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12-Jun-2025 07:27 AM
By First Bihar
Bihar News: बिहार पुलिस अब अपराधियों के संपति को निशाने में लिया हुआ है। अब गिरफ्तारी और सजा तक सीमित कार्रवाई से आगे बढ़ते हुए बिहार पुलिस अपराधियों की अवैध संपत्ति जब्त करने की दिशा में भी तेज़ी से कदम बढ़ा रही है। अपराध से अर्जित संपत्ति को जब्त करने की प्रक्रिया को अंजाम देने के लिए राज्य पुलिस ने विशेष मुहिम छेड़ी है। अब तक करीब 2000 कुख्यात बदमाशों को चिन्हित किया जा चुका है, जिनकी संपत्ति पर कानूनी शिकंजा कसा जा सकता है।
दरअसल, पुलिस मुख्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक, चिन्हित किए गए बदमाशों में से 150 के खिलाफ संपत्ति जब्ती के प्रस्ताव कोर्ट में समर्पित कर दिए गए हैं। इनमें कई मामलों में कोर्ट ने कार्रवाई की अनुमति देते हुए लगभग डेढ़ दर्जन अपराधियों को नोटिस जारी कर दिए हैं। बाकी मामलों में पुलिस दस्तावेज़ी कार्रवाई और सबूत जुटाने में लगी हुई है ताकि प्रस्ताव को कानूनी रूप से मजबूती से प्रस्तुत किया जा सके।
इस मुहिम के तहत मुजफ्फरपुर के कुख्यात चुन्नू ठाकुर की संपत्ति जब्त करने का आदेश कोर्ट ने जारी कर दिया है। स्थानीय डीएम ने भी जब्ती प्रक्रिया को अमलीजामा पहनाने का निर्देश दे दिया है। दूसरी ओर, सीवान के कुख्यात रईस खान की संपत्ति भी जल्द जब्त की जा सकती है। पुलिस द्वारा समर्पित प्रस्ताव पर कोर्ट ने रईस खान को नोटिस भेजा है, जिसमें उसे यह साबित करना होगा कि उसकी संपत्ति अपराध से अर्जित नहीं है।
बिहार पुलिस के डीजीपी विनय कुमार इस पूरे अभियान की खुद निगरानी कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि, “अब अपराधियों को सिर्फ गिरफ्तार कर जेल भेजना ही नहीं, बल्कि उनके आर्थिक संसाधनों को भी खत्म करना हमारा लक्ष्य है। कानून के दायरे में रहकर अपराधियों की अवैध कमाई को खत्म करने के लिए हम पूरी गंभीरता से कार्रवाई कर रहे हैं।”
अपराधियों की संपत्ति जब्ती की यह प्रक्रिया भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (Bharatiya Nyaya Suraksha Sanhita - BNSS) की धारा 107 के अंतर्गत की जा रही है। यह धारा पुलिस को अधिकार देती है कि यदि किसी अपराधी की संपत्ति अपराध से अर्जित पाई जाती है, तो उसे जब्त किया जा सकता है।
प्रस्ताव प्रस्तुत करने से पहले अनुसंधानकर्ता अधिकारी (IO) उस अपराधी की पूरी वित्तीय स्थिति और संपत्ति की जांच करता है। प्रस्ताव में यह साबित करना होता है कि जिस संपत्ति को जब्त किया जा रहा है, वह वैध आय से नहीं, बल्कि अपराध से कमाई गई है। यदि आरोपी वैध आय का स्रोत नहीं बता पाता, तो कोर्ट जब्ती की अनुमति देता है।
सूत्रों के मुताबिक, पुलिस मुख्यालय ने सभी जिलों को निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने क्षेत्र में सक्रिय अपराधियों की आर्थिक गतिविधियों पर नजर रखें और यदि संदेहास्पद संपत्ति पाई जाती है, तो उसकी रिपोर्ट तैयार कर तत्काल कार्रवाई की जाए। यह कार्रवाई उन मामलों में भी की जा रही है जिनमें आरोपी फिलहाल फरार हैं या जमानत पर हैं। बिहार पुलिस की यह पहल न केवल अपराध नियंत्रण में कारगर साबित हो सकती है, बल्कि समाज में यह संदेश भी दे रही है कि अपराध का रास्ता अब फायदे का सौदा नहीं रहा। सिर्फ सजा ही नहीं, अब अवैध कमाई भी कानून के निशाने पर है।