BIHAR ELECTION : बिहार में इस बार के विधानसभा चुनाव में सीट बंटवारे का खेल इतना आसान नहीं होने वाला है।इसकी वजह यह है कि महागठबंधन हो या एनडीए दोनों तरफ रस्साकसी का नया खेल।शुरू हो गया है। हर कोई खुद को दूसरे से अधिक महत्वपूर्ण बता रहा है। ऐसे में गठबंधन के अंदर जो बड़ी पार्टी हैं उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि आखिर समीकरण तैयार कैसे किया जाए। ऐसे में अब खबर यह है कि महागठबंधन के अंदर मुश्किलें थोड़ी और बढ़ सकती है।
दरअसल, पिछले दिनों जब राहुल और तेजस्वी यादव की वोटर अधिकार यात्रा खत्म हुई तो झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन राजद सुप्रीमो लालू यादव से मिलने उनके आवास पहुंचे।थे। उस दौरान तो इसे एक महज आम मुलाकात बताया का रहा था। लेकिन अब जो जानकारी सामने आई है वह टेंशन बढ़ा सकती है। तो आइए जानते हैं कि पूरी खबर क्या है ?
जानकारी के अनुसार, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बिहार चुनाव में अपनी किस्मत आजमाने का फैसला किया है। ऐसे में अब यह राजद को तय करना है कि 243 विधानसभा सीट में उन्हें कितनी सीट प्रदान की जाए। सिर्फ इतना ही नहीं पिछले दिनों भाजपा से बिफरे पूर्व केंद्रीय मंत्री पशुपति कुमार पारस भी अपनी पार्टी को लेकर महागठबंधन से नाता जोड़ने की बातें कही है। ऐसे में यदि सीट बंटवारे में इनका भी ख्याल रखना अहम हो जाता है। क्योंकि पारस की भी चाहत होगी कि उनका भतीजा सांसद न सही तो कम से कम विधायक ही बन जाए ताकि थोड़ी ताकत वापस मिल जाए। ऐसे में अब आठ पार्टी के साथ आने से सीट बंटवारे के फार्मूला में बदलाव तो हर हाल में करना होगा।
मालूम हो कि, दो और पार्टियों के महागठबंधन का हिस्सा बनने और नए सहयोगियों को समायोजित करने के लिए सभी पार्टी को अपनी सीटों का त्याग करना होगा। लेकिन पिछले दिनों इस गठबंधन में शामिल मुकेश सहनी ने सार्वजनिक तौर पर कहा कि मुझे इस बार के विधानसभा चुनाव में 60 से अधिक विधानसभा सीट चाहिए इसके साथ ही वह खुद को उपमुख्यमंत्री बनाए जाने की भी शर्तें रख रहे हैं।
इसके अलावा सीपीआई (माले ) ने भी कल अपनी बैठक में यह एलान किया है कि उन्हें इस बार के विधानसभा चुनाव में कम से कम 40 सीटें चाहिए। उससे कम सीटों पर चुनाव लड़ने से हमारी पार्टी को अधिक फायदा नहीं मिलने वाला है। इसलिए हमने 40 सीटों का लिस्ट भी सौंप दिया है। इसके साथ ही साथ अब सीपीआई और सीपीएम भी अपनी-अपंनी मांग रखेगी।
आपको बताते चलें कि, 2020 के विधानसभा चुनाव में राजद ने सबसे अधिक 144 सीटों पर चुनाव मैदान में उतरा था। जिसमें उन्हें 75 सीटों पर बहुमत हासिल हुई थी। इसके अलावा कांग्रेस भी 70 सीटों पर चुनाव मैदान में थी जिसमें 19 सीटों पर जीत हासिल हुई थी। जबकि सीपीआई (माले ) 19 सीटों पर मैदान में थी और इनका वोट बैंक भी काफी अच्छा रहा था और इन्होंने 12 सीटों पर जीत हासिल किया था। इसके अलावा सीपीएम 4 सीटों पर चुनाव में जिसमें वह 2 सीटों पर जीत हासिल कर पाई थी। इसके अलावा सीपीआई 6 सीटों में महज 2 सीटें ही जीत पाई थी। ऐसे म,में इस बार का भी फार्मूला इसे ध्यान में रखते हुए तैयार किया जाएगा और इस बार पिछले बार की तुलना में तीन नए दल भी सहयोगी बनें हैं तो उनका भी ख्याल करना होगा।
इधर, तेजस्वी ने खुद को मुख्यमंत्री का चेहरा भी घोषित कर दिया है। हालांकि,इसको लेकर कांग्रेस के तरफ से थोड़ी रसाकस्सी देखने को मिल रही है। इस बात का प्रमाण पिछले दिनों वोटर अधिकार यात्रा के दौरान भी देखने को मिला जब राहुल ने यह सवाल किया गया कि बिहार चुनाव के लिए सीएम फेस कौन होगा तो वह सवाल को अनसुना कर दिए थे। ऐसे में अब न सिर्फ सीट बंटवारा बल्कि सीएम फेस को लेकर भी मामला तनातनी वाला हो सकता है।