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Bihar Ethanol Factory : बिहार में इथेनॉल फैक्ट्रियों बंद हो गई है ....? विधानसभा में उठा मुद्दा तो जानिए मंत्री ने क्या दिया जवाब;सच जानकार आप भी रह जाएंगे हैरान

बिहार विधानसभा में इथेनॉल फैक्ट्रियों को लेकर बड़ा मुद्दा उठा है। उत्पादन, खरीद कोटा और फैक्ट्री बंद होने की खबरों पर सरकार और विपक्ष आमने-सामने दिखे। सरकार ने साफ किया कि फैक्ट्री बंद नहीं हुई, बल्कि केंद्र के तय कोटे का असर पड़ा है।

Bihar Ethanol Factory : बिहार में इथेनॉल फैक्ट्रियों बंद हो गई है ....? विधानसभा में उठा मुद्दा तो जानिए मंत्री ने क्या दिया जवाब;सच जानकार आप भी रह जाएंगे हैरान
Tejpratap
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4 मिनट

Bihar Ethanol Factory : बिहार विधानसभा में इथेनॉल फैक्ट्रियों और उनके उत्पादन को लेकर जोरदार चर्चा देखने को मिली। इस दौरान विधायक श्याम रजक ने सरकार से सवाल उठाते हुए इथेनॉल उत्पादन और फैक्ट्रियों के संचालन से जुड़ी कई अहम बातें सदन में रखीं। उन्होंने सरकार से यह स्पष्ट करने की मांग की कि केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित इथेनॉल खरीद कोटे में बढ़ोतरी के लिए क्या पहल की जा रही है, ताकि बिहार की फैक्ट्रियों का उत्पादन प्रभावित न हो और रोजगार के अवसर भी सुरक्षित रह सकें? 


इस पूरे मामले पर उद्योग मंत्री दिलीप जायसवाल ने सदन में स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि इथेनॉल फैक्ट्री बंद होने को लेकर जो बातें फैलाई जा रही हैं, वह पूरी तरह गलत और भ्रामक हैं। उन्होंने बताया कि भारत सरकार के साथ बिहार का 35 लाख 28 हजार करोड़ लीटर इथेनॉल खरीद का एमओयू हुआ था। इसके तहत बिहार में डेडिकेटेड इथेनॉल इकाइयों द्वारा लगभग 1602 किलोलीटर प्रतिदिन उत्पादन किया जा रहा है, जबकि केंद्र सरकार द्वारा राज्य के लिए 1060 किलोलीटर प्रतिदिन का ही कोटा निर्धारित किया गया है।


मंत्री ने कहा कि जब तक केंद्र सरकार की ओर से कोई कोटा निर्धारित नहीं था, तब तक इथेनॉल का पूरा उत्पादन खरीद लिया जाता था। लेकिन कोटा तय होने के बाद उसी सीमा तक खरीद की जा रही है, जिससे अधिक उत्पादन का सीधा असर फैक्ट्रियों पर पड़ रहा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फैक्ट्री बंद होने की खबरें गलत हैं। सरकारी रिपोर्ट के अनुसार फैक्ट्री 23 दिसंबर 2025 से 25 दिसंबर 2025 तक दो दिनों के लिए बंद रही थी, जबकि 28 दिसंबर से 31 दिसंबर 2025 तक भी चार दिनों के लिए उत्पादन रुका था। इस तरह कुल सात दिनों तक फैक्ट्री बंद रही थी, लेकिन इसे स्थायी बंदी बताना गलत है।


मंत्री ने यह भी बताया कि राज्य सरकार ने केंद्र सरकार से इथेनॉल खरीद कोटा बढ़ाने की मांग की है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द ही इस समस्या का समाधान निकल जाएगा, जिससे बिहार की फैक्ट्रियों को उत्पादन बढ़ाने का अवसर मिलेगा और इससे राज्य में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

इस दौरान सदन में केवल श्याम रजक ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय जनता दल और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के कई विधायकों ने भी इथेनॉल फैक्ट्रियों से जुड़े सवाल उठाए। विधायकों ने कहा कि अगर फैक्ट्रियों का उत्पादन कम होगा तो इसका सीधा असर रोजगार और किसानों की आय पर पड़ेगा। इसलिए सरकार को इस दिशा में ठोस कदम उठाने की जरूरत है।


सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि राज्य में खुलने वाली हर फैक्ट्री से सरकार का भावनात्मक और आर्थिक रिश्ता होता है। सरकार चाहती है कि फैक्ट्रियों की कमाई बढ़े और औद्योगिक विकास को मजबूती मिले। इस मामले को लेकर बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी जल्द ही दिल्ली जाने वाले हैं, जहां वह केंद्र सरकार के साथ इथेनॉल कोटा बढ़ाने के मुद्दे पर बातचीत करेंगे।


सरकार को उम्मीद है कि केंद्र और राज्य के बीच समन्वय से जल्द समाधान निकलेगा और बिहार में इथेनॉल उद्योग को नई गति मिलेगी। इससे न केवल औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि किसानों और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।