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17-Apr-2025 03:02 PM
By First Bihar
Personal growth tips: वर्तमान समय की दौड़-भाग, सोशल मीडिया की तुलना और लोकप्रियता की होड़ में इंसान अपने आत्मिक संतुलन को खोता जा रहा है। लेकिन अगर कुछ मूल बातें अपने जीवन में उतार ली जाएं, तो न केवल आंतरिक शांति संभव है बल्कि समाज में एक बेहतर इंसान के रूप में भी पहचाना जा सकता है। आइए जानते हैं पाँच ऐसी जीवन की सीखें, जिनका ज़िक्र कई मनोवैज्ञानिक, दार्शनिक और लेखकों ने अपनी पुस्तकों में भी किया है|
अपनी भाषा पर लगाम रखें
जैसा कि महान दार्शनिक चाणक्य ने कहा था| “कटु वचन बोलने वाला व्यक्ति अपने ही रिश्तों को खो देता है।” शब्दों की मार तलवार से भी गहरी होती है। अपनी भाषा में संयम और शालीनता रखने वाला व्यक्ति हर वर्ग में सम्मान पाता है।
दूसरों की सराहना करना सीखें
डेल कार्नेगी की प्रसिद्ध पुस्तक "How to Win Friends and Influence People" में बताया गया है कि दूसरों की सच्चे मन से प्रशंसा करने से संबंध मजबूत होते हैं। सराहना सिर्फ दूसरों को अच्छा महसूस नहीं कराती, बल्कि आपकी सोच को भी सकारात्मक बनाती है।
महिलाओं का सम्मान करें
किसी भी सभ्य समाज की पहचान वहाँ महिलाओं के प्रति सम्मान से होती है। गाँधी जी ने कहा था| “जहाँ महिलाओं को सम्मान नहीं मिलता, वहाँ ईश्वर नहीं वास करते।” महिलाओं का आदर न केवल संस्कृति है, बल्कि नैतिक ज़िम्मेदारी भी।
लोकप्रियता की भूख से दूर रहें
“Be more concerned with your character than your reputation,” यह उद्धरण जॉन वुडन का है। आज की दुनिया में लाइक्स और फॉलोअर्स की गिनती हमें भ्रमित कर सकती है, लेकिन असली सफलता आत्मसंतोष में छिपी होती है, ना कि भीड़ की तालियों में।
दूसरों से तुलना न करें
महात्मा बुद्ध ने कहा था| “तुलना ही दुख का मूल है।” हर व्यक्ति की यात्रा अलग होती है, उसकी चुनौतियाँ, समय और संसाधन अलग होते हैं। अपनी तुलना दूसरों से करना खुद की अनदेखी करने जैसा है। यदि आप इन पाँच बातों को अपने जीवन में अपना लेते हैं| तो न केवल आप शांत रहेंगे, बल्कि एक प्रेरणादायक व्यक्तित्व के रूप में उभरेंगे। इन मूल्यों को अपनाकर ही समाज में स्थायित्व, सौहार्द और आत्मिक सुख संभव है।
Personal growth tips: वर्तमान समय की दौड़-भाग, सोशल मीडिया की तुलना और लोकप्रियता की होड़ में इंसान अपने आत्मिक संतुलन को खोता जा रहा है। लेकिन अगर कुछ मूल बातें अपने जीवन में उतार ली जाएं, तो न केवल आंतरिक शांति संभव है बल्कि समाज में एक बेहतर इंसान के रूप में भी पहचाना जा सकता है। आइए जानते हैं पाँच ऐसी जीवन की सीखें, जिनका ज़िक्र कई मनोवैज्ञानिक, दार्शनिक और लेखकों ने अपनी पुस्तकों में भी किया है|
अपनी भाषा पर लगाम रखें
जैसा कि महान दार्शनिक चाणक्य ने कहा था| “कटु वचन बोलने वाला व्यक्ति अपने ही रिश्तों को खो देता है।” शब्दों की मार तलवार से भी गहरी होती है। अपनी भाषा में संयम और शालीनता रखने वाला व्यक्ति हर वर्ग में सम्मान पाता है।
दूसरों की सराहना करना सीखें
डेल कार्नेगी की प्रसिद्ध पुस्तक "How to Win Friends and Influence People" में बताया गया है कि दूसरों की सच्चे मन से प्रशंसा करने से संबंध मजबूत होते हैं। सराहना सिर्फ दूसरों को अच्छा महसूस नहीं कराती, बल्कि आपकी सोच को भी सकारात्मक बनाती है।
महिलाओं का सम्मान करें
किसी भी सभ्य समाज की पहचान वहाँ महिलाओं के प्रति सम्मान से होती है। गाँधी जी ने कहा था| “जहाँ महिलाओं को सम्मान नहीं मिलता, वहाँ ईश्वर नहीं वास करते।” महिलाओं का आदर न केवल संस्कृति है, बल्कि नैतिक ज़िम्मेदारी भी।
लोकप्रियता की भूख से दूर रहें
“Be more concerned with your character than your reputation,” यह उद्धरण जॉन वुडन का है। आज की दुनिया में लाइक्स और फॉलोअर्स की गिनती हमें भ्रमित कर सकती है, लेकिन असली सफलता आत्मसंतोष में छिपी होती है, ना कि भीड़ की तालियों में।
दूसरों से तुलना न करें
महात्मा बुद्ध ने कहा था| “तुलना ही दुख का मूल है।” हर व्यक्ति की यात्रा अलग होती है, उसकी चुनौतियाँ, समय और संसाधन अलग होते हैं। अपनी तुलना दूसरों से करना खुद की अनदेखी करने जैसा है। यदि आप इन पाँच बातों को अपने जीवन में अपना लेते हैं| तो न केवल आप शांत रहेंगे, बल्कि एक प्रेरणादायक व्यक्तित्व के रूप में उभरेंगे। इन मूल्यों को अपनाकर ही समाज में स्थायित्व, सौहार्द और आत्मिक सुख संभव है।