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Fake Job Abroad: अमेरिका और यूरोप में नौकरी दिलाने के नाम पर करोड़ों की ठगी, जालसाजी में फंसे बिहार के 300 बेरोजगार युवक

Fake Job Abroad: बिहार में साइबर फॉड का मामला लगातार बढ़ते जा रहा है। ताजा मामला सामने आया है जिसे देख पुलिस भी दंग रह गई है। विदेश भेजकर नौकरी दिलाने के नाम पर बेरोजगार युवाओं से करोड़ों रुपये ठगे गए हैं।

10-Oct-2025 07:16 AM

By First Bihar

Fake Job Abroad: बिहार में साइबर फॉड का मामला लगातार बढ़ते जा रहा है। ताजा मामला सामने आया है जिसे देख पुलिस भी दंग रह गई है। दरअसल, मुजफ्फरपुर शहर में युवाओं के साथ बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। विदेश भेजकर नौकरी दिलाने के नाम पर बेरोजगार युवाओं से करोड़ों रुपये ठगे गए हैं। जानकारी के अनुसार, शहर के बैरिया स्थित एक मॉल में इंपीरियल इंटरप्राइजेज नाम से तीन माह से चल रहा ऑफिस असल में फर्जी रैकेट का अड्डा था। इस रैकेट ने 300 से अधिक युवाओं से करीब तीन करोड़ रुपये ठग लिए।


यह गैंग बेरोजगारों को विदेश में आकर्षक नौकरी दिलाने का लालच देता था। बताया जा रहा है कि अब तक 29 युवकों को पश्चिमी अफ्रीका के बेनिन देश का फर्जी वीजा और एयर टिकट देकर मुंबई एयरपोर्ट भेजा गया था। वहीं, कई अन्य युवाओं को अमेरिका और यूरोप के देशों का फर्जी वीजा भी उपलब्ध कराया गया। ठगी का खुलासा तब हुआ जब मुंबई एयरपोर्ट पर जांच के दौरान वीजा फर्जी निकला और सभी युवक वापस लौट आए।


गुरुवार को जब पीड़ित युवक बैरिया स्थित मॉल पहुंचे, तो वहां का ऑफिस बंद मिला। इसके बाद गुस्साए युवाओं ने ऑफिस के बाहर जमकर हंगामा किया। सूचना मिलते ही सिटी एसपी कोटा किरण कुमार, एसडीपीओ टाउन टू विनीता सिन्हा और अहियापुर थानेदार रोहन कुमार मौके पर पहुंचे। पुलिस अधिकारियों ने युवकों को समझा-बुझाकर शांत कराया। इसके बाद पीड़ितों के आवेदन पर अहियापुर थाना में एफआईआर दर्ज की गई।


पुलिस ने इस मामले में झारखंड के धनबाद जिले के कलरास रोड भटकुलिया निवासी अभिषेक कुमार, रंजीत कुमार शर्मा, संदीप कुमार, विनय शर्मा और मो. अरमान को नामजद आरोपित बनाया है। पुलिस का कहना है कि यह रैकेट बड़े स्तर पर काम कर रहा था और इसके तार किसी अंतरराज्यीय या अंतरराष्ट्रीय गिरोह से जुड़े हो सकते हैं। जांच टीम ने ऑफिस से मिले कुछ दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए हैं, जिनकी जांच की जा रही है।


दरभंगा के बसतवारा निवासी मो. साबिर, जो इस रैकेट का शिकार बने, ने बताया कि “इंपीरियल इंटरप्राइजेज” के लोगों ने उसे विदेश भेजने का झांसा दिया था। 19 सितंबर को जब वह ऑफिस पहुंचा तो बताया गया कि सभी सीटें भर चुकी हैं, लेकिन मेडिकल अनफिट उम्मीदवारों की जगह उसे भेजा जा सकता है। इसके बाद उसे 21 सितंबर को जूरनछपरा स्थित एक पैथोलॉजी सेंटर में मेडिकल के लिए भेजा गया, जहां 3,000 लिए गए।


मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट मिलने के बाद उसे फिर ऑफिस बुलाया गया और शाम में करार पर हस्ताक्षर कराए गए। लेकिन, सबसे हैरानी की बात यह रही कि रात 11 बजे ही उसके मोबाइल पर ई-वीजा भेज दिया गया। इतनी जल्दी वीजा आने पर उसे शक हुआ। इसके बाद उससे 90,000 की मांग की गई और बताया गया कि 8 अक्टूबर को मुंबई से फ्लाइट है। मुंबई पहुंचने पर उसे जेजे हॉस्पिटल में टीका दिलवाया गया, लेकिन एयरपोर्ट पर जांच के दौरान पता चला कि वीजा फर्जी है।


सिवान के प्रिंस कुमार प्रसाद ने बताया कि उसने सोशल मीडिया पर विदेश भेजने से जुड़ा विज्ञापन देखा था और उसी के जरिए वह बैरिया स्थित ऑफिस तक पहुंचा। ऑफिस में विनय कुमार शर्मा और अभिषेक कुमार शर्मा नाम के लोगों ने उसका इंटरव्यू लिया और बताया कि उसे बेनिन देश में “स्टोर कीपर” की नौकरी के लिए चयन किया गया है। इसके बाद मेडिकल और इंटरव्यू की प्रक्रिया कराई गई।


प्रिंस ने बताया कि जिसने 90,000 रुपये की पूरी रकम दी, उसे वीजा, टिकट और पासपोर्ट वापस कर दिया गया, जबकि जिन युवकों ने कम पैसे दिए, उनका पासपोर्ट तक रोक लिया गया। इन लोगों के पास बड़ी संख्या में युवाओं के पासपोर्ट जमा थे। प्रिंस को भी फर्जी वीजा और टिकट देकर मुंबई भेजा गया। एयरपोर्ट पर फर्जीवाड़े का पता चलने के बाद जब वह वापस लौटा, तो पाया कि ऑफिस बंद है और सभी ठग फरार हैं।


सिटी एसपी ने बताया कि विदेश भेजने के नाम पर बड़े पैमाने पर ठगी का मामला सामने आया है। इस रैकेट के तार किसी बड़े गिरोह से जुड़े हो सकते हैं। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और अन्य राज्यों से भी जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस अनुसार, इस गिरोह का नेटवर्क बिहार, झारखंड, और दिल्ली तक फैला हो सकता है। कई युवकों के बयान लिए जा रहे हैं और बैंक खातों से जुड़ी जानकारी खंगाली जा रही है। वहीं, जिन युवकों के पासपोर्ट फंसे हुए हैं, उन्हें वापस दिलाने के लिए विशेष टीम गठित की गई है।