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19-Dec-2021 07:16 PM
PATNA: बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के ब्राह्मणों पर दिये गए बयान को लेकर रविवार को राज्य में खूब सियासी बयानबाजी हुई। सरकार से लेकर विपक्ष तक के नेताओं ने मांझी को नसीहत से लेकर चेतावनी तक दे दी। शाम होते होते बिहार बीजेपी के सबसे बड़े नेता माने जाने वाले सुशील मोदी भी सामने आ गए। उन्होने ट्वीट करके मांझी को नसीहत देते हुए कहा कि किसी भी समूदाय विशेष का हितैसी होने का मतलब ये नहीं है कि दूसरे की भावना को आहत किया जाए।
मोदी ने पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान का जिक्र करते हुए आगे लिखा की बिहार के दलित नेता रामविलास पासवान अटल बिहारी वाजपेय से लेकर नरेंद्र मोदी तक के कैबिनेट में मंत्री रहे लेकिन कभी ऊंची जातियों के विरूद्ध उन्होने कभी कोई अपशब्द नहीं कहा। उन्होने आगे कहा कि ब्राह्मण समाज के लिए कथित बयान अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। संवैधानिक पदों पर रह चुके लोगों को शब्दों की मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए और ऐसा कुछ नहीं बोलना चाहिए जिससे समाज में सद्भाव बिगड़े।
शनिवार को जीतन राम मांझी ने भूईया समाज के लोगों को संबोधित करते हुए ब्राह्मण के लिए अपशब्द का इस्तेमाल किया उसके बाद रविवार को जब उनके बयान पर बवाल होने लगा तो उन्होने अपने बयान पर पहले की ही तरह पलटी मारते हुए कहा कि उन्होने ब्राह्मण के लिए नहीं अपने समाज के लिए उस अपशब्द का इस्तेमाल किया था। शराबबंदी से लेकर धर्म-जाति पर अपने बयानों के लिए चर्चा में रहने वाले मांझी की हर मुद्दे पर फजीहत हो रही है। दो दिन पहले भी उन्होंने कहा था कि मेरे बयान से मेरी भद्द पीट जाती है।