ब्रेकिंग
बांकीपुर उपचुनाव में हार के बाद BJP में मंथन, सीएम सम्राट चौधरी की मौजूदगी में हुई समीक्षा; कहां हुई चूक?केंद्रीय मंत्री ललन सिंह का PA बनकर जेल IG को किया फोन, एक कैदी को जेल ट्रांसफऱ करने के लिए कहा, फिर क्या था...तेज रफ्तार स्कॉर्पियो ने बाइक में मारी जोरदार टक्कर, दो नाबालिग ममेरे भाइयों की मौत; तीसरा गंभीरPM मोदी का वीडियो हटाने पर संसदीय समिति सख्त, जुकरबर्ग को 3 दिन में माफी मांगने की चेतावनीपप्पू यादव ने प्रशांत किशोर की जीत के बहाने RJD पर बोला हमला, तेजस्वी यादव के नेतृत्व पर उठाए सवालबांकीपुर उपचुनाव में हार के बाद BJP में मंथन, सीएम सम्राट चौधरी की मौजूदगी में हुई समीक्षा; कहां हुई चूक?केंद्रीय मंत्री ललन सिंह का PA बनकर जेल IG को किया फोन, एक कैदी को जेल ट्रांसफऱ करने के लिए कहा, फिर क्या था...तेज रफ्तार स्कॉर्पियो ने बाइक में मारी जोरदार टक्कर, दो नाबालिग ममेरे भाइयों की मौत; तीसरा गंभीरPM मोदी का वीडियो हटाने पर संसदीय समिति सख्त, जुकरबर्ग को 3 दिन में माफी मांगने की चेतावनीपप्पू यादव ने प्रशांत किशोर की जीत के बहाने RJD पर बोला हमला, तेजस्वी यादव के नेतृत्व पर उठाए सवाल

Bihar land reform : विजय सिन्हा के सामने जमीन पर बैठने लगे मुस्लिम फरियादी, डिप्टी सीएम बोले – कुर्सी पर आइए, आराम रहेगा

सहरसा में आयोजित भूमि सुधार जन संवाद कार्यक्रम के दौरान डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा का मानवीय चेहरा देखने को मिला, जब उन्होंने मुस्लिम फरियादी को जमीन पर बैठने से रोककर कुर्सी पर बैठाया और उसकी समस्या ध्यान से सुनी।

Bihar land reform : विजय सिन्हा के सामने जमीन पर बैठने लगे मुस्लिम फरियादी, डिप्टी सीएम बोले – कुर्सी पर आइए, आराम रहेगा
Tejpratap
Tejpratap
4 मिनट

Bihar land reform : बिहार के उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने एक बार फिर अपने संवेदनशील और जनोन्मुखी रवैये से लोगों का दिल जीत लिया। सहरसा में आयोजित भूमि सुधार जन संवाद कार्यक्रम के दौरान एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने कार्यक्रम में मौजूद लोगों को मानवीय संवेदना और लोकतांत्रिक मूल्यों का संदेश दिया।


दरअसल, जन संवाद कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में फरियादी अपनी-अपनी समस्याओं को लेकर पहुंचे थे। मंत्री विजय कुमार सिन्हा स्वयं मंच से एक-एक कर लोगों की शिकायतें सुन रहे थे और संबंधित अधिकारियों को त्वरित समाधान के निर्देश भी दे रहे थे। इसी क्रम में एक मुस्लिम फरियादी अपनी जमीन से जुड़ी समस्या लेकर मंच पर पहुंचे। फरियादी जब अपनी बात रखने के लिए आगे बढ़े तो वे मंच पर बिछे मैट पर जमीन पर ही बैठने लगे।


यह देख उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने तुरंत उन्हें टोका और बेहद आत्मीयता के साथ कहा कि आप जमीन पर नहीं बैठिए, ऊपर आइए और कुर्सी पर बैठिए। कुर्सी पर बैठने से आपको आराम रहेगा और आप अपनी पूरी बात अच्छे से, बिना किसी झिझक के बता पाएंगे। मंत्री के इस व्यवहार से फरियादी कुछ क्षण के लिए भावुक हो गए और फिर कुर्सी पर बैठकर अपनी समस्या बताने लगे।


विजय कुमार सिन्हा ने फरियादी को आश्वस्त करते हुए कहा कि सरकार और विभाग आम लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए ही ऐसे जन संवाद कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं। हम लोग आपकी परेशानी सुनने और उसका समाधान करने यहां आए हैं। आप पूरी बात विस्तार से बताइए, ताकि सही और न्यायपूर्ण फैसला लिया जा सके।


इसके बाद मंत्री ने फरियादी की जमीन से संबंधित शिकायत को गंभीरता से सुना और मौके पर मौजूद संबंधित अधिकारी को निर्देश दिया कि मामले की जांच कर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि जमीन से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही या पक्षपात बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और आम नागरिकों को न्याय दिलाना सरकार की प्राथमिकता है।


जन संवाद कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने उपमुख्यमंत्री के इस व्यवहार की सराहना की। लोगों का कहना था कि मंत्री का यह कदम न सिर्फ एक व्यक्ति के सम्मान से जुड़ा था, बल्कि यह संदेश भी देता है कि सरकार सभी नागरिकों को समान दृष्टि से देखती है, चाहे उनकी जाति, धर्म या सामाजिक पृष्ठभूमि कुछ भी हो।


गौरतलब है कि सहरसा में आयोजित इस भूमि सुधार जन संवाद कार्यक्रम का उद्देश्य आम लोगों को राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की सेवाओं की जानकारी देना और उनकी समस्याओं का मौके पर समाधान करना था। कार्यक्रम के दौरान दाखिल-खारिज, जमाबंदी, अतिक्रमण, भूमि विवाद जैसे कई मामलों की सुनवाई की गई और अनेक मामलों में तत्काल निर्देश भी जारी किए गए।


विजय कुमार सिन्हा ने अपने संबोधन में कहा कि सरकार चाहती है कि आम आदमी को दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें। इसी सोच के तहत जन संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि अधिकारी जनता के बीच जाकर उनकी समस्याएं सुनें और समाधान करें।


इस पूरे घटनाक्रम ने यह साबित कर दिया कि जनप्रतिनिधि अगर संवेदनशीलता और सम्मान के साथ जनता की बात सुनें, तो लोकतंत्र और प्रशासन दोनों मजबूत होते हैं। सहरसा का यह दृश्य न केवल एक खबर है, बल्कि सामाजिक सौहार्द और मानवीय मूल्यों का भी प्रतीक बन गया है।