन, मौत से मचा हड़कंप
25-Jul-2024 11:11 PM
By First Bihar
PATNA : बिहार बीजेपी में बड़ा बदलाव हुआ है। पार्टी के बिहार प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी से सम्राट चौधरी को हटा दिया गया है। अब उनकी जगह इस कुर्सी पर दिलीप जायसवाल बैठेंगे। सम्राट चौधरी को महक एक ही साल में प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी से हटा दिया गया है।
दरअसल, केंद्रीय नेतृत्व ने बिहार बीजेपी में बड़ा उलटफेर हुआ है। बीजेपी ने प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी का पत्ता साफ करते हुए दिलीप जायसवाल को कमान सौंपी है। प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद दिलीप जायसवाल ने केंद्रीय नेतृत्व का धन्यवाद करते हुए कहा कि मुझे अभी बताया गया कि मैं बिहार भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बना हूं । इसको लेकर मैं अपने आलाकमान और शीर्ष नेतृत्व को धन्यवाद देता हूं कि मुझे इतनी बड़ी जिम्मेदारी दी है।
मालुम हो कि केंद्रीय नेतृत्व ने एक साल के भीतर ही प्रदेश अध्यक्ष के पद से सम्राट चौधरी को हटाने का फैसला ले लिया है। दिलीप जायसवाल अतिपिछड़ा वैश्य समाज से आते हैं और मोदी केबिनेट में सबसे पावरफुल नेता माने जाने वाले अमित शाह के भी करीबी नेता में एक गिने जाते हैं।
दिलीप पहले भी बिहार भाजपा में सांगठनिक तौर पर 20 वर्षों तक भाजपा के कोषाध्यक्ष रहे हैं। इस बार पार्टी ने उन्हें बिहार सरकार में मंत्री भी बनाया है। इसके बाद अब उन्हें प्रदेश अध्यक्ष की भी जिम्मेदारी दी गई है।
उधर, भाजपा सूत्रों की माने तो सम्राट चौधरी का पत्ता साफ होने की वजह लोकसभा चुनाव में उम्मीद के मुताबिक वोट शिफ्टिंग नहीं करवाया जाना बताया जा रहा है। पार्टी में अंदुरूनी तौर पर इस बात की चर्चा तेज है कि सम्राट अपने भी समाज को साथ नहीं ला सके। लिहाजा केंद्रीय नेतृत्व उनसे नाराज हो गई और अब उन्हें इस जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया गया।
इतना ही भाजपा की मातृ संगठन और विचार परिवार से जुड़े लोगों का भी यह कहना है कि चुनाव से पहले भी बैठकों का सम्राट को लेकर कुछ अच्छे फीडबैक निकल कर सामने नहीं आ रहे थे। जिसकी जानकारी उनको ( सम्राट चौधरी)दी गई थी और चुनाव में बेहतर प्रदर्शन करने की सलाह भी उन्हें दी गई थी। लेकिन आशा के मुताबिक प्रदर्शन नहीं होने की वजह से केंद्रीय नेतृत्व ने यह निर्णय किया है।