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19-Apr-2025 04:51 PM
By First Bihar
Life Style: जैसे-जैसे बच्चे बड़े होते हैं, खासकर टीनएज में कदम रखते हैं, वैसे-वैसे उनके ऊपर पढ़ाई का दबाव भी बढ़ने लगता है। माता-पिता बच्चों के बेहतर भविष्य को लेकर चिंतित रहते हैं और उनसे कुछ अपेक्षाएं भी होती हैं। लेकिन जब बच्चा पढ़ने बैठता है और उसे नींद आने लगती है, तो यह न केवल उसकी पढ़ाई में बाधा बनता है, बल्कि पैरेंट्स के लिए भी चिंता का कारण बन जाता है। पढ़ाई करते समय नींद आना एक सामान्य समस्या है, लेकिन इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। अच्छी बात ये है कि कुछ आसान उपाय अपनाकर इस समस्या को काफी हद तक दूर किया जा सकता है।
1.प्रॉपर लाइटिंग रखें
बच्चे के पढ़ाई करने की जगह पर पर्याप्त और उचित रोशनी होनी चाहिए। कम रोशनी आंखों पर ज़ोर डालती है, जिससे थकावट और नींद आने की संभावना बढ़ जाती है। नेचुरल लाइट सबसे बेहतर होती है, लेकिन अगर वह न हो तो सफेद LED लाइट का प्रयोग करें।
2. बच्चे के प्रोडक्टिव टाइम को पहचानें
हर बच्चे का पढ़ने का समय अलग होता है। कुछ बच्चे सुबह जल्दी उठकर पढ़ना पसंद करते हैं, तो कुछ को शाम का समय ज्यादा उपयुक्त लगता है। यह ज़रूरी है कि पैरेंट्स अपने बच्चे की आदतों को समझें और उसी हिसाब से पढ़ाई का टाइमटेबल तय करें।
3. छोटे-छोटे ब्रेक दें
लगातार कई घंटों तक पढ़ाई करने से बच्चा थक जाता है, जिससे उसका ध्यान भटकता है और नींद आने लगती है। 25–30 मिनट पढ़ाई के बाद 5–10 मिनट का छोटा ब्रेक लेना फोकस बनाए रखने में मदद करता है। इस तकनीक को "पोमोडोरो तकनीक" भी कहा जाता है, जिसे पढ़ाई के लिए बहुत प्रभावी माना जाता है।
4. संतुलित आहार और पर्याप्त पानी
पोषण की कमी और पानी की कमी भी बच्चों को थका सकती है। बच्चे के आहार में हरी सब्जियां, फल, सूखे मेवे और प्रोटीनयुक्त खाद्य पदार्थ शामिल करें। साथ ही, दिन भर भरपूर पानी पीने के लिए प्रोत्साहित करें।
5. सही मुद्रा में पढ़ाई
बिस्तर या लेटकर पढ़ाई करने से नींद आना लाज़मी है। बच्चों को टेबल-कुर्सी पर सीधा बैठकर पढ़ाई करने की आदत डालें। इससे न केवल उनका ध्यान केंद्रित रहेगा, बल्कि शरीर की मुद्रा भी सही बनी रहेगी।
6. पढ़ाई को रोचक बनाएं
यदि पढ़ाई बोरिंग लग रही हो, तो बच्चे जल्दी ऊब जाते हैं और नींद आने लगती है। आप पढ़ाई को रोचक बनाने के लिए क्विज़, फ्लैश कार्ड, या रचनात्मक एक्टिविटीज़ का उपयोग कर सकते हैं। इसके अलावा, ऑडियो-विज़ुअल कंटेंट का सहारा लेना भी एक अच्छा विकल्प हो सकता है।
7. टेस्ट और रिवीजन की मदद लें
बच्चों से समय-समय पर टेस्ट लेना या उनसे सवाल पूछना उन्हें एक्टिव बनाए रखता है। पढ़ाई के बाद जो सीखा है, उसे लिखकर दोहराना स्मरणशक्ति को बेहतर बनाता है और नींद को दूर करता है।
8. पर्याप्त नींद भी जरूरी है
पढ़ाई के दबाव में कई बार बच्चे देर रात तक जागते हैं, जिससे अगली बार पढ़ते समय नींद आना स्वाभाविक है। बच्चे को कम से कम 8 घंटे की नींद जरूर लेने दें ताकि उसका शरीर और दिमाग तरोताज़ा रहे।
बच्चों के लिए पढ़ाई के दौरान नींद आना एक सामान्य समस्या है, लेकिन थोड़ी समझदारी और सही रणनीति से इसे दूर किया जा सकता है। माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चे को केवल पढ़ाई के लिए न कहें, बल्कि उसका पूरा रूटीन, खान-पान, नींद और मानसिक स्थिति पर भी ध्यान दें। याद रखें, एक स्वस्थ और खुश बच्चा ही बेहतर तरीके से सीख सकता है।
