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07-Nov-2021 08:21 AM
PATNA : लोक आस्था के महापर्व छठ की शुरुआत नहाय-खाय के साथ कल यानि सोमवार को हो जाएगी। 9 नवंबर को खरना पूजा होगी, 10 नवंबर को पहला अर्घ्य और 11 नवंबर को दूसरे अर्घ्य के साथ छठ पर्व का महानुष्ठान खत्म हो जाएगा। 36 घंटे तक व्रती निर्जला उपवास करेंगे। छठ महापर्व को लेकर आज निरामिष दिवस है।
सोमवार को कार्तिक शुक्ल चतुर्थी को मूल नक्षत्र और सुकर्मा योग में नहाय-खाय होगा। छठ व्रती नहाय-खाय के दिन गंगा नदी या स्नान जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करके भगवान भास्कर को जलार्घ्य देंगे। चार दिवसीय अनुष्ठान की सफलता हेतु प्रार्थना करेंगे। फिर पूरी पवित्रता से तैयार अरवा चावल की भात, चना दाल, कद्दू की सब्जी, आंवले की चटनी, पकौड़ी आदि ग्रहण कर अनुष्ठान आरंभ करेंगे। साथ ही प्रसाद के लिए मंगवाए गए गेहूं को गंगाजल में धोकर सुखाया जाएगा।
कार्तिक शुक्ल पंचमी यानी मंगलवार 9 नवंबर को खरना पूजा होगी। उसके बाद 10 नवंबर को पहला अर्घ्य और 11 नवंबर की सुबह प्रातःकालीन अर्घ्य के बाद व्रती पारण करेंगे। खरना के दिन व्रती पूरे दिन उपवास कर शाम में भगवान भास्कर की पूजा कर खीर-रोटी का प्रसाद ग्रहण करेंगे। 10 नवंबर दिन बुधवार की शाम अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। जबकि गुरुवार 11 नवंबर को उदयीमान सूर्य को अर्घ्य देकर आशीर्वाद लिया जाएगा। माना जाता है कि छठ पर्व में सूर्योपासना करने से छठी मइया प्रसन्न होती हैं और परिवार को सुख, शांति, धन-धान्य से परिपूर्ण करती हैं। साथ ही असाध्य रोग, कष्ट, शत्रु का नाश, सौभाग्य तथा संतान की प्राप्ति होती है।