1st Bihar Published by: First Bihar Updated Mar 05, 2026, 10:25:27 AM
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Bihar Rajya Sabha Election: बिहार में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है और पांचवीं सीट पर मुकाबला बेहद रोचक होता जा रहा है। इस सीट को लेकर सत्तारूढ़ एनडीए और विपक्षी महागठबंधन दोनों ही पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरने की तैयारी कर चुके हैं। जहां एक ओर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने पांचवीं सीट के लिए राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा को अपना उम्मीदवार घोषित किया है, वहीं दूसरी ओर महागठबंधन भी इस सीट पर मजबूत दावेदारी पेश करने जा रहा है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार महागठबंधन की ओर से पांचवीं सीट के लिए राज्यसभा सांसद अमरेंद्र धारी सिंह को फिर से उम्मीदवार बनाने का फैसला लिया गया है। अगर यह फैसला औपचारिक रूप से घोषित होता है और अमरेंद्र धारी सिंह चुनाव जीत जाते हैं, तो यह उनका लगातार दूसरा कार्यकाल होगा। अमरेंद्र धारी सिंह पहले से ही राज्यसभा में बिहार का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और पार्टी के विश्वसनीय नेताओं में गिने जाते हैं।
राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक, अमरेंद्र धारी सिंह गुरुवार सुबह पटना स्थित 10 सर्कुलर रोड पहुंचे हैं। यह वही आवास है जहां राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव रहते हैं। बताया जा रहा है कि यहां उनकी तेजस्वी यादव से महत्वपूर्ण मुलाकात होने वाली है। इस बैठक में राज्यसभा चुनाव को लेकर अंतिम रणनीति तय की जाएगी। साथ ही नामांकन से पहले जरूरी राजनीतिक औपचारिकताओं और समर्थन के गणित पर भी चर्चा होने की संभावना है।
राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने का आज अंतिम दिन है, ऐसे में सभी राजनीतिक दलों की गतिविधियां तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि तेजस्वी यादव से मुलाकात के बाद अमरेंद्र धारी सिंह दोपहर में अपना नामांकन दाखिल कर सकते हैं। अगर महागठबंधन की ओर से उनके नाम पर अंतिम मुहर लगती है तो पांचवीं सीट का मुकाबला सीधे तौर पर एनडीए के उम्मीदवार उपेंद्र कुशवाहा और महागठबंधन के उम्मीदवार अमरेंद्र धारी सिंह के बीच होगा।
इस सीट को लेकर राजनीतिक समीकरण भी काफी दिलचस्प हैं। बिहार विधानसभा में एनडीए के पास बहुमत जरूर है, लेकिन पांचवीं सीट के लिए वोटों का गणित काफी अहम हो जाता है। ऐसे में महागठबंधन भी पूरी रणनीति के साथ मैदान में उतर रहा है ताकि मुकाबले को कड़ा बनाया जा सके। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर विपक्ष अपने विधायकों को एकजुट रखने में सफल रहता है तो यह चुनाव काफी दिलचस्प मोड़ ले सकता है।
उधर एनडीए की ओर से उपेंद्र कुशवाहा को उम्मीदवार बनाए जाने के पीछे भी बड़ा राजनीतिक संदेश माना जा रहा है। कुशवाहा लंबे समय से बिहार की राजनीति में सक्रिय रहे हैं और पिछड़ा वर्ग की राजनीति में उनका खास प्रभाव माना जाता है। ऐसे में एनडीए इस सीट के जरिए सामाजिक समीकरणों को भी साधने की कोशिश कर रहा है।
कुल मिलाकर बिहार की पांचवीं राज्यसभा सीट अब सियासी प्रतिष्ठा की लड़ाई बनती जा रही है। एक तरफ सत्ता पक्ष अपने उम्मीदवार को जीत दिलाने के लिए पूरी ताकत झोंक रहा है, तो वहीं विपक्ष भी इस सीट के जरिए राजनीतिक संदेश देने की कोशिश में जुटा हुआ है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि महागठबंधन आधिकारिक तौर पर अमरेंद्र धारी सिंह के नाम की घोषणा कब करता है और नामांकन के बाद यह मुकाबला किस दिशा में आगे बढ़ता है।