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08-Apr-2025 01:24 PM
By First Bihar
lifestyle diseases : मौजूदा दौर में बदलती जीवनशैली लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल रही है। खासकर शहरों में तेजी से बढ़ती सुविधाओं और आरामतलब जीवन ने जहां एक ओर सहूलियत दी है, वहीं दूसरी तरफ मोटापा, डायबिटीज़, फैटी लीवर और थायराइड जैसी बीमारियों का खतरा भी कई गुना बढ़ा दिया है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, ओपीडी में आने वाले मरीजों में आधे से ज्यादा इन्हीं रोगों से पीड़ित मिलते हैं |
आपको बता दे कि बाहर मिलने वाला तैलीय और अस्वच्छ भोजन इन बीमारियों की प्रमुख वजह है। आजकल लोग घर पर भी मैदे और प्रोसेस्ड खाने का ज्यादा सेवन कर रहे हैं। व्यायाम, योग और पैदल चलना लगभग बंद हो चुका है, जिससे न सिर्फ वजन बढ़ता है, बल्कि ब्लड प्रेशर और हार्ट की बीमारियों का खतरा भी अधिक हो जाता है।
बाल रोग विशेषज्ञ के अनुसार अब छोटे बच्चों में दिमागी बुखार, निमोनिया और वर्चुअल ऑटिज्म जैसी परेशानियाँ तेजी से देखी जा रही हैं। उन्होंने कहा, हर दस में से दो से तीन बच्चों में वर्चुअल ऑटिज्म के लक्षण सामने आ रहे हैं। इसका सबसे बड़ा कारण मोबाइल पर अत्यधिक निर्भरता और एकल परिवार का वातावरण है।”
डॉक्टर्स की सलाह
पोषक तत्वों से भरपूर संतुलित भोजन करें| नियमित रूप से योग और व्यायाम को दिनचर्या में शामिल करें| बच्चों को मोबाइल स्क्रीन से दूर रखकर खेल-कूद में भाग लेने के लिए प्रेरित करें और समय-समय पर टीकाकरण कराएं और बच्चों की दिनचर्या का ख्याल रखें| मोटापा अब केवल एक साधारण समस्या नहीं रह गया है, यह कई अन्य बीमारियों को जन्म दे रहा है। अगर इस पर समय रहते नियंत्रण नहीं पाया गया, तो स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।
lifestyle diseases : मौजूदा दौर में बदलती जीवनशैली लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल रही है। खासकर शहरों में तेजी से बढ़ती सुविधाओं और आरामतलब जीवन ने जहां एक ओर सहूलियत दी है, वहीं दूसरी तरफ मोटापा, डायबिटीज़, फैटी लीवर और थायराइड जैसी बीमारियों का खतरा भी कई गुना बढ़ा दिया है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, ओपीडी में आने वाले मरीजों में आधे से ज्यादा इन्हीं रोगों से पीड़ित मिलते हैं |
आपको बता दे कि बाहर मिलने वाला तैलीय और अस्वच्छ भोजन इन बीमारियों की प्रमुख वजह है। आजकल लोग घर पर भी मैदे और प्रोसेस्ड खाने का ज्यादा सेवन कर रहे हैं। व्यायाम, योग और पैदल चलना लगभग बंद हो चुका है, जिससे न सिर्फ वजन बढ़ता है, बल्कि ब्लड प्रेशर और हार्ट की बीमारियों का खतरा भी अधिक हो जाता है।
बाल रोग विशेषज्ञ के अनुसार अब छोटे बच्चों में दिमागी बुखार, निमोनिया और वर्चुअल ऑटिज्म जैसी परेशानियाँ तेजी से देखी जा रही हैं। उन्होंने कहा, हर दस में से दो से तीन बच्चों में वर्चुअल ऑटिज्म के लक्षण सामने आ रहे हैं। इसका सबसे बड़ा कारण मोबाइल पर अत्यधिक निर्भरता और एकल परिवार का वातावरण है।”
डॉक्टर्स की सलाह
पोषक तत्वों से भरपूर संतुलित भोजन करें| नियमित रूप से योग और व्यायाम को दिनचर्या में शामिल करें| बच्चों को मोबाइल स्क्रीन से दूर रखकर खेल-कूद में भाग लेने के लिए प्रेरित करें और समय-समय पर टीकाकरण कराएं और बच्चों की दिनचर्या का ख्याल रखें| मोटापा अब केवल एक साधारण समस्या नहीं रह गया है, यह कई अन्य बीमारियों को जन्म दे रहा है। अगर इस पर समय रहते नियंत्रण नहीं पाया गया, तो स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।