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26-Jan-2026 12:27 PM
By First Bihar
UGC Act 2026: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए कानून को लेकर उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान सहित कई राज्यों में विरोध तेज हो गया है। छात्रों से लेकर सामाजिक संगठनों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं तक, अलग-अलग स्तर पर इस कानून के खिलाफ आवाज़ उठाई जा रही है।
उत्तर प्रदेश के मेरठ, हापुड़ सहित कई जिलों में छात्र और स्थानीय लोग विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। हापुड़ के सिंभावली क्षेत्र के बक्सर गांव में दर्जनों घरों के बाहर पोस्टर लगाए गए हैं, जिनमें भाजपा नेताओं से वोट मांगने न आने की अपील की गई है। पोस्टरों पर “यह स्वर्ण समाज का घर है” और “स्वर्ण अगेंस्ट बीजेपी” जैसे नारे लिखे गए हैं।
वहीं अमेठी जिले में UGC कानून के विरोध में भाजपा के एक बूथ अध्यक्ष ने इस्तीफा दे दिया है। भेंटुआ ब्लॉक के कोरारी हीरशाह गांव स्थित बूथ संख्या 7 के बूथ अध्यक्ष अखिलेश सिंह ने व्हाट्सएप के माध्यम से मंडल अध्यक्ष को अपना इस्तीफा भेजा। अखिलेश सिंह ने कहा कि यह कानून समाज को बांटने वाला है और उनके वैचारिक, सामाजिक व नैतिक सिद्धांतों के खिलाफ है, इसलिए वह इसका समर्थन नहीं कर सकते।
राजस्थान के अलवर में करणी सेना ने UGC के नए कानून के खिलाफ तीखा विरोध दर्ज कराया। करणी सेना ने आरोप लगाया कि यह बिल समाज में विभाजन पैदा करेगा और स्वर्ण समाज की आने वाली पीढ़ियों पर इसका सीधा असर पड़ेगा। संगठन ने केंद्र सरकार पर सनातन और समाज को बांटने का आरोप लगाते हुए देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी है। करणी सेना ने कहा कि वे इस बिल के विरोध में दिल्ली कूच करेंगे और जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करेंगे।
इस बीच गाजियाबाद के डासना पीठ के पीठाधीश्वर यति नरसिंहानंद गिरि को पुलिस ने नजरबंद कर लिया। वह UGC के नए कानून के विरोध में दिल्ली जाकर अनशन करने वाले थे, लेकिन उन्हें गाजियाबाद में ही रोक दिया गया। नरसिंहानंद गिरि ने योगी सरकार पर सवर्ण समाज की आवाज दबाने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह कानून पूरी तरह सवर्ण विरोधी और समाज को बांटने वाला है।
बिहार में भी UGC कानून को लेकर विरोध देखा जा रहा है। वैशाली जिले के हाजीपुर स्थित ऐतिहासिक कौनहारा घाट पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय UGC से जुड़े सवालों से बचते नजर आए। पत्रकारों द्वारा सवाल पूछे जाने पर उन्होंने “हर हर महादेव”, “बाबा हरिहरनाथ की जय” और “गंगा मैया की जय” के जयघोष करते हुए कार्यक्रम स्थल छोड़ दिया। मधुबनी सहित राज्य के कई जिलों में भी सवर्ण समाज के लोगों द्वारा विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है।
बता दें कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने हाल ही में UGC एक्ट 2026 के तहत ‘इक्विटी रेगुलेशन’ लागू किया है, जिसे सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में तत्काल प्रभाव से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। इसका उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देना बताया गया है।
नए नियमों के तहत अब सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के लिए समान अवसर प्रकोष्ठ (Equal Opportunity Cell) बनाना अनिवार्य कर दिया गया है। पहले यह व्यवस्था केवल एससी और एसटी वर्ग के लिए ही लागू थी।
सबसे अधिक विवाद इस बात को लेकर है कि नए नियमों में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को भी ‘जातिगत भेदभाव’ की श्रेणी में शामिल किया गया है। जनरल कैटेगरी के छात्रों और संगठनों का कहना है कि ओबीसी वर्ग को पहले से ही आरक्षण जैसी सुविधाएं मिल रही हैं, ऐसे में उन्हें भी इस सूची में शामिल करना अनुचित है।
