ब्रेकिंग न्यूज़

train stone pelting : ट्रेनों पर पत्थरबाजी मामले में बिहार-बंगाल नहीं, यहां से आते हैं टॉप पत्थरबाज; नाम सुनकर आप भी चौंक जाएंगे ONLINE गेमिंग विवाद में दहला वैशाली, लालगंज गोला बाजार में सरेआम फायरिंग bomb blast : नीतीश कुमार के समृद्धि यात्रा कार्यक्रम के बीच सिवान में धमाका, एक की मौत; पुलिस ने जांच शुरू की Bihar schools : बिहार शिक्षा विभाग ने जारी किया निर्देश, 31 जनवरी को सभी स्कूलों में जुटेंगे अभिभावक; पढ़िए क्या है पूरा आदेश मुंगेर में युवक की बहादुरी, गंगा में डूब रही 2 महिलाओं की मनोज ने बचाई जान, ट्रैफिक डीएसपी बोले..सूझबूझ और साहस से बची दो जिंदगियां Bihar Bhumi: सरकारी जमीन का सबसे बड़ा दुश्मन कौन..? पूर्वी चंपारण में बड़ा-बड़ा खेल- तत्कालीन DCLR-CO वाली कमेटी ने 'हाट-बाजार' वाली 2 एकड़ जमीन का 'प्रकार' बदला और हो गए मालामाल Bihar commercial building rules : बिहार में रियल एस्टेट नियम बदले, अब 70% भूमि पर व्यावसायिक भवन निर्माण संभव ऑक्सीजन हटाने पर सवाल करना मरीज के परिजनों को पड़ गया महंगा, बेतिया GMCH के जूनियर डॉक्टरों ने कर दी पिटाई Patna hostel blast : पटना के हथुआ हॉस्टल में 40 सुतली बम और पेट्रोल बरामद, पुलिस रेड में 7 छात्र गिरफ्तार Mokama genealogy dispute : फर्जी वंशावली मामले में CO पर FIR दर्ज करने का आदेश,पढ़िए क्या है पूरी खबर

लोकसभा में पेश हुआ राइट टू डिस्कनेक्ट बिल, ऑफिस के बाद बॉस का फोन न उठाने का मिलेगा अधिकार

लोकसभा में ‘राइट टू डिस्कनेक्ट’ बिल पेश किया गया है, जिसमें कर्मचारियों को ऑफिस समय के बाद और छुट्टियों में काम से जुड़े कॉल व ईमेल का जवाब न देने का कानूनी अधिकार देने का प्रस्ताव है। एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले ने यह प्राइवेट मेंबर बिल पेश किया।

DELHI

07-Dec-2025 05:03 PM

By First Bihar

Right To Disconnect: यदि आप ऑफिस खत्म होने के बाद भी बॉस के ईमेल या फोन से परेशान रहते हैं, तो यह खबर आपके लिए हैं। बॉस की मनमानी से अब आपको जल्द ही कानूनन मुक्ति मिलेगी। इसे लेकर संसद में 'राइट टू डिस्कनेक्ट' विधेयक पेश किया गया है। जिसमें कर्मचारियों को छुट्टियों के दौरान काम से जुड़े फोन कॉल और ईमेल से डिस्कनेक्ट होने का प्रावधान है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) सांसद सुप्रिया सुले ने इस विधेयक को पेश किया। लोकसभा में पेश किये गये प्राइवेट मेंबर बिल का उद्धेश्य कर्मचारियों को ऑफिस की छुट्टी के बाद काम से जुड़े फोन कॉल और ईमेल का जवाब देने से छूट देना है। 


एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले ने राइट टू डिस्कनेक्ट बिल, 2025 पेश किया। जो कर्मचारियों के लिए वेलफेयर अथॉरिटी बनाने और हर कर्मचारी को ऑफिस समय के बाद और छुट्टियों के दौरान काम से जुड़े कॉल और ईमेल से पूरी तरह दूर रहने का अधिकार देता है। इस बिल के पास होने के बाद कर्मचारियों को ऑफिस से छुट्टी के बाद बॉस के बार-बार आने वाले कॉल से निजात मिल सकेगा। 


क्या है Right To Disconnect विधेयक?

'राइट टू डिस्कनेक्ट विधेयक, 2025' में कर्मचारियों को काम के घंटों यानी अपनी शिफ्ट के बाद ऑफिस के ईमेल और कॉल से डिस्कनेक्ट होने का अधिकार देने की बात की गई है। नौकरीपेशा लोगों को काम के घंटों के बाद पूरी तरह 'डिस्कनेक्ट' होने का कानूनी अधिकार मिल जाएगा। विधेयक में कर्मचारी कल्याण प्राधिकरण बनाने का प्रस्ताव है, जो यह सुनिश्चित करेगी कि किसी भी कर्मचारी पर ऑफिस के बाद कॉल या ईमेल का दबाव न डाला जाए।


विधेयक के अहम प्रावधान जानिए

विधेयक में प्रावधान है कि कर्मचारियों को ऑफिस के बाद आधिकारिक ईमेल-कॉल के लिए मजबूर न किया जाए। ऑफिस टाइम खत्म होते ही कर्मचारी का निजी समय शुरू हो जाता है। इस दौरान किसी भी तरह के फोन या ईमेल का जवाब देना बाध्यकारी नहीं होगा। ये नियम छुट्टियों पर भी लागू होगा। अगर विधेयक कानून बनता है, तो कर्मचारी कह सकेंगे कि वे ऑफिस समय के बाद किए गए कॉल-ईमेल का जवाब देने के लिए बाध्य नहीं हैं।


क्या पारित हो सकेगा विधेयक?

इस विधेयक को एक निजी विधेयक के तौर पर पेश किया गया है। दरअसल, लोकसभा और राज्यसभा के सदस्यों को उन विषयों पर विधेयक पेश करने की अनुमति है, जिन पर उन्हें लगता है कि सरकार को कानून बनाना चाहिए। कुछ मामलों को छोड़कर आमतौर पर ऐसे विधेयकों को प्रस्तावित कानून पर सरकार द्वारा जवाब देने के बाद वापस ले लिया जाता है। इन्हें पारित करा पाना बेहद मुश्किल होता है।