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20-Feb-2026 07:23 AM
By First Bihar
Indian Railway : भारतीय रेलवे ने संसद की एक समिति की फटकार के बाद 10 प्रमुख ट्रेनों से सुपरफास्ट का दर्जा हटा दिया है। यह कदम उस समय आया जब संसदीय लोक लेखा समिति (पीएसी) ने रेलवे पर आरोप लगाया कि बिना मानक गति के यात्रियों से सुपरफास्ट सरचार्ज वसूला जा रहा है। समिति ने फरवरी में संसद में अपनी रिपोर्ट में रेलवे को इस मामले में सुधार करने की हिदायत दी थी।
रेलवे बोर्ड ने इसकी समीक्षा के बाद पाया कि ये ट्रेनें कागजों में सुपरफास्ट थी, लेकिन वास्तविकता में इनकी औसत गति 55 किलोमीटर प्रतिघंटे के मानक पर खरी नहीं उतरती थी। इस कारण अब इन ट्रेनों को साधारण मेल-एक्सप्रेस ट्रेन की तरह ट्रैक पर चलाया जाएगा। इसका मतलब यह है कि यात्रियों को सुपरफास्ट सरचार्ज नहीं देना पड़ेगा और किराया 5 से 12 प्रतिशत तक कम हो जाएगा।
रेलवे के एक अधिकारी ने बताया कि सुपरफास्ट सरचार्ज हटने के बावजूद ट्रेन का मूल किराया यथावत रहेगा, लेकिन यात्रियों को स्लीपर में लगभग 30 रुपये (8%), एसी-2 और एसी-3 में 45 रुपये (4%), एसी-1 में 73 रुपये (2%) और जनरल श्रेणी में 15 रुपये (10-12%) तक की बचत होगी। हालांकि, ट्रेन को ट्रैक पर मिलने वाली प्राथमिकता हट जाएगी, जिससे यात्रा का समय थोड़ा बढ़ सकता है।
रेलवे बोर्ड 2026 के टाइम टेबल में लगभग 900 ट्रेनों के सुपरफास्ट मानक की व्यापक समीक्षा कर रहा है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि केवल वही ट्रेनें सुपरफास्ट दर्जा पाएं जो औसत गति के मानक पर खरी उतरती हों। इस कदम से भविष्य में और भी यात्रियों को किराए में कटौती का लाभ मिल सकेगा।
10 प्रमुख ट्रेनों में जिनसे सुपरफास्ट दर्जा हटाया गया है, उनमें प्रमुख हैं:
विभूति एक्सप्रेस: हावड़ा – प्रयागराज रामबाग
विभूति एक्सप्रेस: प्रयागराज रामबाग – हावड़ा
नेताजी एक्सप्रेस: हावड़ा – कालका (अप-डाउन)
उपासना एक्सप्रेस: हावड़ा – देहरादून
उपासना एक्सप्रेस: देहरादून – हावड़ा
कुंभ एक्सप्रेस: हावड़ा – देहरादून (अप-डाउन)
हिमगिरि एक्सप्रेस: हावड़ा – जम्मूतवी (अप-डाउन)
रेलवे का कहना है कि इस कदम से यात्रियों को वास्तविक गति और सुविधाओं के हिसाब से सटीक किराया देना सुनिश्चित होगा। पिछले समय में कई ट्रेनें केवल नाम में सुपरफास्ट थीं, लेकिन कागजी रफ्तार के कारण यात्रियों से अतिरिक्त शुल्क वसूला जा रहा था। अब सुधारात्मक कदम उठाने के बाद यह अन्याय दूर होगा।
यह कदम यात्रियों के हित में है। किराये में कटौती से कई लोग आर्थिक रूप से राहत महसूस करेंगे, खासकर लंबी दूरी की यात्रा करने वाले। वहीं, रेलवे प्रशासन का कहना है कि ट्रैक पर प्राथमिकता न मिलने से ट्रेन की समय-सारिणी में मामूली वृद्धि हो सकती है, लेकिन सुरक्षा और औसत गति पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
इससे पहले, भारतीय रेलवे ने सुपरफास्ट ट्रेनों को ट्रैक पर प्राथमिकता देने के लिए विशेष व्यवस्था की थी। सुपरफास्ट ट्रेनों को हमेशा पहले चलाने की सुविधा मिलती थी, ताकि वे समय पर गंतव्य तक पहुंचे। अब इन 10 ट्रेनों का दर्जा हटने के बाद, यह सुविधा भी खत्म हो जाएगी, जिससे यात्रा थोड़ी लंबी हो सकती है।
रेलवे बोर्ड के अधिकारी ने बताया कि आने वाले समय में सुपरफास्ट मानक की समीक्षा पूरी होने के बाद और भी ट्रेनें सामान्य मेल-एक्सप्रेस श्रेणी में आ सकती हैं। इससे यात्रियों को न केवल किराए में राहत मिलेगी बल्कि रेलवे का पारदर्शिता स्तर भी बढ़ेगा। यात्रियों के लिए यह बदलाव 13 अप्रैल से प्रभावी होगा, और इसके बाद से इन 10 ट्रेनों में यात्रा करना किफायती हो जाएगा।