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Mokama genealogy dispute : फर्जी वंशावली मामले में CO पर FIR दर्ज करने का आदेश,पढ़िए क्या है पूरी खबर

मोकामा में वंशावली और जमीन रिकॉर्ड से जुड़ा मामला तूल पकड़ता जा रहा है। नगर सभापति निलेश कुमार की शिकायत पर सिविल कोर्ट ने तात्कालिक अंचलाधिकारी के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दिया है।

Mokama genealogy dispute : फर्जी वंशावली मामले में CO पर FIR दर्ज करने का आदेश,पढ़िए क्या है पूरी खबर
Tejpratap
Tejpratap
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Mokama genealogy dispute : मोकामा में अंचल कार्यालय से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। कोर्ट के आदेश के बाद मोकामा के अंचलाधिकारी (CO) के खिलाफ केस दर्ज करने की प्रक्रिया तेज़ हो गई है। मामला नगर परिषद के सभापति निलेश कुमार से जुड़ी कथित फर्जी वंशावली और बांसवाली तैयार करने का है।


दरअसल,मोकामा नगर सभापति निलेश कुमार द्वारा दायर परिवाद के आधार पर अब यह मामला निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। बाढ़ सिविल कोर्ट ने मोकामा थाना को आदेश दिया है कि वह तात्कालिक अंचलाधिकारी मनीष कुमार के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज करे। यह आदेश उस परिवाद के आलोक में दिया गया है, जिसमें सरकारी अभिलेखों में गंभीर अनियमितता, बिना आवेदन वंशावली निर्गत करने और तथ्यों को गलत ढंग से प्रस्तुत करने का आरोप लगाया गया है।


निलेश कुमार ने कंप्लेंट संख्या 691 C / 25 के तहत न्यायालय को बताया कि मोकामा के तत्कालीन अंचलाधिकारी मनीष कुमार द्वारा उनकी वंशावली बिना किसी आवेदन और बिना उनकी मांग के निर्गत कर दी गई। शिकायत के अनुसार, विभागीय जांच के दौरान कार्यपालक पदाधिकारी द्वारा पत्र संख्या 916 दिनांक 14 मई 2025 को जारी किया गया था। इसके महज दो दिन बाद, यानी 16 मई 2025 को बिना समुचित जांच के वंशावली निर्गत कर दी गई। आरोप है कि इस वंशावली में न केवल तथ्यों की अनदेखी की गई, बल्कि जानबूझकर त्रुटियां भी की गईं।


निलेश कुमार का कहना है कि जारी की गई वंशावली में उनके दोनों चचेरे भाइयों के नाम गलत तरीके से शामिल कर दिए गए, जबकि उनकी बहन का नाम वंशावली से पूरी तरह हटा दिया गया। यह सीधे-सीधे सरकारी दस्तावेज में हेरफेर का मामला बनता है, जो कानूनन गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। परिवाद में दूसरा महत्वपूर्ण बिंदु मोकामा स्थित आरोग्य भारत हॉस्पिटल से जुड़ा है। शिकायतकर्ता के अनुसार, यह स्पष्ट किया जाना था कि अस्पताल किस जमीन पर अवस्थित है और कुमार सानू का निलेश कुमार से क्या संबंध है। इसके लिए नियम के अनुसार आरेख (फैमिली ट्री/डायग्राम) बनाया जाना चाहिए था, लेकिन आरेख बनाने के बजाय अंचलाधिकारी ने वंशावली निर्गत कर दी, जो नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है।


इतना ही नहीं, निलेश कुमार ने यह भी आरोप लगाया कि आरोग्य भारत हॉस्पिटल जिस जमीन पर स्थित है, वह उनकी खतियानी जमीन है। इसके बावजूद अभिलेखों में उसे रैयत खतियानी के रूप में दर्शाया गया। निलेश कुमार का तर्क है कि जिस समय की खतियान का हवाला दिया गया है, उस समय उनका जन्म तक नहीं हुआ था। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिहार सरकार द्वारा आखिरी बार खतियान वर्ष 1911 में तैयार किया गया था, ऐसे में उस खतियान में उनका या किसी अन्य समकालीन व्यक्ति का नाम दर्ज होना अपने आप में संदेहास्पद और गलत है।


इस पूरे मामले को लेकर निलेश कुमार ने पहले प्रशासनिक स्तर पर समाधान की कोशिश की। उन्होंने अंचलाधिकारी से मुलाकात की, अनुमंडल पदाधिकारी को आवेदन दिया और मोकामा थाना में भी शिकायत दर्ज कराने का प्रयास किया। आरोप है कि प्रारंभिक चरण में मोकामा थाना ने उनका आवेदन लेने से भी इनकार कर दिया। बाद में आवेदन स्वीकार किया गया, जिसके बाद पुलिस अधीक्षक (एसपी) के निर्देश पर तीन दिनों के भीतर जांच कर रिपोर्ट सौंप दी गई।


प्रशासनिक स्तर पर समाधान न मिलने के बाद मामला न्यायालय पहुंचा। सभी तथ्यों और दस्तावेजों पर विचार करने के बाद सिविल कोर्ट ने इसे गंभीर मामला मानते हुए मोकामा थाना को आदेश दिया कि वह तात्कालिक अंचलाधिकारी मनीष कुमार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करे और विधि सम्मत कार्रवाई सुनिश्चित करे।


इस आदेश के बाद मोकामा के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। यह मामला न केवल सरकारी दस्तावेजों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि भूमि अभिलेख और वंशावली जैसे संवेदनशील विषयों में पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है। अब सभी की निगाहें पुलिस की अगली कार्रवाई और जांच की दिशा पर टिकी हुई हैं।