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बक्सर से भरतपुर 785 KM पैदल जा रहे मजदूर, लॉकडाउन के बाद फैक्ट्री मालिक ने रखने से किया इनकार

बक्सर से भरतपुर 785 KM पैदल जा रहे मजदूर, लॉकडाउन के बाद फैक्ट्री मालिक ने रखने से किया इनकार

27-Mar-2020 02:14 PM

BUXAR: राजस्थान के रहने वाले कई मजदूर बक्सर के चौसा में एक फैक्ट्री में कमा करते थे, लेकिन फैक्ट्री लॉकडाउन के बाद से बंद हो गई है. जिससे परेशान मजदूर अपने घर के लिए कोई गाड़ी खोजे. लेकिन नहीं मिला. कोई भी गाड़ी वाला जाने को तैयार नहीं हुआ.जिसके बाद सभी अब बक्सर से भरतपुर पैदल ही निकल गए हैं.

बक्सर से भरतपुर करीब 785 किमी

मजबूरी में कई मजदूर बक्सर से भरतपुर करीब 785 किमी पैदल ही जाने रहे हैं. सभी चौसा से निकल गए हैं. इन मजदूरों के पास अधिक पैसा भी नहीं है. लेकिन फिर भी सभी घर के लिए निकल गए हैं. राजस्थान के भरतपुर जिला जा रहे सोनू कुमार, राजा कुमार ने बताया कि बक्सर के चौसा गोला में एक फैक्ट्री में काम करने के लिये आए थे.


सिर्फ आगे की उम्मीद

इन मजदूरों को बस एक ही उम्मीद है कि शायद आगे कोई गाड़ी मिल जाए. जिससे उनका वह अपने घर पहुंच जाए. लेकिन यह संभव नहीं लग रहा हैं. सभी मजदूर यहां पर कई माह से काम कर रहे थे. लेकिन लॉकडाउन के कारण उत्पादन ठप हो गया. मालिक ने भी किसी तरह का मदद करने से हाथ खड़ा कर दिया. मजदूरों ने बताया कि हमलोगों के पास खाने के लिये कुछ भी नहीं है. पास में पांच सौ रुपए है. रास्ते में कुछ मिल जायेगा तो खाएंगे. लेकिन घर पहुंच जाए यही कोशिश है. 

BUXAR: राजस्थान के रहने वाले कई मजदूर बक्सर के चौसा में एक फैक्ट्री में कमा करते थे, लेकिन फैक्ट्री लॉकडाउन के बाद से बंद हो गई है. जिससे परेशान मजदूर अपने घर के लिए कोई गाड़ी खोजे. लेकिन नहीं मिला. कोई भी गाड़ी वाला जाने को तैयार नहीं हुआ.जिसके बाद सभी अब बक्सर से भरतपुर पैदल ही निकल गए हैं.

बक्सर से भरतपुर करीब 785 किमी

मजबूरी में कई मजदूर बक्सर से भरतपुर करीब 785 किमी पैदल ही जाने रहे हैं. सभी चौसा से निकल गए हैं. इन मजदूरों के पास अधिक पैसा भी नहीं है. लेकिन फिर भी सभी घर के लिए निकल गए हैं. राजस्थान के भरतपुर जिला जा रहे सोनू कुमार, राजा कुमार ने बताया कि बक्सर के चौसा गोला में एक फैक्ट्री में काम करने के लिये आए थे.


सिर्फ आगे की उम्मीद

इन मजदूरों को बस एक ही उम्मीद है कि शायद आगे कोई गाड़ी मिल जाए. जिससे उनका वह अपने घर पहुंच जाए. लेकिन यह संभव नहीं लग रहा हैं. सभी मजदूर यहां पर कई माह से काम कर रहे थे. लेकिन लॉकडाउन के कारण उत्पादन ठप हो गया. मालिक ने भी किसी तरह का मदद करने से हाथ खड़ा कर दिया. मजदूरों ने बताया कि हमलोगों के पास खाने के लिये कुछ भी नहीं है. पास में पांच सौ रुपए है. रास्ते में कुछ मिल जायेगा तो खाएंगे. लेकिन घर पहुंच जाए यही कोशिश है.