ब्रेकिंग न्यूज़

बिहार में अपराधियों का तांडव जारी: इंजीनियर की गोली मारकर हत्या, इलाके में सनसनी पटना: MLA फ्लैट में बिजली के कवर तार में आग लगने से मची अफरा-तफरी, विद्युत आपूर्ति ठप सहरसा पुलिस की बड़ी कार्रवाई, लग्जरी कार से भारी मात्रा में प्रतिबंधित कफ सिरप बरामद, 4 तस्कर गिरफ्तार नशे में धुत युवक ने की फायरिंग, महिला घायल, आरोपी को ग्रामीणों ने पकड़ा आरा–बक्सर फोरलेन पर भीषण सड़क हादसा, तीन युवकों की दर्दनाक मौत, एक की हालत गंभीर बिहार कांग्रेस विधायक दल के नेता पर आज फैसला संभव, पटना में अहम बैठक छपरा में फर्जी IAS बनकर DM से मिलने पहुंचा युवक गिरफ्तार, टाउन थाने में FIR दर्ज Bihar Crime News: बिहार में मोबाइल के लिए बड़े भाई ने ले ली छोटे भाई की जान, हत्या की वारदात से सनसनी Bihar Crime News: बिहार में मोबाइल के लिए बड़े भाई ने ले ली छोटे भाई की जान, हत्या की वारदात से सनसनी सीके अनिल ने अंचलाधिकारियों को मंत्री के सामने हड़काया, कहा..कल तक हड़ताल वापस लो, नहीं तो हो जाओगे डिसमिस

Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस यशवंत वर्मा की याचिका खारिज की, कहा- आचरण विश्वास योग्य नहीं

Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा की याचिका खारिज कर दी है। उन्होंने अपने खिलाफ महाभियोग की सिफारिश को चुनौती दी थी। कोर्ट ने कहा कि उनका आचरण विश्वास योग्य नहीं है।

Supreme Court News

07-Aug-2025 11:27 AM

By FIRST BIHAR

Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने उनके खिलाफ महाभियोग की कार्यवाही शुरू करने की सिफारिश को चुनौती दी थी। यह सिफारिश सुप्रीम कोर्ट की आंतरिक जांच समिति की रिपोर्ट और तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना द्वारा की गई थी।


कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि न्यायमूर्ति वर्मा का आचरण विश्वास पैदा करने योग्य नहीं है, इसलिए उनकी याचिका पर विचार नहीं किया जाना चाहिए। जस्टिस वर्मा ने अपनी याचिका में तर्क दिया था कि इन-हाउस जांच प्रक्रिया असंवैधानिक है और यह संसद के विशेषाधिकार को कमजोर करती है, क्योंकि जजों को हटाने का अधिकार केवल संसद को है। 


उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जांच समिति ने उन्हें उचित सुनवाई का अवसर नहीं दिया और साक्ष्यों की अनदेखी की हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इन दलीलों को खारिज कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इन-हाउस प्रक्रिया को पूर्ववर्ती निर्णयों में वैध ठहराया जा चुका है।


सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि पूर्व मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने समिति की रिपोर्ट राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजकर अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी निभाई। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने टिप्पणी की सीजेआई सिर्फ एक डाकघर नहीं होता। यदि किसी न्यायाधीश के खिलाफ कदाचार के प्रमाण हैं, तो सीजेआई का कर्तव्य है कि वह उन्हें सरकार तक पहुंचाएं।