Bihar Vidhan Sabha : नल -जल योजना के तहत हो रहा खूब भ्रष्टाचार ! अपने ही सरकार पर LJP(R) के विधायक ने लगाया आरोप, विपक्ष भी समर्थन में आया; अधिकारियों पर गड़बड़ी का आरोप Bihar Budget Session 2026: बिहार विधानसभा बजट सत्र का तीसरा दिन, सदन के बाहर लगे ‘नीतीश कुमार, हाय-हाय के नारे’ Bihar Budget Session 2026: बिहार विधानसभा बजट सत्र का तीसरा दिन, सदन के बाहर लगे ‘नीतीश कुमार, हाय-हाय के नारे’ Bihar government drainage : टाल इलाके में जल जमाव की समस्या का कब होगा निदान, सदन में उठा सवाल तो जल संसाधन विभाग ने बताया समय और पूरा तरीका NEET student case : 'नीट मामले में बोलने पर पुलिस अधिकारियों का आता है फोन', RJD MLA भाई वीरेंद्र का सनसनीखेज खुलासा, बताया किसको बचा रही सरकार Bihar Budget Session 2026-27 : बिहार विधानसभा बजट सत्र के तीसरे दिन की कार्यवाही शुरू, आज तेजस्वी यादव भी राज्यपाल के अभिभाषण पर रखेंगे अपनी बात Aadhaar Deactivated : 3 करोड़ लोगों का आधार कार्ड हुआ ब्लॉक, ऐसे करें चेक; कहीं लिस्ट में आपका नाम भी तो नहीं है शामिल PAN Card update : शादी के बाद PAN कार्ड में चेंज करवाना है खुद का नाम, तो जानिए क्या है सबसे आसान तरीका; बस करना होगा यह छोटा सा काम Bihar latest crime news : बिहार का अनोखा केस ! एक साथ गांव के सभी सवर्णों पर SC-ST एक्ट के तहत FIR दर्ज; पढ़िए क्या है पूरी खबर Nitish Kumar convoy : अब प्रधानमंत्री की तरह नीतीश कुमार भी करेंगे बुलेटप्रूफ रेंज रोवर की सवारी, जानें गाड़ी की हाईटेक सुरक्षा और लग्जरी खासियत
20-Dec-2025 01:44 PM
By Viveka Nand
Bihar News: बिहार में भ्रष्टाचार चरम पर है. छोटे से लेकर बड़े अधिकारी तक लुट मचा रहे. जांच एजेंसियां कार्रवाई भी कर रहीं, फिर भी डर नहीं. नई सरकार बनने के बाद भ्रष्टाचारियों के खिलाफ आर्थिक अपराध इकाई, निगरानी ब्यूरो और विशेष निगरानी इकाई टूट पड़ी हैं. लगातार एक्शन हो रहा है. जांच में यह बात सामने आ रही है कि, भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारी-इंजीनियर अवैध कमाई को आभूषण-जमीन-फ्लैट में लगा रहे और उसे सरकार से छुपा ले रहे.
रिटायर्ड कार्यपालक अभियंता की 100 फीसदी पेंशन जब्त
गौरतलब है कि, नीतीश सरकार ने हर वर्ष सभी सरकारी सेवको को संपत्ति का ब्योरा सार्वजनिक करने का नियम बनाया है. लेकिन धनकुबेर अधिकारियों को इससे मतलब नहीं. अवैध तरीके से धन कमाना और सरकार से छुपा लेना, उनकी नियती में है. एक कार्यपालक अभियंता ने जमकर माल बनाया, छापे में लगभग 3 किलो सोना मिला था, रिटायरमेंट के बाद अब उक्त कार्यपालक अभियंता की 100 फीसदी पेंशन जब्त कर ली गई है.
ईओयू ने 2013 में की थी छापेमारी
भवन निर्माण विभाग के तत्कालीन कार्यपालक अभियंता अवधेश कुमार मंडल के खिलाफ आर्थिक अपराध इकाई ने आय से अधिक संपत्ति का केस दर्ज किया था. इनके खिलाफ वर्ष 2013 में केस सं- 16 दर्ज की गई थी. डीए केस दर्ज होने के बाद भवन निर्माण विभाग ने आरोपी कार्यपालक अभियंता अवधेश कुमार मंडल के खिलाफ 15 जुलाई 2013 के प्रभाव से विभागीय कार्यवाही चलाया. मंडल के खिलाफ गंभीर आरोप प्रकाश में आने पर 11 फरवरी 2014 को अनुपूरक आरोप पत्र गठित कर विभागीय कार्यवाही में शामिल किया गया और जांच आयुक्त को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया था . संचालन पदाधिकारी ने 4 अक्टूबर 2023 को अवधेश कुमार मंडल के खिलाफ संचालित विभागीय कार्यवाही का जांच प्रतिवेदन उपलब्ध कराया, जिसमें अनुपूरक आरोप संख्या-दो को आंशिक रूप से प्रमाणित प्रतिवेदन किया . भवन निर्माण विभाग जांच रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं हुआ. इसके बाद असहमति के बिंदु पर दुबारा जांच कर रिपोर्ट देने को कहा गया. मुख्य जांच आयुक्त ने विभाग को सूचित किया है, विभाग खुद सक्षम है. इसके बाद भवन निर्माण विभाग ने आरोपी कार्यपालक अभियंता से असहमति के बिंदु पर फिर से शो-क़ॉज पूछा .
