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06-Oct-2025 02:50 PM
By First Bihar
Pet Parenting: भारत में पेट पैरेंटिंग का चलन अचानक तेज़ी से बढ़ रहा है। इसके पीछे सिर्फ जानवरों से प्यार ही नहीं, कुछ ऐसे कारण भी हैं जिन्हें जानकर आप हैरान रह जाएंगे। कोई अकेलेपन से जूझ रहा है, तो किसी की ज़िंदगी में है एक अधूरा इमोशनल चैप्टर... चलिए, जानते हैं इस बढ़ते ट्रेंड के पीछे की दिलचस्प कहानी...
कहा जाता है कि कुत्ते इंसानों के सबसे वफादार दोस्त होते हैं, और यही वजह है कि लोग उन्हें हमेशा से अपने साथ रखते आए हैं। लेकिन अब एक सवाल उठने लगा है – क्या लोग अपने बच्चों से ज़्यादा पालतू जानवरों को अहमियत देने लगे हैं? भारत में "पेट पैरेंटिंग" का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है। कई लोग अब बच्चों की जगह पालतू कुत्तों या बिल्लियों के साथ वक्त बिताना ज़्यादा पसंद कर रहे हैं।
जब आप किसी जानवर को सिर्फ एक पालतू नहीं, बल्कि अपने परिवार का हिस्सा मानते हैं, तो इसे पेट पैरेंटिंग कहा जाता है। इसमें आप उस जानवर की देखभाल ऐसे करते हैं जैसे वह आपका बच्चा हो – जैसे उसका खाना, सेहत, बर्थडे सेलिब्रेशन, कपड़े, खिलौने और खास खाना देना। इसमें इमोशनल जुड़ाव, पैसा खर्च करना, लाइफस्टाइल में बदलाव और समाज में एक अलग पहचान भी शामिल होती है।
भारत में क्यों बढ़ रही है पेट पैरेंटिंग ?
महंगे खर्चों से बचाव: बच्चे की परवरिश में बहुत खर्च होता है – स्कूल, कॉलेज, दवाइयां आदि। वहीं, पालतू जानवरों पर उसके तुलने में कम खर्च आता है।
अकेलापन और इमोशनल कमी: आजकल शहरों में लोग अकेलेपन का शिकार हैं। बच्चे बड़े होकर अपने में व्यस्त हो जाते हैं, जिससे माता-पिता अकेले रह जाते हैं। ऐसे में लोग जानवरों को अपनाकर अपनी भावनात्मक ज़रूरतें पूरी करते हैं।
नई पीढ़ी की सोच: आज की युवा पीढ़ी ज़िंदगी में ज़िम्मेदारियों से ज़्यादा मानसिक शांति, आज़ादी और संतुलन चाहती है। उनके लिए बच्चा होना ज़रूरी नहीं, बल्कि खुश रहना ज़्यादा मायने रखता है।
Mars Petcare की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में लगभग 70% लोग पहली बार पालतू जानवर पाल रहे हैं और उन्हें अपने परिवार का हिस्सा मानते हैं। यही वजह है कि आजकल लोग बच्चों की जगह जानवरों को ज़्यादा अपनाने लगे हैं।
पेट पैरेंटिंग सिर्फ एक ट्रेंड नहीं, बल्कि एक इमोशनल और लाइफस्टाइल चॉइस बन चुकी है। सवाल यह नहीं है कि क्या जानवर बच्चों की जगह ले सकते हैं, बल्कि यह है कि आज के दौर में इंसान को जहाँ प्यार और जुड़ाव महसूस होता है, वहीं वह अपनापन तलाशता है।
Pet Parenting: भारत में पेट पैरेंटिंग का चलन अचानक तेज़ी से बढ़ रहा है। इसके पीछे सिर्फ जानवरों से प्यार ही नहीं, कुछ ऐसे कारण भी हैं जिन्हें जानकर आप हैरान रह जाएंगे। कोई अकेलेपन से जूझ रहा है, तो किसी की ज़िंदगी में है एक अधूरा इमोशनल चैप्टर... चलिए, जानते हैं इस बढ़ते ट्रेंड के पीछे की दिलचस्प कहानी...
कहा जाता है कि कुत्ते इंसानों के सबसे वफादार दोस्त होते हैं, और यही वजह है कि लोग उन्हें हमेशा से अपने साथ रखते आए हैं। लेकिन अब एक सवाल उठने लगा है – क्या लोग अपने बच्चों से ज़्यादा पालतू जानवरों को अहमियत देने लगे हैं? भारत में "पेट पैरेंटिंग" का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है। कई लोग अब बच्चों की जगह पालतू कुत्तों या बिल्लियों के साथ वक्त बिताना ज़्यादा पसंद कर रहे हैं।
जब आप किसी जानवर को सिर्फ एक पालतू नहीं, बल्कि अपने परिवार का हिस्सा मानते हैं, तो इसे पेट पैरेंटिंग कहा जाता है। इसमें आप उस जानवर की देखभाल ऐसे करते हैं जैसे वह आपका बच्चा हो – जैसे उसका खाना, सेहत, बर्थडे सेलिब्रेशन, कपड़े, खिलौने और खास खाना देना। इसमें इमोशनल जुड़ाव, पैसा खर्च करना, लाइफस्टाइल में बदलाव और समाज में एक अलग पहचान भी शामिल होती है।
भारत में क्यों बढ़ रही है पेट पैरेंटिंग ?
महंगे खर्चों से बचाव: बच्चे की परवरिश में बहुत खर्च होता है – स्कूल, कॉलेज, दवाइयां आदि। वहीं, पालतू जानवरों पर उसके तुलने में कम खर्च आता है।
अकेलापन और इमोशनल कमी: आजकल शहरों में लोग अकेलेपन का शिकार हैं। बच्चे बड़े होकर अपने में व्यस्त हो जाते हैं, जिससे माता-पिता अकेले रह जाते हैं। ऐसे में लोग जानवरों को अपनाकर अपनी भावनात्मक ज़रूरतें पूरी करते हैं।
नई पीढ़ी की सोच: आज की युवा पीढ़ी ज़िंदगी में ज़िम्मेदारियों से ज़्यादा मानसिक शांति, आज़ादी और संतुलन चाहती है। उनके लिए बच्चा होना ज़रूरी नहीं, बल्कि खुश रहना ज़्यादा मायने रखता है।
Mars Petcare की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में लगभग 70% लोग पहली बार पालतू जानवर पाल रहे हैं और उन्हें अपने परिवार का हिस्सा मानते हैं। यही वजह है कि आजकल लोग बच्चों की जगह जानवरों को ज़्यादा अपनाने लगे हैं।
पेट पैरेंटिंग सिर्फ एक ट्रेंड नहीं, बल्कि एक इमोशनल और लाइफस्टाइल चॉइस बन चुकी है। सवाल यह नहीं है कि क्या जानवर बच्चों की जगह ले सकते हैं, बल्कि यह है कि आज के दौर में इंसान को जहाँ प्यार और जुड़ाव महसूस होता है, वहीं वह अपनापन तलाशता है।