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08-Jun-2025 08:22 AM
By First Bihar
Bihar News: बिहार नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में बड़ी छलांग लगाने जा रहा है। राज्य का सबसे बड़ा फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट नवादा जिले के फुलवारिया जलाशय में बनकर तैयार हो चुका है। बिजली विभाग के अधिकारियों के अनुसार, आगामी दो महीनों में इस प्लांट से 10 मेगावाट बिजली उत्पादन शुरू हो जाएगा। यह राज्य का तीसरा फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट होगा, जिसे रेस्को मोड (RESCO – Renewable Energy Service Company) के तहत बनाया गया है। इस मॉडल में निर्माण एजेंसी खुद निवेश करती है और उत्पादित बिजली को ₹3.87 प्रति यूनिट की दर से बिजली कंपनी खरीदती है। नवादा प्रोजेक्ट जुलाई 2025 तक चालू हो जाएगा।
इस योजना के तहत राज्य सरकार फ्लोटिंग सोलर पावर की संभावनाओं को तेजी से आगे बढ़ा रही है। इसके अलावा, कैमूर जिले के दुर्गावती जलाशय में भी 10 मेगावाट का फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट प्रस्तावित है, जिसके लिए निविदा प्रक्रिया शुरू हो गई है। वहीं, नीचे मछली–ऊपर बिजली योजना के अंतर्गत उत्तर और दक्षिण बिहार में 2–2 मेगावाट क्षमता वाले फ्लोटिंग सोलर प्लांट के लिए सर्वेक्षण शुरू हो चुका है।
बिहार के दरभंगा में पहले से एक फ्लोटिंग सोलर प्लांट चालू है, जो 1.6 मेगावाट बिजली पैदा करता है, जबकि सुपौल के राजापोखर तालाब में स्थित प्लांट से 525 किलोवाट बिजली का उत्पादन हो रहा है। यह तकनीक पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ-साथ जलाशयों के बेहतर उपयोग और भू-उपयोग की बचत में भी सहायक है। फ्लोटिंग सोलर प्लांट्स में सोलर पैनल्स को जलाशयों पर तैरते हुए फ्रेम पर लगाया जाता है, जिससे पानी के नीचे के केबल्स के माध्यम से बिजली ट्रांसमिशन टावर तक पहुंचती है।
दुनिया में पहली बार फ्लोटिंग सोलर प्लांट 2007 में जापान में 20 किलोवाट की क्षमता के साथ बनाया गया था। 2014 तक यह औसतन 0.5 मेगावाट तक पहुंचा और 2015 में जापान में ही 7.55 मेगावाट बिजली उत्पादन शुरू हुआ। इसके बाद एशियाई देशों खासतौर पर भारत, चीन, सिंगापुर और मलेशिया में मल्टी-मेगावाट क्षमता वाले प्लांट्स लगने लगे।
बिहार में 3300 से अधिक तालाब और जलाशय हैं। राज्य सरकार की योजना है कि इन जलस्रोतों का उपयोग कर सैकड़ों मेगावाट बिजली उत्पन्न की जाए। इससे न केवल राज्य की ऊर्जा जरूरतें पूरी होंगी बल्कि सौर ऊर्जा पर आधारित रोजगार और तकनीकी विकास को भी बल मिलेगा।