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07-Aug-2023 06:56 PM
By First Bihar
SAMASTIPUR : चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने एक बार जातीय जनगणना को लेकर नीतीश सरकार पर जमकर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि जो लोग जातिगत जनगणना करवा रहे हैं, इनको समाज की बेहतरी से लेना-देना नहीं है। जातिगत जनगणना तो अंतिम दांव खेला गया है ताकि समाज के लोगों को जाति में बांटकर एक बार फिर किसी तरह चुनावी नैया पार की जाए। नीतीश कुमार 18 सालों से सत्ता में हैं पर आज क्यों जातिगत जनगणना करवा रहे हैं? नीतीश कुमार को 18 सालों से याद नहीं आ रहा था?
दरअसल, जन सुराज पदयात्रा के सूत्रधार प्रशांत किशोर समस्तीपुर के रोसड़ा में नीतीश सरकार पर जोरदार हमला बोला है। पीके ने कहा कि - बिहार के 13 करोड़ लोग जनगणना के मुताबिक सबसे गरीब और पिछड़े हैं। ये जानकारी सरकार के पास है इसे क्यों नहीं सुधारते। दलितों की जनगणना आजादी के बाद से हो रही है, उसकी दशा क्यों नहीं सुधार रही है। उनके लिए आपने क्या किया? बिहार में आज दलितों के बाद मुसलमानों की हालत सबसे खराब है पर कोई इस पर बात नहीं कर रहा है।
प्रशांत किशोर ने कहा कि- सर्वे और जनगणना में आसमान जमीन का फर्क है। सर्वे की कोई लीगल आइडेंटिटी नहीं है। सरकार ने इस बात को कभी स्पष्टता से नहीं बताया कि सर्वे का जो रिजल्ट आएगा उसकी मान्यता क्या होगी ? उसकी मान्यता तो कुछ है नहीं। राज्य सरकार सर्वे कभी भी करा सकती है। मान लीजिए अगर लीगल आइडेंटिटी मिल भी गई तो जातियों की जनगणना मात्र से लोगों की स्थिति सुधरेगी नहीं।
इधर, पीके ने जनगणना कराने और उसके विरोध करने वाले लोगों से अपील करते हुए कहा कि समाज में कोई वर्ग सही मायने में पीछे छूट गया है और उसकी संख्या ज्यादा है और सरकार सर्वे करवा रही है तो करवाने दीजिए। बिहार की सरकार जनता को उलझा रही है किआधे लोग लग जाएं जनगणना के विपक्ष में। इसके बाद कोई इसकी चर्चा न करे कि बिहार में पढ़ाई हो रही है की नहीं, रोजगार मिल रहे हैं की नहीं। जाति में आग लगाकर अपनी रोटी सेंक कर फिर से एक बार मुख्यमंत्री बन जाए।