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Bihar Private Schools : निजी स्कूलों की ‘दुकानदारी’ बंद! डीएम का बड़ा फैसला, अब किताबें और ड्रेस कहीं से भी खरीद सकेंगे अभिभावक

बिहार में निजी स्कूलों द्वारा यूनिफॉर्म, किताबों और स्टेशनरी के नाम पर की जा रही अवैध वसूली को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। लंबे समय से अभिभावकों की शिकायत थी कि कई निजी स्कूल उन्हें तय दुकानों से ही महंगे दामों पर...

Bihar Private Schools : निजी स्कूलों की ‘दुकानदारी’ बंद! डीएम का बड़ा फैसला, अब किताबें और ड्रेस कहीं से भी खरीद सकेंगे अभिभावक
Tejpratap
Tejpratap
4 मिनट

Bihar Private Schools : बिहार में निजी स्कूलों द्वारा यूनिफॉर्म, किताबों और स्टेशनरी के नाम पर की जा रही मनमानी और अवैध वसूली के खिलाफ प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। हाल के दिनों में यह सामने आया था कि कई निजी स्कूल संचालक तय दुकानों से ही सामग्री खरीदने के लिए अभिभावकों पर दबाव बना रहे थे। स्कूल प्रबंधन और यूनिफॉर्म व स्टेशनरी विक्रेताओं की आपसी सांठगांठ के कारण किताबों, जूतों और ड्रेस की कीमतें सामान्य बाजार दर से कई गुना अधिक वसूली जा रही थीं।


इस शोषणकारी व्यवस्था का सबसे अधिक असर गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों पर पड़ रहा था। बच्चों की पढ़ाई के नाम पर अभिभावकों को हर साल भारी आर्थिक बोझ उठाना पड़ रहा था, जिससे समाज में असंतोष और आक्रोश की स्थिति बन रही थी। इन्हीं परिस्थितियों को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन की ओर से कड़ा प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया गया है।


धारा-163 के तहत सख्त निर्देश लागू

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा-163 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए प्रशासन ने स्पष्ट निर्देश जारी किया है कि अब कोई भी निजी स्कूल संचालक, प्राचार्य या प्रबंधन समिति विद्यार्थियों को किसी एक निश्चित दुकान या विक्रेता से किताबें, यूनिफॉर्म, जूते या स्टेशनरी खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकेगा। अभिभावकों को यह पूर्ण स्वतंत्रता दी गई है कि वे खुले बाजार से अपनी सुविधा और क्षमता के अनुसार प्रतिस्पर्धी कीमतों पर सामग्री खरीद सकें। किसी भी प्रकार का दबाव, परोक्ष या प्रत्यक्ष, आदेश का उल्लंघन माना जाएगा।


पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए अनिवार्य शर्तें

प्रशासन ने निजी स्कूलों में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण शर्तें भी तय की हैं। इसके तहत सभी निजी स्कूलों को निर्धारित तिथि तक अपनी वेबसाइट और विद्यालय परिसर में सार्वजनिक सूचना पट्ट पर अनिवार्य पुस्तकों, यूनिफॉर्म और अन्य आवश्यक सामग्री की पूरी सूची प्रदर्शित करनी होगी।


इसके साथ ही स्कूल प्रबंधन को यूनिफॉर्म निर्धारण में स्थायित्व सुनिश्चित करना होगा। निर्देश दिया गया है कि एक बार तय की गई यूनिफॉर्म में कम से कम तीन वर्षों तक कोई बदलाव नहीं किया जाएगा, ताकि अभिभावकों को बार-बार नई ड्रेस खरीदने के लिए मजबूर न होना पड़े।


आदेश की अवधि और प्रभाव

यह प्रतिबंधात्मक आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है और निर्धारित अवधि तक पूरे जिले में प्रभावी रहेगा। प्रशासन का कहना है कि आवश्यकता पड़ने पर आदेश की अवधि बढ़ाने पर भी विचार किया जा सकता है। इस दौरान नियमित निगरानी और औचक जांच के माध्यम से स्कूलों के अनुपालन की समीक्षा की जाएगी।


उल्लंघन पर सख्त कानूनी कार्रवाई

प्रशासन ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि आदेश का उल्लंघन करने वाली किसी भी संस्था या व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा-223 के तहत दोषी पाए जाने पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी, जिसमें जुर्माने के साथ-साथ कारावास का भी प्रावधान है।


यदि किसी स्कूल में आदेश की अवहेलना पाई जाती है, तो स्कूल के प्राचार्य, संचालक, प्रबंधक और प्रबंधन समिति के सभी सदस्य व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी माने जाएंगे। प्रशासनिक अधिकारियों को आदेश के सख्त अनुपालन और निरंतर निगरानी के निर्देश दिए गए हैं।


अभिभावकों में राहत, शिक्षा व्यवस्था पर सकारात्मक असर की उम्मीद

प्रशासन के इस फैसले से अभिभावकों में राहत की भावना देखी जा रही है। लोगों का मानना है कि इससे शिक्षा के नाम पर होने वाला आर्थिक शोषण रुकेगा और निजी स्कूलों की मनमानी पर लगाम लगेगी। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आदेश का सख्ती से पालन कराया गया, तो यह बिहार की शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।