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04-Aug-2025 08:29 AM
By First Bihar
SIR: बिहार के बाद अब असम में भी चुनाव आयोग स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के जरिए वोटर लिस्ट अपडेट करने की तैयारी में है, लेकिन मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने ही इस कदम पर सवाल उठा दिए हैं। सरमा का कहना है कि असम में अवैध घुसपैठ की समस्या को SIR से हल नहीं किया जा सकता। इसके बजाय सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में तैयार नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन्स (NRC) की फाइनल लिस्ट का इंतजार करना चाहिए। 2026 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले यह प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और बूथ लेवल ऑफिसर्स की ट्रेनिंग भी गर्मी की छुट्टियों में शुरू की जा चुकी हैं।
रिपोर्ट के अनुसार SIR के लिए शिक्षकों को BLO नियुक्त किया गया है, जिन्हें जन्म प्रमाणपत्र, फोटो, माता-पिता की वोटर आईडी और निवास प्रमाणपत्र जैसे दस्तावेजों की जांच का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। मृत्यु प्रमाणपत्र के आधार पर नाम हटाए जाएंगे। लेकिन सरमा का तर्क है कि बिहार जैसी प्रक्रिया असम की अनूठी समस्या को हल नहीं कर सकती। उन्होंने जोर दिया कि NRC को दस्तावेजों में शामिल करना चाहिए और उसकी अंतिम सूची के बिना SIR का कोई औचित्य ही नहीं है।
असम में NRC की प्रक्रिया 2015 में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर शुरू हुई थी। 31 अगस्त 2019 को जारी ड्राफ्ट सूची में 3.3 करोड़ आवेदकों में से 19.6 लाख लोगों को बाहर रखा गया था। हालांकि, केंद्र सरकार ने इसे अधिसूचित करने से इनकार कर दिया, क्योंकि इसमें स्वदेशी लोगों को छोड़ा गया और अवैध प्रवासियों को शामिल किया गया। सरमा ने कहा कि 29 लाख लोगों का बाहर होना अपर्याप्त है और पुनर्सत्यापन जरूरी है।
अब विपक्षी दल SIR को लेकर सवाल उठा रहे हैं, जैसा कि बिहार में भी देखा गया जहां 65 लाख नाम कटने पर जमकर विवाद हुआ। असम में भी विपक्ष का आरोप है कि SIR से खास समुदायों को निशाना बनाया जा सकता है। सरमा ने स्पष्ट किया कि असम की समस्या का हल केवल NRC की अंतिम सूची से संभव है जो अवैध प्रवासियों को चिह्नित करेगी। चुनाव आयोग ने 1 सितंबर तक दावे-आपत्तियां दर्ज करने का समय दिया है, लेकिन NRC की अनिश्चितता के बीच SIR को लेकर तनाव लगातार बना हुआ है।