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रक्षाबंधन में घर आने वाले थे बक्सर के सुशील, नक्सलियों से लोहा लेते हुए शहीद

रक्षाबंधन में घर आने वाले थे बक्सर के सुशील, नक्सलियों से लोहा लेते हुए शहीद

30-Jun-2019 08:20 PM

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BUXAR : देश की आंतरिक शक्तियों को कमजोर कर रहे नक्सलियों से लोहा लेते हुए बक्सर के लाल सुशील शहीद हो गए. अरुणाचल प्रदेश में आईटीबीपी और नक्सलियों के बीच चले घंटों मुठभेड़ में सेना के जवान नक्सलियों के कैंप को धवस्त करने में सफल रहे. इस मुठभेड़ में कई जवान जख्मी भी हुए हैं. देश के लिए बलिदान देने पर शहीद के गांव के लोगों का सीना चौड़ा है. मुठभेड़ में शहीद हुए सुशील सिंह बक्सर जिले के मुरार थाना इलाके के कोन्हि गांव के रहने वाले थे. शहीद सुशील सिंह के पिता भारत सिंह यादव ने बताया कि दो वर्ष पहले ही उन्होंने आईटीबीपी में नौकरी जॉइन किया था. 5 बजे शहीद के पिता भारत यादव के पास फोन आया कि सुशील देश के लिए शहीद हो गए. शहीद सुशील अपने तीन भाइयों के बीच सबसे छोटा थें. उनके माझिल भाई अनिल सिंह भी सीआईएसएफ में तैनात हैं. सबसे बड़े भाई खेती करते हैं. अरुणाचल प्रदेश से उनका पार्थिव शरीर गुवाहाटी के रास्ते उनके पैतृक गांव लाया जायेगा. घर वालों ने बताया कि इससे पहले सुशील होली में अपने घर आये थें. रक्षाबंधन पर वह वापस घर आने वाले थे. परिजनों का रो रोकर बुरा हाल हुआ है. गांव में मातम पसरा है.BUXAR : देश की आंतरिक शक्तियों को कमजोर कर रहे नक्सलियों से लोहा लेते हुए बक्सर के लाल सुशील शहीद हो गए. अरुणाचल प्रदेश में आईटीबीपी और नक्सलियों के बीच चले घंटों मुठभेड़ में सेना के जवान नक्सलियों के कैंप को धवस्त करने में सफल रहे. इस मुठभेड़ में कई जवान जख्मी भी हुए हैं. देश के लिए बलिदान देने पर शहीद के गांव के लोगों का सीना चौड़ा है. मुठभेड़ में शहीद हुए सुशील सिंह बक्सर जिले के मुरार थाना इलाके के कोन्हि गांव के रहने वाले थे. शहीद सुशील सिंह के पिता भारत सिंह यादव ने बताया कि दो वर्ष पहले ही उन्होंने आईटीबीपी में नौकरी जॉइन किया था. 5 बजे शहीद के पिता भारत यादव के पास फोन आया कि सुशील देश के लिए शहीद हो गए. शहीद सुशील अपने तीन भाइयों के बीच सबसे छोटा थें. उनके माझिल भाई अनिल सिंह भी सीआईएसएफ में तैनात हैं. सबसे बड़े भाई खेती करते हैं. अरुणाचल प्रदेश से उनका पार्थिव शरीर गुवाहाटी के रास्ते उनके पैतृक गांव लाया जायेगा. घर वालों ने बताया कि इससे पहले सुशील होली में अपने घर आये थें. रक्षाबंधन पर वह वापस घर आने वाले थे. परिजनों का रो रोकर बुरा हाल हुआ है. गांव में मातम पसरा है.