1st Bihar Published by: First Bihar Updated Mon, 16 Feb 2026 11:48:37 AM IST
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PATNA AIIMS: अंतरराष्ट्रीय बाल कैंसर दिवस (15 फरवरी) के मौके पर पटना एम्स के डॉक्टरों ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। डॉक्टरों की टीम ने तीन साल के एक मासूम बच्चे के लीवर कैंसर का जटिल ऑपरेशन सफलतापूर्वक कर उसकी जान बचा ली। यह सर्जरी करीब सात घंटे तक चली और इसे बेहद चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।
अस्पताल प्रशासन के अनुसार, बच्चे को ‘हेपेटोब्लास्टोमा’ नामक दुर्लभ और आक्रामक लीवर कैंसर था। यह कैंसर आमतौर पर छोटे बच्चों में पाया जाता है और तेजी से फैलता है। समय पर इलाज न मिलने पर यह जानलेवा साबित हो सकता है। बच्चे की हालत गंभीर थी और उसे तत्काल विशेषज्ञ सर्जरी की जरूरत थी।
पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग की टीम ने पूरी तैयारी और सावधानी के साथ ऑपरेशन किया। सर्जरी के दौरान बच्चे के लीवर के दाहिने हिस्से को सावधानीपूर्वक हटाया गया। डॉक्टरों के मुताबिक, इस तरह की जटिल पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजिकल सर्जरी देश के कुछ चुनिंदा उच्च स्तरीय केंद्रों पर ही संभव है। पटना एम्स में इस सफल ऑपरेशन ने संस्थान की विशेषज्ञता को एक बार फिर साबित कर दिया है।
सर्जरी के दौरान डॉक्टरों को बच्चे में कुछ जन्मजात समस्याएं भी मिलीं। इनमें मेकल्स डाइवर्टीकुलम और इंग्वाइनल हर्निया शामिल थे। टीम ने सूझबूझ और अनुभव का परिचय देते हुए इन दोनों समस्याओं का भी उसी दौरान सफल उपचार किया। इससे बच्चे को दोबारा ऑपरेशन की जरूरत नहीं पड़ेगी।
इस जटिल सर्जरी को सफल बनाने में कई विशेषज्ञ डॉक्टरों की अहम भूमिका रही। पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग की टीम में डॉ. अमित कुमार सिन्हा, डॉ. सौरव श्रीवास्तव, डॉ. अमित कुमार, डॉ. राशि, डॉ. दिगंबर चौबे और डॉ. गौरव शामिल थे। इसके अलावा गैस्ट्रोसर्जरी विभाग के डॉ. उत्पल आनंद और डॉ. बसंत ने भी महत्वपूर्ण सहयोग दिया। पीडियाट्रिक एनेस्थीसिया विभाग की डॉ. चांदनी ने ऑपरेशन के दौरान बच्चे की स्थिति को स्थिर बनाए रखने में अहम योगदान दिया।
अस्पताल के प्रवक्ता ने बताया कि यह सर्जरी तकनीकी रूप से काफी चुनौतीपूर्ण थी, लेकिन डॉक्टरों की टीमवर्क, अनुभव और आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं की मदद से इसे सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया। फिलहाल बच्चा डॉक्टरों की निगरानी में है और उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है।
अंतरराष्ट्रीय बाल कैंसर दिवस के अवसर पर मिली यह सफलता न केवल पटना एम्स बल्कि पूरे बिहार के लिए गर्व की बात है। इस उपलब्धि से यह संदेश भी जाता है कि गंभीर और जटिल बीमारियों का इलाज अब राज्य में ही संभव है। समय पर जांच और विशेषज्ञ इलाज से बच्चों को नई जिंदगी दी जा सकती है।