अभियंता की पत्नी के नाम पर था दोनों फ्लैट
भवन निर्माण विभाग के मुजफ्फरपुर में पदस्थापित तत्कालीन कार्यपालक अभियंता अवधेश कुमार मंडल ने जो जवाब दिया, उसके बाद विभागीय स्तर पर समीक्षा की गई. विभाग ने पाया कि आर्थिक अपराध इकाई द्वारा की गई छापेमारी में इनके एवं इनके परिवार के नाम पर पाई गई चल-अचल संपत्ति ज्ञात स्रोतों से लगभग 251 फ़ीसदी अधिक है, जो नाजायज एवं भ्रष्ट तरीके से अर्जित की गई है. आरोपी कार्यपालक अभियंता ने जवाब में बताया कि उक्त अर्जित संपत्ति में फ्लैट संख्या- 202 मोनिका अपार्टमेंट लोन लेकर खरीदी गई है. उक्त संपत्ति की खऱीद के संबंध में उनके द्वारा विभागीय अनुमति दिए जाने के संबंध में साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया . इसके अलावे अन्य संपत्तियों के ज्ञात स्रोत के संबंध में कार्यपालक अभियंता ने अपने बचाव बयान में कोई उल्लेख नहीं किया है. इससे स्पष्ट है कि मंडल के द्वारा अर्जित संपत्ति आय के ज्ञात स्रोत से अधिक है. ऐसे में इनका बयान स्वीकार योग्य नहीं है .
फ्लैट से लगभग 3 किलो सोना मिला था....
अनुपूरक आरोप संख्या-1 में विभाग ने कहा है कि अवधेश कुमार मंडल के फ्लैट से 2 किलो 879 ग्राम सोने के आभूषण मिले थे. इस संबंध में इनके द्वारा स्पष्ट किया गया था कि इनमें से अधिकांश आभूषण उनके साल मनीष कुमार का है.जबकि इनके साला द्वारा इस आभूषण का दावा किया जाने का कोई कागजात प्रस्तुत नहीं किया. पुलिस अधीक्षक ने इस बात का उल्लेख किया है कि फ्लैट नंबर 201 एवं 202 आरोपी कार्यपालक अभियंता की पत्नी प्रतिभा कुमारी के नाम से निबंधित है. दोनों फ्लैट अंदर से एक दूसरे से जुड़े हुए हैं. मनीष कुमार कार्यपालक अभियंता मंडल के साले हैं, जो साथ में ही रहते हैं. अनुसंधान में यह बात प्रकाश में आई की मनीष कुमार द्वारा कार्यपालक अभियंता द्वारा अर्जित अवैध संपत्ति को छिपाने में उत्प्रेरक का कार्य किया है. ऐसे में जांच के बाद साला मनीष के खिलाफ भी धारा 109 के तहत आरोप पत्र समर्पित किया गया है.
उपहार में मिली संपत्ति की भी जानकारी देनी है...
अनुपूरक आरोप संख्या दो एवं तीन में विभाग ने स्पष्ट किया है कि सरकारी सेवक को विभिन्न विषयों के संबंध में हर वर्ष संपत्ति के ब्योरा में उल्लेख करना है. कार्यपालक अभियंता ने अपने स्पष्टीकरण में साला मनीष कुमार द्वारा उपहार में उनकी पत्नी एवं पुत्री को दी गई संपत्ति का विवरणी नहीं बताया है. जबकि यह नियम परिवार के सदस्यों द्वारा निजी स्रोत से या विरासत में अर्जित संपत्ति पर लागू नहीं होता है. उपहार में मिली संपत्ति को संपत्ति के ब्योरा में साझा करना होता है. उपहार में मिली संपत्ति को मंडल ने अपनी संपत्ति विवरणी में उल्लेख न कर नियम का स्पष्ट उल्लंघन किया है. मंडल ने अपनी पुत्री को 2007-08 से स्वावलंबी बताया है, जबकि उनकी आय का स्रोत एवं पारिवारिक स्थिति का कोई उल्लेख नहीं किया. ऐसे में मुजफ्फरपुर के तत्कालीन कार्यपालक अभियंता अवधेश कुमार मंडल जो रिटायर हो चुके हैं. इनको पेंशन को 100 फीसदी कटौती का दंड बरकरार रखा जाता है. विभाग ने तीन महीने पहले ही यह आदेश जारी किया था.