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Bihar commercial building rules : बिहार में रियल एस्टेट नियम बदले, अब 70% भूमि पर व्यावसायिक भवन निर्माण संभव

बिहार में शहरी विकास को नई रफ्तार देने के लिए सरकार ने व्यावसायिक भवन निर्माण नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब किसी भी भूखंड पर 40 प्रतिशत की बजाय 70 प्रतिशत तक व्यावसायिक निर्माण की अनुमति मिलेगी।

Bihar commercial building rules : बिहार में रियल एस्टेट नियम बदले, अब 70% भूमि पर व्यावसायिक भवन निर्माण संभव
Tejpratap
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4 मिनट

Bihar commercial building rules : बिहार सरकार ने शहरी विकास की गति को तेज करने के उद्देश्य से व्यावसायिक भवनों के निर्माण नियमों में अहम बदलाव किया है। अब राज्य में उपलब्ध भूमि के 70 प्रतिशत हिस्से तक व्यावसायिक भवनों का निर्माण किया जा सकेगा। इससे पहले यह सीमा केवल 40 प्रतिशत तक सीमित थी। सरकार के इस फैसले को शहरी नियोजन की दिशा में एक बड़ा और व्यावहारिक कदम माना जा रहा है, जिससे न केवल भूमि का बेहतर उपयोग संभव होगा, बल्कि व्यापारिक गतिविधियों को भी नई ऊर्जा मिलेगी।


उपमुख्यमंत्री सह नगर विकास एवं आवास मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने विभागीय समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों को इस संबंध में आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में शहरी क्षेत्रों में जमीन की उपलब्धता सीमित होती जा रही है, जबकि व्यापार और सेवाओं की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में पुराने नियम व्यावहारिक नहीं रह गए थे। नए प्रावधानों से भूमि का अधिकतम और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा।


अब तक लागू नियमों के तहत किसी भी भूखंड के केवल 40 प्रतिशत हिस्से पर ही व्यावसायिक निर्माण की अनुमति थी, जबकि शेष 60 प्रतिशत क्षेत्र को सेटबैक और खुले स्थान के रूप में छोड़ना अनिवार्य था। नई व्यवस्था में इस सीमा को बढ़ाकर 60 से 70 प्रतिशत तक कर दिया गया है। इसका सीधा अर्थ है कि अब जमीन का बड़ा हिस्सा निर्माण के लिए इस्तेमाल किया जा सकेगा, जिससे कम भूखंड पर भी बड़े और उपयोगी व्यावसायिक भवन खड़े किए जा सकेंगे।


सरकार ने केवल निर्माण क्षेत्र की सीमा ही नहीं बढ़ाई है, बल्कि सेटबैक यानी भवन के चारों ओर छोड़े जाने वाले खुले क्षेत्र के नियमों में भी राहत दी है। पहले कई मामलों में नियमों की वजह से जमीन का एक बड़ा हिस्सा अनुपयोगी रह जाता था। अब सेटबैक में कमी किए जाने से वही जमीन व्यावसायिक निर्माण के काम आ सकेगी। इससे खासतौर पर उन क्षेत्रों को फायदा मिलेगा, जहां प्लॉट छोटे आकार के हैं।


उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि यह फैसला भूमि मालिकों और निवेशकों दोनों के लिए फायदेमंद साबित होगा। भूमि मालिक अब अपनी संपत्ति की आर्थिक क्षमता का बेहतर उपयोग कर सकेंगे, जबकि निवेशकों को कम जमीन पर अधिक फ्लोर स्पेस उपलब्ध होगा। इससे शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, ऑफिस स्पेस, मॉल और अन्य व्यावसायिक परियोजनाओं के निर्माण को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य “सबका सम्मान, जीवन आसान” के संकल्प को जमीन पर उतारना है।


नई नीति से छोटे और मध्यम निवेशकों को भी बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। पहले जहां बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए विशाल जमीन की जरूरत पड़ती थी, अब उसी जमीन पर ज्यादा निर्माण संभव होगा। इससे रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश बढ़ेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। निर्माण कार्यों में तेजी आने से संबंधित उद्योगों, जैसे सीमेंट, स्टील और निर्माण सामग्री की मांग भी बढ़ेगी।


नगर विकास एवं आवास विभाग ने इस बदलाव को लागू करने के लिए एक नई नीति तैयार कर ली है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि इसे जल्द से जल्द व्यवहार में लाया जाए, ताकि स्वीकृति प्रक्रिया में अनावश्यक देरी न हो। सरकार का मानना है कि यह निर्णय शहरी नियोजन को अधिक आधुनिक और व्यावहारिक बनाएगा तथा तेजी से बढ़ती आबादी और व्यापारिक जरूरतों के अनुरूप बुनियादी ढांचे के विकास में मदद करेगा।


कुल मिलाकर, व्यावसायिक भवन निर्माण नियमों में किया गया यह बदलाव बिहार के शहरी विकास के लिए मील का पत्थर साबित हो सकता है। इससे न सिर्फ शहरों का आर्थिक स्वरूप बदलेगा, बल्कि निवेश, रोजगार और आधुनिक शहरी ढांचे को भी नई दिशा मिलेगी।