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DSP ने 100 करोड़ नहीं बल्कि 200-300 करोड़ कमाया, खुलासे ने हिला दिया सिस्टम..हो गया सस्पेंड

कानपुर पुलिस कमिश्नर की रिपोर्ट के बाद शुरू हुई SIT जांच में DSP ऋषिकांत शुक्ला की 100 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध संपत्ति का खुलासा हुआ है। विजिलेंस जांच के आदेश जारी कर उन्हें निलंबित कर दिया गया है।

04-Nov-2025 01:20 PM

By First Bihar

Bihar Desk: खाकी के दामन पर एक बार फिर से दाग लगा है. एक डीएसपी पर सैंकड़ो करोड़ रू की अवैध संपत्ति अर्जित करने के आरोप लगे हैं. खुलासे ने पूरे पुलिस महकमे को हिलाकर रख दिया है. आनन-फानन में DSP को निलंबित कर विजिलेंस जांच के आदेश दिए गए हैं. 

बता दें, कानपुर पुलिस कमिश्नर की रिपोर्ट के बाद शुरू हुई एसआईटी जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. बताया जाता है कि ऋषिकांत शुक्ला ने दरोगा (उपनिरीक्षक) पद पर रहते हुए 1998 से 2009 के बीच, खासकर कानपुर में तैनाती के दौरान, अकूत दौलत बटोरी. एसआईटी ने पाया कि शुक्ला ने अपनी घोषित आय के स्रोतों से कहीं अधिक करीब 100 करोड़ रुपये की संपत्ति अपने परिवार, साझेदारों और करीबियों के नाम पर खड़ी कर ली.  

जांच में यह बात सामने आई है कि डीएसपी ने अवैध कमाई को छिपाने के लिए बेनामी संपत्ति बनाई। आर्यनगर स्थित 11 दुकानें, जो कथित तौर पर उनके सहयोगी देवेंद्र दुबे के नाम पर दर्ज हैं. इसके अलावा, उनकी नजदीकी अखिलेश दुबे नामक एक शातिर अपराधी से भी सामने आई, जो फर्जी मुकदमे, जबरन वसूली और जमीन कब्जाने का गिरोह चलाता था. एसआईटी ने इस गठजोड़ को भी उजागर किया है . 

डीएसपी ऋषिकांत शुक्ला पर 100 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध संपत्ति अर्जित करने के मामले में शिकायतकर्ता सौरभ भदौरिया ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं. भदौरिया ने बताया कि शुक्ला ने एसओजी में तैनाती के दौरान ठेकेदारी, जमीन कब्जाने और बिल्डिंग निर्माण के नाम पर भारी भ्रष्टाचार किया. जांच में भले ही अभी तक 100 करोड़ की संपत्ति सामने आई हो, लेकिन कुल संपत्ति 200 से 300 करोड़ रुपये होने का अनुमान है. 

सूत्रों के अनुसार, शुक्ला की नोएडा, पंजाब, चंडीगढ़ समेत कई शहरों में बेनामी संपत्तियां हैं. कानपुर के आर्यनगर में 11 दुकानें और कई प्लॉट मिले हैं. इसके अलावा, उन्नाव और फतेहपुर में बिल्डरों के साथ मिलकर जमीनों पर कब्जे और निवेश के साक्ष्य भी मिले हैं. शिकायत में आरोप है कि डीएसपी के बेटे विशाल शुक्ला ने अपराधी अखिलेश दुबे के साथ मिलकर 33 कंपनियां बनाईं, जिनका इस्तेमाल काले धन को सफेद करने में किया गया