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07-Mar-2026 01:45 PM
By First Bihar
Bihar news : बिहार की राजनीति में पारिवारिक विरासत कोई नई बात नहीं रही है। यहां कई ऐसे बड़े राजनीतिक परिवार रहे हैं जिनकी दूसरी और तीसरी पीढ़ी भी सक्रिय राजनीति में उतरकर अपनी पहचान बना चुकी है। समय-समय पर राज्य के कई प्रमुख नेताओं ने अपने बाद अपनी राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने के लिए अपने बेटों को राजनीति में उतारा है। अब मुख्यमंत्री Nitish Kumar के बेटे Nishant Kumar के संभावित राजनीतिक डेब्यू को लेकर एक बार फिर यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या बिहार में एक और राजनीतिक विरासत आगे बढ़ने वाली है।
दरअसल, बिहार के राजनीतिक इतिहास पर नजर डालें तो अब तक कई ऐसे मुख्यमंत्री रहे हैं जिनके बेटे सक्रिय राजनीति में आए और कई ने राज्य तथा राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान भी बनाई। इन नेताओं ने अपने पिता की राजनीतिक विरासत को संभालते हुए अलग पहचान भी बनाने की कोशिश की।
बिहार की राजनीति में सबसे चर्चित राजनीतिक परिवार की बात करें तो इसमें Lalu Prasad Yadav और Rabri Devi का नाम सबसे पहले आता है। राष्ट्रीय जनता दल के इस परिवार की राजनीतिक पकड़ लंबे समय से बिहार की राजनीति में दिखाई देती रही है। उनके दोनों बेटे Tejashwi Yadav और Tej Pratap Yadav सक्रिय राजनीति में हैं। तेजस्वी यादव आज बिहार की राजनीति के सबसे प्रभावशाली युवा नेताओं में गिने जाते हैं और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में अहम भूमिका निभा रहे हैं। वहीं तेज प्रताप यादव भी लगातार राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय रहते हैं और अपनी अलग शैली के कारण अक्सर चर्चा में बने रहते हैं।
इसी तरह बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री Jagannath Mishra के बेटे Nitish Mishra ने भी राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई है। नीतीश मिश्रा भारतीय जनता पार्टी के प्रमुख नेताओं में शामिल हैं और बिहार सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। वे लंबे समय से सक्रिय राजनीति में हैं और राज्य की राजनीति में उनकी एक मजबूत पहचान है।
पूर्व मुख्यमंत्री Bhagwat Jha Azad के बेटे Kirti Azad का राजनीतिक सफर भी काफी दिलचस्प रहा है। किर्ति आजाद पहले भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाड़ी के रूप में देशभर में मशहूर हुए और बाद में राजनीति में सक्रिय हो गए। उन्होंने कई बार सांसद के रूप में संसद में बिहार का प्रतिनिधित्व किया और राष्ट्रीय राजनीति में भी अपनी पहचान बनाई।
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री Jitan Ram Manjhi के बेटे Santosh Kumar Suman भी सक्रिय राजनीति में हैं। संतोष सुमन हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के प्रमुख नेताओं में गिने जाते हैं और बिहार सरकार में मंत्री पद की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। वे अपने पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं और राज्य की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
इसी तरह बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री Satendra Narayan Sinha के बेटे Nikhil Kumar भी राजनीति में आए और कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे। निखिल कुमार भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी रहे और बाद में राजनीति में सक्रिय होकर सांसद भी बने। इसके अलावा वे राज्यपाल जैसे महत्वपूर्ण संवैधानिक पदों पर भी रह चुके हैं।
इन उदाहरणों से साफ है कि बिहार की राजनीति में राजनीतिक विरासत की परंपरा काफी पुरानी रही है। कई ऐसे नेता हैं जिनके बेटे राजनीति में आए और अपने-अपने स्तर पर सफल भी हुए। हालांकि हर नेता के बेटे को राजनीति में उतनी ही सफलता मिले, यह जरूरी नहीं होता, क्योंकि अंततः जनता ही तय करती है कि किसे स्वीकार करना है और किसे नहीं।
अब सबकी नजर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार पर टिकी हुई है। लंबे समय तक राजनीति से दूरी बनाए रखने वाले निशांत कुमार के बारे में हाल के दिनों में यह चर्चा तेज हुई है कि वे जल्द ही सक्रिय राजनीति में कदम रख सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो यह बिहार की राजनीति में एक और राजनीतिक विरासत के विस्तार के रूप में देखा जाएगा।
आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि निशांत कुमार राजनीति में किस तरह की भूमिका निभाते हैं और क्या वे अपने पिता की तरह बिहार की राजनीति में प्रभाव छोड़ने में सफल हो पाते हैं या नहीं। फिलहाल उनकी संभावित एंट्री ने बिहार की सियासत में एक नई बहस जरूर छेड़ दी है।