Bihar Bhumi: सरकारी जमीन का सबसे बड़ा दुश्मन कौन..? पूर्वी चंपारण में बड़ा-बड़ा खेल- तत्कालीन DCLR-CO वाली कमेटी ने 'हाट-बाजार' वाली 2 एकड़ जमीन का 'प्रकार' बदला और हो गए मालामाल

Bihar Bhumi News: बिहार में अफसरों की मिलीभगत से सरकारी भूमि को निजी हाथों में सौंपने का खेल सामने आया है। पूर्वी चंपारण के चकिया में बंद चीनी मिल और हाट-बाजार की जमीन की प्रकृति बदलकर करोड़ों की डील की गई।

1st Bihar Published by: Viveka Nand Updated Thu, 22 Jan 2026 11:32:32 AM IST

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Bihar Bhumi: बिहार में अफसरों की मिलीभगत से सरकारी भूमि का बंदरबांट किया जा रहा. सरकारी भूमि की जमाबंदी निजी व्यक्ति के नाम पर किया जा रहा है. अधिकारियों की मिलीभगत से बंद चीनी मिल की जमीन की बिक्री की जा रही. पूर्वी चंपारण के चकिया में चीनी मिल की जमीन बिक्री का मामला गरमाया हुआ है. पूर्वी चंपारण में सिर्फ चीनी मिल की जमीन का ही बंदरबांट नहीं किय़ा जा रहा, हाट-बाजार की जमीन को मोटी रकम लेकर सेट किया गया. सरकारी जमीन निजी हाथों में ही रहे, इसे लेकर बड़ी-बड़ी डील की जा रही. अधिकारी इतने बड़े खेल कर रहे कि जमीन का प्रकार ही बदल दे रहे. राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग लाख दावे कर ले, लेकिन हकीकत यही है कि सरकारी जमीन वापसी में सबसे बड़े बाधक राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग से जुड़े अधिकारी हैं. 

2 एकड़ जमीन पर हुआ बड़ा खेल 

पूर्वी चंपारण (मोतिहारी) में बड़ा-बड़ा खेल किया जा रहा है. वर्तमान में बंद चकिया चीनी मिल की जमीन बिक्री का मामला गरमाया है. मामला सामने आने के बाद पूर्वी चंपारण से पटना तक हलचल तेज हो गई है। सिर्फ चकिया चीनी मिल की जमीन में ही खेल नहीं किया गया, कई ऐसे सरकारी भूखंड हैं, जिन पर अधिकारियों ने बड़ी-बड़ी डील की है. जानकारी के अनुसार जिले का वैसा ब्लॉक मुख्यालय जहां कई साल पहले 2 एकड़ सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने को लेकर खूब आंदोलन हुआ था. खुलासा करने वाले शख्स की जान तक चली गई थी. इंसाफ नहीं मिलने पर उस शख्स के पुत्र ने भी आत्मदाह कर लिया था. उक्त सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने को लेकर पिता-पुत्र की जान चली गई थी. ब्लॉक मुख्यालय की 2 एकड़ जमीन जिस पर अतिक्रमणवाद चल रहा था, अतिक्रमण मुक्त तो नहीं ही हुआ, उस पर बड़ी डील कर ली गई. अधिकारियों ने सरकारी जमीन (हाट-बाजार) की प्रकृति ही बदल दिया . यह खेल कुछ समय (वर्ष) पहले की गई. खेल में तब के कई बड़े अधिकारी शामिल रहे हैं. यह काम इसलिए किया गया, ताकि करीब 2 एकड़ सरकारी जमीन निजी हाथों में ही रहे. 

सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने को खूब हुआ था आंदोलन 

सरकारी जमीन को निजी हाथों से निकालने में सबसे बड़े बाधक सरकारी अधिकारी ही हैं. जिनके कंधों पर सरकारी जमीन को अतिक्रमणमुक्त कराने की जिम्मेदारी है, वे नहीं चाहते कि जमीन की वापसी हो.जमीन निजी हाथों में ही रहे, इसके लिए तरह-तरह के खेल किए जा रहे हैं. आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, जिस जमीन (2 एकड़) पर सरकारी अधिकारियों ने खेल किया, वो बकास्त वृतदार किस्म की है. इसी बेशकीमती जमीन को अतिक्रमणुक्त कराया जाना था, क्यों कि यह निजी हाथों में था. जमीन को अतिक्रमणमुक्त कराने को लेकर काफी आंदोलन हुए, खेल में शामिल एक अंचल अधिकारी पर कार्रवाई की भी सिफारिश की गई. एसडीओ के द्वारा अतिक्रमणवाद भी चलाया गया था. 

डीसीएलआर-सीओ वाली कमेटी ने हाट-बाजार वाली जमीन की प्रकृति बदल दी

इसी बीच तत्कालीन एडीएम ने उक्त जमीन के प्रकार को लेकर तत्कालीन डीसीएलआर के नेतृत्व में तीन सदस्यीय कमेटी गठित की. टीम में दो अंचल के सीओ को रखा गया. सूत्र बताते हैं कि इसी कमेटी ने उक्त विवादित जमीन पर बड़ा खेल कर दिया. जो रिपोर्ट दी गई उसमें जमीन का नेचर ही बदल दिया. उक्त जमीन के नेचर से हाट-बाजार शब्द हटा दिया. इसके बाद उक्त जमीन की प्रकृति बदल गई। इस तरह से करोड़ों की जिस जमीन पर अतिक्रमणवाद चल रहा था,स्वतः खत्म हो गया, और मामले को रफा-दफा कर दिया गया. आज भी हाट-बाजार वाली वो सरकारी जमीन निजी व्यक्ति के ही हाथों में है. जिन अधिकारियों को जिम्मा दिया गया था, वो मालामाल होकर जिले से चले गए.