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21-Aug-2021 08:29 PM
PATNA: बिहार के सरकारी स्कूलों के शिक्षक किसी परीक्षा को पास करके नहीं बल्कि प्रमोशन पाकर अपने स्कूल का प्रधान शिक्षक या प्रिंसिपल बनना चाहते हैं. लेकिन सरकार ने तो फैसला ले लिया है कि प्रिंसिपल या प्रधान शिक्षक वही बनेगा जो बीपीएससी की परीक्षा पास करेगा. सरकारी शिक्षकों ने आज बिहार के हर जिले में सरकारी आदेश की प्रति जलायी.
शिक्षकों का आंदोलन
दरअसल इसी सप्ताह ने नीतीश कैबिनेट ने सरकारी स्कूलों में प्रधान शिक्षक औऱ प्रिंसिपल बनाने के लिए नयी नियमावली बनायी है. इसके तहत बीपीएससी के जरिये परीक्षा होगी. जो भी शिक्षक इस परीक्षा को पास करेंगे वे सरकारी स्कूल के प्रधान बन जायेंगे. सरकार ने तय किया है कि इस परीक्षा में निजी स्कूल के शिक्षकों को भी शामिल होने का मौका दिया जायेगा. लेकिन बिहार के सरकारी स्कूल के शिक्षकों ने इसे सरकार की धोखाधड़ी करार दिया है.
शनिवार को बिहार राज्य प्रारंभिक शिक्षक संघ के आह्वान पर बिहार के हर जिले में सरकारी आदेश की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया गया. शिक्षक नेताओं ने कहना है कि प्रारंभिक एवं माध्यमिक शिक्षक नियमावली 2020 में प्रधान शिक्षक- प्रधानाध्यापक के पद को वर्तमान में कार्यरत योग्य एवं अनुभवी शिक्षकों की प्रोन्नति से भरे जाने का प्रावधान था. लेकिन नीतीश सरकार ने साजिश रच दी है.
बिहार सरकार ने नयी नियमावली बनायी है जिससे बिहार के प्रारंभिक, माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में वर्तमान काम कर रहे करीब चार लाख शिक्षकों का हक मारा गया है. उनके साथ धोखाधड़ी कर बीपीएससी की प्रतियोगिता परीक्षा के जरिये प्रधान शिक्षक या प्रधानाध्यापक पद पर बहाली करने का नियम बनाया गया है. इसमें निजी स्कूलों के शिक्षकों को भी शामिल करने का प्रावधान तो सरासर अन्याय है. बिहार प्रारंभिक शिक्षक संघ के मुताबिक 2006 से लेकर अब तक जितने भी नियमावली बनाए गए है उन सबों में यह प्रावधान था कि आठ साल की सेवा पूरा कर लेने वाले शिक्षक वरीयता के आधार पर स्नातक प्रशिक्षित शिक्षक के पद पर प्रोन्नति पाएंगे. उसी में हेडमास्टर ग्रेड भी बनाया गया था, जिस पद को प्रमोशन के जरिये भरा जाना था. लेकिन सरकार ने अब जो नियम बनाया है उससे प्रमोशन के जरिये स्कूल के प्रधान पद पर बहाली बंद हो जायेगी.
सड़क से कोर्ट तक लड़ेंगे शिक्षक
बिहार प्रारंभिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप कुमार पप्पू ने कहा कि शिक्षक अपने हक के लिए रोड पर उतरने से लेकर लेकर कोर्ट जाने तक को तैयार हैं. सरकार तत्काल नये नियमावली में संशोधन कर प्रमोशन के आधार पर नियुक्ति का प्रावधान करे. जिससे सरकारी स्कूल के शिक्षकों के प्रधान शिक्षक या प्रधानाध्यापक के पद पर नियुक्ति हो सकेगी. अगर सरकार ने ऐसा नहीं किया तो बिहार के तमाम शिक्षक सड़क से कोर्ट तक लड़ाई लड़ने को मजबूर होंगे.