ब्रेकिंग न्यूज़

बकाया बिजली बिल नहीं चुकाया तो कटेगा कनेक्शन, बिहार में होली खत्म होते ही शुरू होगी कार्रवाई शादी के बाद रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा की बड़ी पहल, 44 सरकारी स्कूलों में करने जा रहे बड़ा काम शादी के बाद रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा की बड़ी पहल, 44 सरकारी स्कूलों में करने जा रहे बड़ा काम होली पर बदल गयी पटना मेट्रो की टाइमिंग! सुबह इस वक्त तक नहीं मिलेगी सुविधा, जानिए नया टाइम टेबल बिहार में तीर्थयात्रियों के लिए बड़ी सौगात: 60 धार्मिक स्थलों तक चलेंगी हाई-टेक बसें, इस तारीख से आवेदन शुरू Holi Special Trains: बिहार के इस स्टेशन से चलेंगी 15 होली स्पेशल ट्रेनें, देखिए.. पूरी लिस्ट Holi Special Trains: बिहार के इस स्टेशन से चलेंगी 15 होली स्पेशल ट्रेनें, देखिए.. पूरी लिस्ट बिहार में होली की पार्टी के दौरान खूनी संघर्ष, दोस्तों के बीच ताबड़तोड़ फायरिंग; गोली लगने से युवक की मौत होली को लेकर पटना के अस्पतालों में हाई अलर्ट, इमरजेंसी के लिए 85 से ज्यादा बेड रिजर्व; हेल्पलाइन नंबर जारी होली को लेकर पटना के अस्पतालों में हाई अलर्ट, इमरजेंसी के लिए 85 से ज्यादा बेड रिजर्व; हेल्पलाइन नंबर जारी

करम पूजा के मौके पर मुख्यमंत्री रघुवर दास ने राज्यवासियों को ट्वीट कर दी शुभकामनाएं

09-Sep-2019 01:27 PM

By 17

झारखंड: करम पूजा के मौके पर मुख्यमंत्री रघुवर दास ने राज्यवासियों को शुभकामनाएं दी हैं. मुख्यमंत्री ने ट्वीट कर लोगों को बधाई और शुभकामनाएं दी हैं. इसमें उन्होंने लिखा कि आज देश भर में करम पूजा का त्योहार मनाया जा रहा है. इस मौके पर मैं प्रकृति पर्व करम पूजा की सभी को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं देता हूं. उन्होंने ये भी कहा की 'झारखंड की पहचान और संस्कृति के मूल में प्रकृति की पूजा है. हमारे आदिवासी भाई-बहन प्रकृति के संरक्षक रहे हैं. हमें मिलकर झारखंड को और हरा भरा बनाना हैं'. करम बंगाल, झारखंड और छत्तीसगढ़ का एक प्रमुख त्योहार है. मुख्य रूप से यह त्योहार भादो मास की एकादशी के दिन मनाया जाता है. इस मौके पर लोग प्रकृति की पूजा कर अच्छे फसल की कामना करते हैं, साथ ही बहनें अपने भाइयों की सलामती के लिए प्रार्थना करती हैं. https://twitter.com/dasraghubar/status/1170864397381750791 करम पर झारखंड के लोग ढोल और मांदर की थाप पर झूमते-गाते हैं. यह दिन इनके लिए प्रकृति की पूजा का है. ऐसे में ये सभी उल्लास से भरे होते हैं. परम्परा के मुताबिक, खेतों में बोई गई फसलें बर्बाद न हों, इसलिए प्रकृति की पूजा की जाती है. वही इस मौके पर एक बर्तन में बालू भरकर उसे बहुत ही कलात्मक तरीके से सजाया जाता है. पर्व शुरू होने के कुछ दिनों पहले उसमें जौ डाल दिए जाते हैं, इसे 'जावा' भी कहा जाता है. यही जावा बहनें अपने बालों में गूंथकर झूमती-नाचती हैं. बहनें अपने भाइयों की सलामती के लिए इस दिन व्रत रखती हैं. इनके भाई 'करम' वृक्ष की डाल लेकर घर के आंगन या खेतों में लगाते हैं. इसे वे प्रकृति के आराध्य देव मानकर पूजा करते हैं. पूजा समाप्त होने के बाद वे इस डाल को पूरे धार्मिक रीति से नदी में विसर्जित कर देते हैं.