Bihar government : भ्रष्टाचार के खिलाफ बिहार सरकार का सख्त कदम, प्रमोशन से पहले रिकॉर्ड देखेगी सरकार; साल में दो बार तैयार होगी लिस्ट

Bihar government : बिहार सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को और सख्त करते हुए सरकारी अधिकारियों-कर्मचारियों की प्रोन्नति पर कड़ी निगरानी का आदेश दिया है। अब जिन पर प्राथमिकी या आरोप पत्र दर्ज है, उनकी प्रोन्नति से पहले निगरानी स्वच्छत

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Sat, 24 Jan 2026 08:47:47 AM IST

Bihar government : भ्रष्टाचार के खिलाफ बिहार सरकार का सख्त कदम,  प्रमोशन से पहले रिकॉर्ड देखेगी सरकार; साल में दो बार तैयार होगी लिस्ट

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Bihar government : बिहार सरकार ने सरकारी सेवाओं में व्याप्त भ्रष्टाचार पर लगाम कसने के लिए एक और बड़ा और सख्त कदम उठाया है। राज्य सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत अब सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों की प्रोन्नति (प्रमोशन) प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और निगरानी आधारित बना दिया गया है। जिन अधिकारियों या कर्मचारियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज है या जिन पर आरोप पत्र समर्पित हो चुका है, उनकी प्रोन्नति से पहले निगरानी स्वच्छता का निर्धारण अनिवार्य कर दिया गया है।


निगरानी विभाग ने इस संबंध में सभी प्रमुख विभागों, प्रमंडलों और जिला कार्यालयों को स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि बिना निगरानी स्वच्छता सुनिश्चित किए किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को प्रोन्नति नहीं दी जाएगी। यह व्यवस्था भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार की सख्त मंशा को दर्शाती है, ताकि केवल ईमानदार और स्वच्छ छवि वाले कर्मियों को ही आगे बढ़ने का अवसर मिल सके।


साल में दो बार उपलब्ध कराई जाएगी सूची

निगरानी विभाग ने निर्णय लिया है कि हर साल दो बार—जनवरी और जुलाई में—उन अधिकारियों और कर्मचारियों की सूची संबंधित प्रशासी विभागों को उपलब्ध कराई जाएगी, जिनके विरुद्ध भ्रष्टाचार से जुड़े मामले दर्ज हैं। इस सूची में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, विशेष निगरानी इकाई और आर्थिक अपराध इकाई द्वारा दर्ज सभी केस, कांड और आरोप पत्र की जानकारी शामिल होगी।


विभाग ने बताया है कि दिसंबर 2025 तक दर्ज सभी मामलों का विवरण एक डिजिटल सीडी के माध्यम से संबंधित विभागों, प्रमंडलों और जिलों को भेजा जा रहा है। इसी के आधार पर प्रोन्नति पंजी को अद्यतन किया जाएगा और निगरानी स्वच्छता का निर्धारण किया जाएगा।


फाइल नहीं, पारदर्शी सूची होगी आधार

अब तक प्रोन्नति के मामलों में निगरानी स्वच्छता के लिए अलग-अलग फाइलों और पत्राचार पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन नई व्यवस्था के तहत यह प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी। अब प्रोन्नति का निर्णय फाइलों के सहारे नहीं, बल्कि निगरानी विभाग द्वारा जारी आधिकारिक सूची के आधार पर किया जाएगा। निगरानी विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि 30 जून 2026 तक जिन अधिकारियों और कर्मचारियों का प्रमोशन प्रस्तावित है, उनके लिए अलग से निगरानी स्वच्छता प्रमाण पत्र की आवश्यकता नहीं होगी। संबंधित विभाग सूची के आधार पर ही निर्णय ले सकेंगे।


जिला स्तर पर सुरक्षित रहेगा रिकॉर्ड

भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और सतर्कता बढ़ाने के लिए निगरानी विभाग ने जिला स्तर पर भी रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं। किसी भी अधिकारी या कर्मचारी के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज होने पर उसकी छायाप्रति संबंधित प्रमंडल और जिला प्रशासन को भेजी जाएगी।


इस रिकॉर्ड के आधार पर प्रमोशन से पहले वास्तविक स्थिति का आकलन किया जाएगा। हालांकि, विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी के विरुद्ध अनियमितताओं की पुष्टि होती है, तो संबंधित जिला या प्रमंडल प्रशासन को उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी।


वेबसाइट पर भी मिलेगी जानकारी

निगरानी विभाग ने यह भी बड़ा फैसला लिया है कि संदिग्ध और आरोपित अधिकारियों व कर्मचारियों की सूची विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर भी उपलब्ध कराई जाएगी। सभी विभागों को निर्देश दिया गया है कि सूची का अवलोकन किए बिना किसी भी प्रकार की प्रोन्नति न की जाए। प्रमोशन के अलावा अन्य मामलों में यदि निगरानी स्वच्छता की आवश्यकता होती है, तो विभाग नियमानुसार निगरानी विभाग से अनुरोध कर सकते हैं।


सरकार का स्पष्ट संदेश

इस पूरी व्यवस्था के जरिए बिहार सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया है कि भ्रष्टाचार किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अब सरकारी सेवा में आगे बढ़ने का रास्ता सिर्फ योग्यता और ईमानदारी से होकर गुजरेगा। पारदर्शी सूची और कड़ी निगरानी के माध्यम से यह तय होगा कि कौन अधिकारी स्वच्छ है और कौन प्रोन्नति के योग्य।