Life Style: जैसे-जैसे बच्चे बड़े होते हैं, खासकर टीनएज में कदम रखते हैं, वैसे-वैसे उनके ऊपर पढ़ाई का दबाव भी बढ़ने लगता है। माता-पिता बच्चों के बेहतर भविष्य को लेकर चिंतित रहते हैं और उनसे कुछ अपेक्षाएं भी होती हैं। लेकिन जब बच्चा पढ़ने बैठता है और उसे नींद आने लगती है, तो यह न केवल उसकी पढ़ाई में बाधा बनता है, बल्कि पैरेंट्स के लिए भी चिंता का कारण बन जाता है। पढ़ाई करते समय नींद आना एक सामान्य समस्या है, लेकिन इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। अच्छी बात ये है कि कुछ आसान उपाय अपनाकर इस समस्या को काफी हद तक दूर किया जा सकता है।
1.प्रॉपर लाइटिंग रखें
बच्चे के पढ़ाई करने की जगह पर पर्याप्त और उचित रोशनी होनी चाहिए। कम रोशनी आंखों पर ज़ोर डालती है, जिससे थकावट और नींद आने की संभावना बढ़ जाती है। नेचुरल लाइट सबसे बेहतर होती है, लेकिन अगर वह न हो तो सफेद LED लाइट का प्रयोग करें।
2. बच्चे के प्रोडक्टिव टाइम को पहचानें
हर बच्चे का पढ़ने का समय अलग होता है। कुछ बच्चे सुबह जल्दी उठकर पढ़ना पसंद करते हैं, तो कुछ को शाम का समय ज्यादा उपयुक्त लगता है। यह ज़रूरी है कि पैरेंट्स अपने बच्चे की आदतों को समझें और उसी हिसाब से पढ़ाई का टाइमटेबल तय करें।
3. छोटे-छोटे ब्रेक दें
लगातार कई घंटों तक पढ़ाई करने से बच्चा थक जाता है, जिससे उसका ध्यान भटकता है और नींद आने लगती है। 25–30 मिनट पढ़ाई के बाद 5–10 मिनट का छोटा ब्रेक लेना फोकस बनाए रखने में मदद करता है। इस तकनीक को "पोमोडोरो तकनीक" भी कहा जाता है, जिसे पढ़ाई के लिए बहुत प्रभावी माना जाता है।
4. संतुलित आहार और पर्याप्त पानी
पोषण की कमी और पानी की कमी भी बच्चों को थका सकती है। बच्चे के आहार में हरी सब्जियां, फल, सूखे मेवे और प्रोटीनयुक्त खाद्य पदार्थ शामिल करें। साथ ही, दिन भर भरपूर पानी पीने के लिए प्रोत्साहित करें।
5. सही मुद्रा में पढ़ाई
बिस्तर या लेटकर पढ़ाई करने से नींद आना लाज़मी है। बच्चों को टेबल-कुर्सी पर सीधा बैठकर पढ़ाई करने की आदत डालें। इससे न केवल उनका ध्यान केंद्रित रहेगा, बल्कि शरीर की मुद्रा भी सही बनी रहेगी।
6. पढ़ाई को रोचक बनाएं
यदि पढ़ाई बोरिंग लग रही हो, तो बच्चे जल्दी ऊब जाते हैं और नींद आने लगती है। आप पढ़ाई को रोचक बनाने के लिए क्विज़, फ्लैश कार्ड, या रचनात्मक एक्टिविटीज़ का उपयोग कर सकते हैं। इसके अलावा, ऑडियो-विज़ुअल कंटेंट का सहारा लेना भी एक अच्छा विकल्प हो सकता है।
7. टेस्ट और रिवीजन की मदद लें
बच्चों से समय-समय पर टेस्ट लेना या उनसे सवाल पूछना उन्हें एक्टिव बनाए रखता है। पढ़ाई के बाद जो सीखा है, उसे लिखकर दोहराना स्मरणशक्ति को बेहतर बनाता है और नींद को दूर करता है।
8. पर्याप्त नींद भी जरूरी है
पढ़ाई के दबाव में कई बार बच्चे देर रात तक जागते हैं, जिससे अगली बार पढ़ते समय नींद आना स्वाभाविक है। बच्चे को कम से कम 8 घंटे की नींद जरूर लेने दें ताकि उसका शरीर और दिमाग तरोताज़ा रहे।
बच्चों के लिए पढ़ाई के दौरान नींद आना एक सामान्य समस्या है, लेकिन थोड़ी समझदारी और सही रणनीति से इसे दूर किया जा सकता है। माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चे को केवल पढ़ाई के लिए न कहें, बल्कि उसका पूरा रूटीन, खान-पान, नींद और मानसिक स्थिति पर भी ध्यान दें। याद रखें, एक स्वस्थ और खुश बच्चा ही बेहतर तरीके से सीख सकता है।