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Bihar Road News : पटना-पूर्णिया एक्सप्रेस-वे पर ब्रेक! बिहार की 3 सड़क परियोजनाएं अटकी, चेक करें आपके गांव का रूट

पटना-पूर्णिया एक्सप्रेस-वे समेत बिहार की तीन बड़ी सड़क परियोजनाओं को केंद्र से वित्तीय मंजूरी नहीं मिली। तकनीकी खामियों के कारण प्रस्ताव वापस भेजा गया।

Bihar Road News : पटना-पूर्णिया एक्सप्रेस-वे पर ब्रेक! बिहार की 3 सड़क परियोजनाएं अटकी, चेक करें आपके गांव का रूट
Tejpratap
Tejpratap
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Bihar road projects : बिहार में आधारभूत संरचना को मजबूत करने वाली तीन बड़ी सड़क परियोजनाएं फिलहाल अटक गई हैं। इनमें राज्य का पहला प्रस्तावित पटना-पूर्णिया एक्सप्रेस-वे, अनीसाबाद-दीदारगंज एलिवेटेड रोड और वाराणसी-रांची-कोलकाता कॉरिडोर का चौथा पैकेज शामिल है। केंद्र सरकार की ओर से इन परियोजनाओं को वित्तीय मंजूरी नहीं मिलने के कारण इनके निर्माण में अब और देरी होना तय माना जा रहा है।


जानकारी के अनुसार, हाल ही में केंद्रीय वित्त मंत्रालय के अधीन आर्थिक कार्य विभाग के सचिव की अध्यक्षता में गठित पीपीपीएसी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप एप्रेजल कमेटी) की बैठक हुई थी। इस बैठक में उत्तर प्रदेश की एक सड़क परियोजना के साथ-साथ बिहार की तीन अहम परियोजनाओं पर भी चर्चा हुई। कमेटी ने उत्तर प्रदेश की परियोजना को मंजूरी दे दी, लेकिन बिहार की तीनों परियोजनाओं को तकनीकी आधार पर नामंजूर कर दिया।


कमेटी ने कहा कि इन परियोजनाओं के प्रस्ताव केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के नए नियमों के अनुरूप नहीं हैं। इसलिए इन्हें दोबारा संशोधित कर भेजने की जरूरत है। अधिकारियों के अनुसार अब इन परियोजनाओं की दर और प्रस्ताव नए सिरे से तैयार कर केंद्र को भेजे जाएंगे, जिसमें कुछ महीनों का समय लग सकता है। इसके बाद ही आगे की प्रक्रिया शुरू हो सकेगी।


दरअसल पहले सड़क परियोजनाओं को मंजूरी मिलने की प्रक्रिया अपेक्षाकृत आसान हुआ करती थी, लेकिन अब केंद्र सरकार ने नियमों में बदलाव किया है। नए नियमों के अनुसार किसी भी सड़क परियोजना के प्रस्ताव में केवल निर्माण लागत ही नहीं, बल्कि ऑपरेशन और मेंटेनेंस (O&M) की लागत भी शामिल करना अनिवार्य है।


बिहार की इन तीन परियोजनाओं के प्रस्ताव में केवल निर्माण लागत का विवरण दिया गया था, जबकि संचालन और रखरखाव की लागत का उल्लेख नहीं किया गया था। इसी तकनीकी कमी के कारण पीपीपीएसी ने इन प्रस्तावों को वापस भेज दिया। जब तक कमेटी से वित्तीय मंजूरी नहीं मिलती, तब तक इन परियोजनाओं की निविदा जारी नहीं की जा सकती और निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सकता।


बताया जा रहा है कि पीपीपीएसी की मंजूरी मिलने के बाद इन परियोजनाओं को केंद्रीय कैबिनेट के पास भेजा जाता है, जहां से औपचारिक स्वीकृति मिलती है। इसके बाद ही निर्माण कार्य की प्रक्रिया शुरू होती है। फिलहाल कमेटी से मंजूरी नहीं मिलने के कारण ये तीनों परियोजनाएं कागजों में ही अटकी हुई हैं।


प्रस्तावित पटना-पूर्णिया एक्सप्रेस-वे बिहार का पहला एक्सप्रेस-वे होगा। यह चार लेन का एक्सप्रेस-वे होगा जिसकी कुल लंबाई लगभग 244 किलोमीटर निर्धारित की गई है। इसके बनने से राजधानी पटना से सीमांचल के जिलों तक यात्रा काफी आसान और तेज हो जाएगी।


वहीं अनीसाबाद-दीदारगंज एलिवेटेड रोड छह लेन की होगी जिसकी लंबाई करीब 17 किलोमीटर प्रस्तावित है। यह सड़क एनएच-22 और एनएच-31 को जोड़ते हुए सरिस्ताबाद से शुरू होकर दीदारगंज तक जाएगी। इसके बनने से पटना शहर में ट्रैफिक जाम की समस्या काफी हद तक कम होने की उम्मीद है।


इसके अलावा वाराणसी-रांची-कोलकाता कॉरिडोर का चौथा पैकेज भी बिहार में प्रस्तावित है। यह छह लेन की सड़क होगी जिसकी लंबाई लगभग 41 किलोमीटर है और इसका निर्माण कैमूर तथा रोहतास जिलों में होना है। यह सड़क उत्तर प्रदेश, झारखंड और पश्चिम बंगाल को बेहतर तरीके से जोड़ने में अहम भूमिका निभाएगी।


इन तीनों परियोजनाओं का निर्माण हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल (HAM) के तहत किया जाना प्रस्तावित है। इस मॉडल में निर्माण एजेंसी को कुल लागत का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा स्वयं निवेश करना होता है, जबकि शेष 40 प्रतिशत राशि सरकार देती है। बाद में निर्माण एजेंसी टोल के माध्यम से अपनी लागत की वसूली करती है।


फिलहाल वित्तीय मंजूरी न मिलने के कारण बिहार की इन महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं के शुरू होने में और देरी होने की संभावना है। हालांकि राज्य सरकार और संबंधित एजेंसियां प्रस्तावों को संशोधित कर जल्द ही केंद्र को दोबारा भेजने की तैयारी में जुट गई हैं। मंजूरी मिलते ही इन परियोजनाओं के लिए टेंडर जारी कर निर्माण कार्य शुरू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।