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12-Oct-2025 08:14 AM
By First Bihar
Bihar News: बिहार के किशनगंज जिले को एक बड़ी सड़क परियोजना का तोहफा मिलने वाला है। सिलीगुड़ी-गोरखपुर 6-लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का करीब 72 किलोमीटर लंबा हिस्सा इसी जिले से गुजरेगा, आने वाले समय में यह स्थानीय अर्थव्यवस्था को पंख देगा। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने एलाइनमेंट में बदलाव के बाद नई अधिसूचना जारी कर दी है। पहले ये हाईवे ठाकुरगंज शहर के पश्चिमी हिस्से से गुजरने वाला था, लेकिन स्थानीय मांग पर इसे पूर्व की ओर शिफ्ट कर दिया गया। इससे शहर में नुकसान से बचा जा सकेगा और यह अब टेढ़ागाछ, बहादुरगंज व ठाकुरगंज प्रखंडों के 63 मौजों से होकर गुजरेगा। अररिया जिले में 48 मौजों की जमीन अधिग्रहण का काम भी शुरू हो चुका है।
किशनगंज में तीनों अंचलों टेढ़ागाछ (6 मौजे), बहादुरगंज (25 मौजे) और ठाकुरगंज (32 मौजे) की जमीन अधिग्रहण होगी। ठाकुरगंज के मौजों में बेसरबाटी, कुकुरबागी, पथरिया, नेजागछ, गोथरा, कनकपुर, गिद्धिनगोला, उदारागुड़ी, दूधमंजर, दोगाछी, नोनिया ताड़ी, भोगदाबर छैतल, रूईधासा, बहादुरपुर, अमलझड़ी, जीरनगच, खारूदह, कुंजीमारी, कुरीमनी, गंभीर गढ़, काठारों, सरायकुड़ी, करूअमनी, कुकुरबाघी, कुदुलछारा और बारचौंदी शामिल हैं। नागरिक एकता मंच ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और सीएम नीतीश कुमार को पत्र लिखकर एलाइनमेंट बदलने की मांग की थी, ताकि ठाकुरगंज शहर को नुकसान न हो। अब ये हाईवे भोगडाबर के पास से पूर्व की ओर मुड़कर दूधमांजर, कनकपुर होकर बंगाल में प्रवेश करेगा।
ये बदलाव स्थानीय लोगों की लंबी मांग का नतीजा है। पहले डीपीआर में ठाकुरगंज शहर से गुजरने से 4 किलोमीटर क्षेत्र में घरों और सरकारी भवनों को खतरा था। मांग थी कि या तो एलाइनमेंट शिफ्ट हो या NH-327E से जोड़ा जाए। मंत्रालय ने इसे मान लिया और अब अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज हो रही है। ये 519 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेसवे (विस्तार से 568 किमी) उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल से गुजरेगा, जिसमें बिहार का हिस्सा 417 किलोमीटर है। किशनगंज के अलावा अररिया, सुपौल, मधुबनी, सीतामढ़ी, शिवहर, पूर्वी चंपारण और पश्चिमी चंपारण भी इससे जुड़ेंगे। लागत करीब 38,645 करोड़ रुपये है, जिसमें बिहार का हिस्सा 27,552 करोड़ है।
इस हाईवे से किशनगंज का विकास नई रफ्तार पकड़ेगा। गलगलिया के पास इंडस्ट्रियल जोन बनेगा जो रोजगार और व्यापार के नए अवसर खोलेगा। सिलीगुड़ी से गोरखपुर की दूरी 640 किमी से घटकर 519 किमी हो जाएगी और सफर का समय 14-15 घंटे से घटकर 8-9 घंटे रह जाएगा। नेपाल बॉर्डर के समानांतर चलने वाला ये रोड ईस्टर्न और नॉर्थईस्टर्न इंडिया को जोड़ेगा, साथ ही नेपाली अर्थव्यवस्था को भी फायदा पहुंचाएगा। निर्माण 2025 में शुरू होकर 2028 तक पूरा होगा और बिहार के उत्तरी जिलों को दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से लिंक करेगा। इससे स्थानीय किसान, व्यापारी और युवाओं को नई उम्मीद मिलेगी।