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09-Jan-2026 08:16 AM
By First Bihar
Bihar Industrial Park : बिहार में औद्योगिक विकास को नई रफ्तार देने की दिशा में नीतीश सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। वाराणसी–कोलकाता एक्सप्रेस-वे के किनारे राज्य में चार आधुनिक औद्योगिक पार्क (इंडस्ट्रियल पार्क) स्थापित करने की तैयारी पूरी कर ली गई है। उद्योग विभाग इस महत्वाकांक्षी योजना को लेकर व्यापक कार्ययोजना तैयार कर रहा है। प्रस्तावित औद्योगिक पार्क गया, रोहतास, कैमूर और औरंगाबाद जिलों में बनाए जाएंगे। इसके लिए संबंधित जिलों में बड़े पैमाने पर उपयुक्त जमीन की तलाश शुरू कर दी गई है।
उद्योग विभाग के अनुसार, हाल ही में इन चारों औद्योगिक पार्कों को स्थापित करने का निर्णय लिया गया था। इसके बाद से ही जमीन चिन्हित करने और बुनियादी ढांचे की योजना पर तेजी से काम शुरू हो गया है। सरकार का मानना है कि वाराणसी–कोलकाता एक्सप्रेस-वे के निर्माण से बिहार को न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि कोलकाता और हल्दिया पोर्ट से सीधी और तेज कनेक्टिविटी मिलेगी। इससे राज्य के उद्योगों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचने में बड़ी सुविधा होगी।
कोलकाता पोर्ट से जुड़ाव, निर्यात को मिलेगा बढ़ावा
इस एक्सप्रेस-वे के जरिए कोलकाता पोर्ट तक पहुंचना बेहद आसान हो जाएगा। अनुमान है कि इस मार्ग से कोलकाता पोर्ट मात्र 6 घंटे में पहुंचा जा सकेगा। ऐसे में इन औद्योगिक पार्कों में तैयार होने वाले उत्पादों को देश-विदेश भेजना कहीं अधिक सुगम और कम लागत वाला होगा। उद्योग विभाग का उद्देश्य इन चारों औद्योगिक पार्कों को निर्यात के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करना है। यहां बड़े उत्पादन केंद्रों के साथ-साथ लॉजिस्टिक्स और एक्सपोर्ट हब भी विकसित किए जाएंगे।
सरकार का मानना है कि बेहतर सड़क कनेक्टिविटी, पोर्ट तक आसान पहुंच और नई औद्योगिक प्रोत्साहन नीति के कारण देश के बड़े उद्योगपति बिहार में निवेश के लिए आकर्षित होंगे। खासकर मैन्युफैक्चरिंग, फूड प्रोसेसिंग, टेक्सटाइल, ऑटो कंपोनेंट्स और कृषि आधारित उद्योगों के लिए ये क्षेत्र काफी उपयुक्त माने जा रहे हैं।
उद्यमियों की बढ़ती रुचि
नई प्रोत्साहन पैकेज नीति लागू होने के बाद इन जिलों में औद्योगिक इकाइयां स्थापित करने के लिए कई उद्यमियों ने अपनी रुचि भी जताई है। सरकार की ओर से भूमि उपलब्धता, बिजली, पानी, सड़क, सिंगल विंडो क्लीयरेंस और कर प्रोत्साहन जैसी सुविधाएं देने की योजना है। माना जा रहा है कि वाराणसी से हल्दिया और कोलकाता पोर्ट तक का यह सुविधाजनक मार्ग उद्योगपतियों के लिए लॉजिस्टिक लागत को काफी हद तक कम करेगा, जिससे बिहार निवेश के लिए एक प्रतिस्पर्धी गंतव्य बन सकता है।
19 हजार एकड़ जमीन की पहचान
बिहार सरकार ने नए औद्योगिक क्षेत्रों के विकास के लिए राज्यभर में करीब 19 हजार एकड़ जमीन की पहचान कर ली है। इस जमीन का उपयोग न केवल मौजूदा औद्योगिक क्षेत्रों के विस्तार में किया जाएगा, बल्कि प्रस्तावित नए औद्योगिक पार्कों के लिए भी किया जाएगा। सरकार ने औद्योगिक विकास को लेकर एक नई कार्ययोजना तैयार की है, जिसमें क्षेत्रीय संतुलन के साथ रोजगार सृजन पर विशेष जोर दिया गया है।
उद्योग विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इन औद्योगिक पार्कों के विकसित होने से स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे। इसके साथ ही छोटे और मध्यम उद्यमों को भी बड़े उद्योगों से जुड़ने का मौका मिलेगा, जिससे पूरे क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों में तेजी आएगी।
बिहार में 186 किलोमीटर लंबा होगा एक्सप्रेस-वे
वाराणसी–कोलकाता एक्सप्रेस-वे की बिहार में कुल लंबाई अब 186 किलोमीटर होगी। नए एलाइनमेंट के बाद इस सड़क का राज्य में विस्तार हुआ है। पहले यह एक्सप्रेस-वे बिहार में मात्र 153 किलोमीटर लंबा प्रस्तावित था, लेकिन मार्ग परिवर्तन के बाद इसका विस्तार लगभग 33 किलोमीटर बढ़ गया है। अब यह सड़क सासाराम शहर से होकर गुजरेगी, जिससे रोहतास और आसपास के इलाकों को सीधा लाभ मिलेगा।
चार प्रमुख जिलों से होकर गुजरने वाले इस एक्सप्रेस-वे के किनारे औद्योगिक पार्कों की स्थापना से उद्योगपतियों को एक सुविधाजनक और बड़ा बाजार उपलब्ध होगा। साथ ही, बिहार के पिछड़े और अर्ध-विकसित क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
आर्थिक विकास की नई धुरी
कुल मिलाकर, वाराणसी–कोलकाता एक्सप्रेस-वे के किनारे प्रस्तावित चार औद्योगिक पार्क बिहार के औद्योगिक और आर्थिक विकास की नई धुरी साबित हो सकते हैं। बेहतर कनेक्टिविटी, निर्यात की संभावनाएं और निवेश के अनुकूल माहौल राज्य को उद्योग के नक्शे पर मजबूती से स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। सरकार को उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में इसका सीधा असर रोजगार, राजस्व और समग्र विकास पर दिखाई देगा।