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16-Oct-2025 01:37 PM
By First Bihar
FSSAI Act 2006 : भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने हाल ही में एक अहम आदेश जारी किया है, जिसमें फूड और पेय उत्पादों में ब्रांड नाम के रूप में “ORS” शब्द के इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई है। यह कदम उपभोक्ताओं को भ्रामक और भ्रमित करने वाले लेबलिंग से बचाने के लिए उठाया गया है। FSSAI ने स्पष्ट किया है कि अब किसी भी खाद्य या पेय उत्पाद के नाम में ORS शब्द का प्रयोग तब तक नहीं किया जा सकता जब तक वह उत्पाद विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा मान्यता प्राप्त न हो।
इससे पहले, FSSAI ने 14 जुलाई 2022 और 2 फरवरी 2024 के आदेशों के तहत कंपनियों को ORS शब्द का सीमित इस्तेमाल करने की अनुमति दी थी। उस समय कंपनियों को यह स्पष्ट करना अनिवार्य था कि उनका उत्पाद WHO द्वारा अनुशंसित ORS फॉर्मूला नहीं है। पुराने आदेश के अनुसार, ORS शब्द को ब्रांड नाम के शुरुआत या अंत में जोड़ने की अनुमति दी गई थी। लेकिन अब FSSAI ने इस अनुमति को पूरी तरह रद्द कर दिया है।
एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, FSSAI ने आदेश में साफ किया है कि फलों पर आधारित पेय, रेडी-टू-ड्रिंक, नॉन-कार्बोनेटेड ड्रिंक जैसे सभी उत्पादों में ORS शब्द का उपयोग करना, चाहे वह नाम के शुरुआत में हो या अंत में, कानून का उल्लंघन माना जाएगा। ऐसा करने वाली कंपनियों के खिलाफ FSSAI Act, 2006 की धारा 23 और 24 के तहत कार्रवाई की जा सकती है, क्योंकि यह उपभोक्ताओं को गुमराह करने वाला माना जाएगा।
इसके साथ ही, 8 अप्रैल 2022 के आदेश “भ्रामक विज्ञापन और ORS जैसी दिखने वाली प्रोडक्ट्स पर कार्रवाई” अभी भी लागू रहेंगे। इसका मतलब है कि लेबलिंग और विज्ञापन से जुड़े सभी नियमों का पालन करना अनिवार्य है। नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों पर धारा 52 और 53 के तहत सख्त कार्रवाई की जा सकती है।
FSSAI ने यह भी स्पष्ट किया है कि कंपनियां केवल उन्हीं उत्पादों पर ORS शब्द का उपयोग कर सकती हैं, जो WHO द्वारा अप्रूव्ड हों। इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं को असली ORS और अन्य पेय उत्पादों में अंतर समझाने में मदद करना है। इस आदेश से कंपनियों को अपने उत्पादों की ब्रांडिंग और मार्केटिंग के तरीके में बदलाव करना होगा।
इस निर्णय के तहत, उत्पाद निर्माताओं को अपने ब्रांड नामों और विज्ञापनों से ORS शब्द हटाने की सख्त हिदायत दी गई है। FSSAI का यह कदम उपभोक्ता सुरक्षा को बढ़ावा देने और बाजार में भ्रामक विज्ञापनों को रोकने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।