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08-Nov-2023 07:32 PM
By VISHWAJIT ANAND
PATNA: शीतकालीन सत्र के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा सदन में दिए गए अमर्यादित बयान को लेकर सियासत थमने का नाम नहीं ले रही है। एक तरफ जहां सरकार में शामिल दल मुख्यमंत्री के बचाव में उतर गए हैं तो वहीं दूसरी तर बीजेपी के साथ एनडीए में शामिल दल मुख्यमंत्री से इस्तीफा मांग रहे हैं। राष्ट्रीय लोजपा के अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री पशुपति कुमार पारस ने कहा है कि किसी दलित या अति पिछड़ा को मुख्यमंत्री बनाकर नीतीश कुमार प्रायश्चित करें।
पशुपति पारस ने कहा कि सदन में जिस तरह का बयान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दिया, उस तरह का बयान देश के इतिहार में किसी मुख्यमंत्री ने नहीं दिया है। मुख्यमंत्री के बयान की जितनी भी निंदा की जाए वह कम है। पूरे देश के लोग कह रहे हैं कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का मानसिक संतुलन ठीक नहीं है। पिछले कुछ महीनों से जो देखने को मिल रही है उससे यह साबित भी होता है। मुख्यमंत्री नीतीश अशोक चौधरी के घर गए तो श्रद्धांजलि के लिए जो फूल रखे गए थे उसे अशोक चौधरी के पिता की तस्वीर पर चढ़ाने के बजाए उसे मंत्री के सिर पर डाल दिया। कई तरह की ऐसी घटनाएं घट रही हैं जिससे लगता है कि उनपर बुढ़ापे का असर आ गया है।
उन्होंने कहा है कि नीतीश कुमार जब भी देश में महिलाओं के बीच जाएंगे तो माता-बहनें किसी भी परिस्थिति में उन्हें माफ नहीं करेंगी। जब उनका दिमागी संतुलन बिगड़ गया है तो हो सकता है कि इससे भी बड़ी कोई बात हो जाए। पारस ने नीतीश कुमार को सलाह दिया है कि उन्हें मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। उसके बाद आबादी के हिसाब से किसी दलित या अतिपिछड़ी जाति के व्यक्ति को बिहार का बागडोर सौंप देना चाहिए।
पासर ने कहा कि नीतीश कुमार के इस बयान से चुनाव पर काफी असर पड़ेगा। नीतीश का यह बयान जनता के बीच सौ फीसदी निगेटिव जाएगा। इसपर प्रधानमंत्री का भी बयान आया उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया लेकिन लोकतांत्रिक व्यवस्था में जो भी राजनीति करने वाले लोग हैं उसकी बोली पर नियंत्रण होना चाहिए। किसी भी राज्य के मुख्यमत्री का पद बहुत बड़ा होता है। सदन के भीतर जिस वक्त महिला विधायक बैठी हुई थीं उस बीच में मुख्यमंत्री की गलत बयानी से बहुत सी महिला विधायक शर्म से वहां से उठकर चली गईं।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बयान ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। नीतीश के बयान से पूरे देश में बिहार को लेकर गलत संदेश गया है। दोनों सदनों में उन्होंने अपने बयान के लिए माफी मांग ली है लेकिन पिस्टल से निकली गोली और मुंह से निकली बोली कभी वापस नहीं होती है। इसके प्रायश्चित का एक ही उपाय है कि वे मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दें और जो उन्होंने जनगणना कराया है उसके हिसाब से किसी दलित या उनकी पार्टी में जो भी अति पिछड़ा समाज का अच्छा नेता है उसे कमान सौंपे।