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बिहार विधान परिषद चुनाव: राजनीति में आने से पहले ही प्रशांत किशोर का बड़ा धमाका, अफाक अहमद को सारण का MLC चुनाव जिताया

बिहार विधान परिषद चुनाव: राजनीति में आने से पहले ही प्रशांत किशोर का बड़ा धमाका, अफाक अहमद को सारण का MLC चुनाव जिताया

05-Apr-2023 11:04 PM

By MUKESH SHRIVASTAVA

PATNA: चुनावी रणनीतिकार से राजनेता बनने के लिए पिछले 6 महीने से बिहार के गांव-गांव की खाक छान रहे प्रशांत किशोर ने बडा धमाका कर दिया है. प्रशांत किशोर कह रहे हैं कि वे पदयात्रा समाप्त होने यानि पूरा बिहार घूम लेने के बाद ये तय करेंगे कि राजनीति में आना है या नही. लेकिन उससे पहले ही विधान परिषद का चुनाव आ गया. प्रशांत किशोर ने अपने साथ घूम रहे बेतिया के अफाक अहमद को सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से एमएलसी बनवा दिया है. 


सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के एमएलसी चुनाव में प्रशांत किशोर समर्थित उम्मीदवार अफाक आलम ने जीत हासिल कर लिया है. इस सीट से सीपीआई के केदार पांडेय लगातार एमएलसी चुने जाते रहे हैं. उनके निधन के कारण उप चुनाव हुआ. इसमें सीपीआई ने स्व. केदार पांडेय के बेटे आनंद पुष्कर को उम्मीदवार बनाया. उन्हें महागठबंधन का समर्थन था. लेकिन प्रशांत किशोर समर्थित अफाक अहमद ने जीत हासिल कर लिया है. अफाक अहमद को कुल मिलाकर 3055 वोट मिले. वहीं, महागठबंधन के प्रत्याशी आनंद पुष्कर को 2381 वोट मिले. शिक्षक संघ के नेता और निर्दलीय उम्मीदवार जयराम यादव उनसे कुछ ही वोटों से पीछे रहे और उन्हें 2080 वोट मिले. एक और निर्दलीय उम्मीदवार चंद्रमा सिंह को 1255 वोट मिले. बीजेपी के उम्मीदवार धर्मेंद्र कुमार को सिर्फ 495 वोट मिले. 


प्रशांत किशोर ने बिछायी बिसात 

बता दें कि प्रशांत किशोर पिछले 6 महीने से सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में ही घूम रहे हैं. इस शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में छपरा, सिवान, गोपालगंज के अलावा मोतिहारी और बेतिया जिले आते हैं. पिछले साल 2 अक्टूबर को प्रशांत किशोर ने बेतिया के भितिहरवा से अपनी जन सुराज यात्रा शुरू की थी. एमएलसी चुने गये अफाक अहमद पहले दिन से उनके साथ पदयात्रा में शामिल थे. प्रशांत किशोर ने पिछले 6 महीने से इसी क्षेत्र में पदयात्रा कर रहे हैं. वे बेतिया, मोतिहारी, गोपालगंज, सिवान के बाद फिलहाल छपरा जिले में ही पदयात्रा कर रहे हैं. 


प्रशांत किशोर ने अपनी यात्रा के हर पडाव पर शिक्षकों के साथ संवाद जरूर किया. सारण यानि छपरा जिले की ही बात करें तो उन्होंने अमनौर औऱ बनियापुर में शिक्षकों के साथ बडी बैठक की थी. उन्होंने खुलकर अफाक अहमद के लिए वोट तो नहीं मांगा था लेकिन इशारों में ही बता दिया था कि अफाक अहमद की जीत उनके लिए कितना अहम है. 


निर्दलीय उम्मीदवारों ने महागठबंधन की कब्र खोदी

सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से लगातार चुनाव जीतने वाले स्व. केदार पांडेय शिक्षकों के बडे नेता थे. उनकी जीत में शिक्षक संघ का बडा योगदान होता था. लेकिन इस बार जब उनके बेटे को टिकट मिला तो कई शिक्षक नेता चुनाव मैदान में उतर गये. शिक्षक संघ के नेता जयराम यादव निर्दलीय उम्मीदवार बन कर उतरे और 2080 वोट ले आये. वहीं, चंद्रमा सिंह औऱ रंजीत कुमार भी शिक्षकों के ही नेता हैं. दोनों निर्दलीय चुनाव लडे और एक हजार से ज्यादा वोट हासिल किया. 


एम-वाई दोनों छिटका

चुनाव परिणाम बताते हैं कि महागठबंधन का एमवाई दोनों वोट खिसक गया. जयराम यादव को दो हजार से ज्यादा वोट मिले तो उसमें वाई वोटरों का बड़ा योगदान रहा. उधर, सिवान में हिना शहाब की नाराजगी भारी पडी. वैसे भी प्रशांत किशोर के उम्मीदवार खुद मुस्लिम थे. लिहाजा मुसलमानों का ज्यादातर वोट उनके ही पल्ले गया.