बिहार में अपराधियों का तांडव जारी: इंजीनियर की गोली मारकर हत्या, इलाके में सनसनी पटना: MLA फ्लैट में बिजली के कवर तार में आग लगने से मची अफरा-तफरी, विद्युत आपूर्ति ठप सहरसा पुलिस की बड़ी कार्रवाई, लग्जरी कार से भारी मात्रा में प्रतिबंधित कफ सिरप बरामद, 4 तस्कर गिरफ्तार नशे में धुत युवक ने की फायरिंग, महिला घायल, आरोपी को ग्रामीणों ने पकड़ा आरा–बक्सर फोरलेन पर भीषण सड़क हादसा, तीन युवकों की दर्दनाक मौत, एक की हालत गंभीर बिहार कांग्रेस विधायक दल के नेता पर आज फैसला संभव, पटना में अहम बैठक छपरा में फर्जी IAS बनकर DM से मिलने पहुंचा युवक गिरफ्तार, टाउन थाने में FIR दर्ज Bihar Crime News: बिहार में मोबाइल के लिए बड़े भाई ने ले ली छोटे भाई की जान, हत्या की वारदात से सनसनी Bihar Crime News: बिहार में मोबाइल के लिए बड़े भाई ने ले ली छोटे भाई की जान, हत्या की वारदात से सनसनी सीके अनिल ने अंचलाधिकारियों को मंत्री के सामने हड़काया, कहा..कल तक हड़ताल वापस लो, नहीं तो हो जाओगे डिसमिस
10-Oct-2023 03:26 PM
By First Bihar
PATNA : बिहार में जातिगत सर्वे के आंकड़े प्रकाशित होने के बाद राज्य में राजनीतिक पारा चढ़ गया है। विपक्षी दल के तरफ से इसको लेकर सवाल तो उठाए ही जा रहे सबसे बड़ी बात है कि सत्तारूढ़ गठबंधन की सरकार में शामिल नेता भी इसपर निशाना साध रहे हैं। इसी कड़ी में अब बीते शाम लालू यादव ने एक पोस्ट किया जिसमें उन्होंने यह कहा कि कैंसर का इलाज सिर दर्द की दवा लेने से नहीं होगा। अब इसको लेकर उपेंद्र कुशवाहा ने पलटवार किया है।
दरअसल,जातीय जनगणना के पक्ष में बोलते हुए लालू ने सोमवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखा जहां पर उन्होंने कहा कि- कैंसर का इलाज सर दर्द की दवा खाने से नहीं होगा। जातिगत जनगणना के विरोध में जो लोग हैं वह इंसानियत, सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक बराबरी तथा समानुपातिक प्रतिनिधित्व के खिलाफ है। ऐसे लोगों में रत्ती भर भी न्यायिक चरित्र नहीं होता है। किसी भी प्रकार की असमानता और गैर बराबरी के ऐसे समर्थक अन्यायी प्रवृत्ति के होते हैं जो जन्म से लेकर मृत्यु तक केवल और केवल जन्मजात जातीय श्रेष्ठता के आधार और दंभ पर दूसरों का हक खाकर अपनी कथित श्रेष्ठता को बरकरार रखना चाहते हैं।
वहीं, अब इसको लेकर उपेंद्र कुशवाहा ने भी सोशल मीडिया पर ही उन्हें जवाब देते हुए पूछा है कि- श्रीमान लालू जी,हां महोदय, यह सच है कि कैंसर के इलाज के लिए कैंसर की दवा ही चाहिए। लेकिन इसका यह भी अर्थ नहीं है कि इलाज के नाम पर छाली घुम फिर कर आप और आपका परिवार खाए और बाकी लोगों को मठ्ठा भी नसीब न हो। कैंसर के इलाज के लिए प्रदेश की जनता ने आपको भी डॉक्टर की कुर्सी पर बैठाया था। तब आपकी फीस नौकरी के बदले जमीन थी न। कम से कम आप न्यायिक चरित्र की बात मत कीजिए, शोभा नहीं देता है। अगला डॉक्टर भी आपके परिवार से बाहर आपको दिखता ही नहीं है। आपके परिवार से बाहर भी बहुत बड़ी दुनिया है ,सर। पिछड़े /अति पिछड़े/दलितों की।
आपको बतात्ते चलें कि, बिहार सरकार के आंकड़ों के मुताबिक बिहार में कुल आबादी 13 करोड़ से ज्यादा है। इनमें 27% अन्य पिछड़ा वर्ग और 36% अत्यंत पिछड़ा वर्ग है। यानी, ओबीसी की कुल आबादी 63% है। अनुसूचित जाति की आबादी 19% और जनजाति 1.68% है। सरकार ने 18 फरवरी 2019 और फिर 27 फरवरी 2020 को जातिगत गणना का प्रस्ताव विधानसभा और विधान परिषद से पास करवा लिया था। इसके बाद इस साल जनवरी में जातिगत गणना का काम शुरू हुआ।