UGC Act 2026: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए कानून को लेकर उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान सहित कई राज्यों में विरोध तेज हो गया है। छात्रों से लेकर सामाजिक संगठनों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं तक, अलग-अलग स्तर पर इस कानून के खिलाफ आवाज़ उठाई जा रही है।
उत्तर प्रदेश के मेरठ, हापुड़ सहित कई जिलों में छात्र और स्थानीय लोग विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। हापुड़ के सिंभावली क्षेत्र के बक्सर गांव में दर्जनों घरों के बाहर पोस्टर लगाए गए हैं, जिनमें भाजपा नेताओं से वोट मांगने न आने की अपील की गई है। पोस्टरों पर “यह स्वर्ण समाज का घर है” और “स्वर्ण अगेंस्ट बीजेपी” जैसे नारे लिखे गए हैं।
वहीं अमेठी जिले में UGC कानून के विरोध में भाजपा के एक बूथ अध्यक्ष ने इस्तीफा दे दिया है। भेंटुआ ब्लॉक के कोरारी हीरशाह गांव स्थित बूथ संख्या 7 के बूथ अध्यक्ष अखिलेश सिंह ने व्हाट्सएप के माध्यम से मंडल अध्यक्ष को अपना इस्तीफा भेजा। अखिलेश सिंह ने कहा कि यह कानून समाज को बांटने वाला है और उनके वैचारिक, सामाजिक व नैतिक सिद्धांतों के खिलाफ है, इसलिए वह इसका समर्थन नहीं कर सकते।
राजस्थान के अलवर में करणी सेना ने UGC के नए कानून के खिलाफ तीखा विरोध दर्ज कराया। करणी सेना ने आरोप लगाया कि यह बिल समाज में विभाजन पैदा करेगा और स्वर्ण समाज की आने वाली पीढ़ियों पर इसका सीधा असर पड़ेगा। संगठन ने केंद्र सरकार पर सनातन और समाज को बांटने का आरोप लगाते हुए देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी है। करणी सेना ने कहा कि वे इस बिल के विरोध में दिल्ली कूच करेंगे और जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करेंगे।
इस बीच गाजियाबाद के डासना पीठ के पीठाधीश्वर यति नरसिंहानंद गिरि को पुलिस ने नजरबंद कर लिया। वह UGC के नए कानून के विरोध में दिल्ली जाकर अनशन करने वाले थे, लेकिन उन्हें गाजियाबाद में ही रोक दिया गया। नरसिंहानंद गिरि ने योगी सरकार पर सवर्ण समाज की आवाज दबाने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह कानून पूरी तरह सवर्ण विरोधी और समाज को बांटने वाला है।
बिहार में भी UGC कानून को लेकर विरोध देखा जा रहा है। वैशाली जिले के हाजीपुर स्थित ऐतिहासिक कौनहारा घाट पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय UGC से जुड़े सवालों से बचते नजर आए। पत्रकारों द्वारा सवाल पूछे जाने पर उन्होंने “हर हर महादेव”, “बाबा हरिहरनाथ की जय” और “गंगा मैया की जय” के जयघोष करते हुए कार्यक्रम स्थल छोड़ दिया। मधुबनी सहित राज्य के कई जिलों में भी सवर्ण समाज के लोगों द्वारा विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है।
बता दें कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने हाल ही में UGC एक्ट 2026 के तहत ‘इक्विटी रेगुलेशन’ लागू किया है, जिसे सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में तत्काल प्रभाव से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। इसका उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देना बताया गया है।
नए नियमों के तहत अब सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के लिए समान अवसर प्रकोष्ठ (Equal Opportunity Cell) बनाना अनिवार्य कर दिया गया है। पहले यह व्यवस्था केवल एससी और एसटी वर्ग के लिए ही लागू थी।
सबसे अधिक विवाद इस बात को लेकर है कि नए नियमों में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को भी ‘जातिगत भेदभाव’ की श्रेणी में शामिल किया गया है। जनरल कैटेगरी के छात्रों और संगठनों का कहना है कि ओबीसी वर्ग को पहले से ही आरक्षण जैसी सुविधाएं मिल रही हैं, ऐसे में उन्हें भी इस सूची में शामिल करना अनुचित है।