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23-Feb-2026 02:04 PM
By First Bihar
भारत में राष्ट्रीय राजमार्गों पर सफर करने वाले यात्रियों के लिए एक बड़ा बदलाव आने वाला है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने संकेत दिए हैं कि 1 अप्रैल 2026 से पूरे देश के टोल प्लाजा पर नकद भुगतान पूरी तरह बंद हो सकता है। इस बदलाव के लागू होने के बाद यात्रियों को टोल शुल्क केवल डिजिटल माध्यमों से ही चुकाना होगा। यह कदम न केवल यात्रा को तेज और सुगम बनाने में सहायक होगा, बल्कि भारत को पूरी तरह डिजिटल हाईवे नेटवर्क की ओर ले जाने में अहम साबित होगा।
डिजिटल भुगतान ही रहेगा विकल्प
एनएचएआई द्वारा प्रस्तावित नए नियमों के अनुसार, टोल प्लाजा पर यात्रियों को नकद भुगतान की सुविधा नहीं मिलेगी। इसके बजाय टोल शुल्क केवल FASTag और UPI के जरिए ही लिया जाएगा। FASTag पहले से ही देशभर में व्यापक रूप से इस्तेमाल हो रहा है, जबकि अब UPI को भी टोल प्लाजा पर सक्रिय किया जा चुका है। UPI भुगतान के जरिए यात्रियों को तत्काल, सुरक्षित और आसान भुगतान का विकल्प मिलेगा। इस बदलाव से टोल पर लेन-देन तेज और पारदर्शी होगा।
FASTag की बढ़ती लोकप्रियता
पिछले कुछ वर्षों में FASTag का उपयोग 98% से अधिक वाहनों में हो चुका है। यह RFID तकनीक पर आधारित सिस्टम वाहनों को बिना रुके टोल पार करने की सुविधा देता है। इससे न केवल समय बचता है बल्कि नकद लेन-देन से जुड़ी परेशानियां भी कम होती हैं। एनएचएआई का मानना है कि डिजिटल-ओनली टोलिंग लागू होने से टोल प्लाजा पर भीड़ कम होगी और वाहन चालकों का अनुभव बेहतर होगा।
संशोधित शुल्क नियम
मौजूदा नियमों के तहत, यदि कोई वाहन बिना FASTag के टोल पार करता है और नकद भुगतान करता है, तो उससे दोगुना शुल्क लिया जाता है। वहीं, UPI से भुगतान करने वाले यात्रियों को 1.25 गुना शुल्क देना पड़ता है। इन नियमों ने नकद लेन-देन को काफी हद तक घटा दिया है और डिजिटल भुगतान को बढ़ावा दिया है। NHAI का यह उद्देश्य है कि हर वाहन चालक डिजिटल भुगतान की ओर प्रवृत्त हो और नकद लेन-देन पूरी तरह समाप्त हो।
भीड़ और इंतजार कम होंगे
एनएचएआई के आकलन में पाया गया है कि नकद भुगतान के कारण टोल प्लाजा पर लंबी कतारें और गाड़ियों की आवाजाही में देरी होती है। डिजिटल-ओनली सिस्टम लागू होने से लेन थ्रूपुट बेहतर होगा, गाड़ियों की आवाजाही तेज होगी और विवाद की संभावना भी घटेगी। इससे लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों को समय की बचत होगी और यात्रा अनुभव बेहतर होगा।
तकनीक-आधारित हाईवे नेटवर्क की दिशा में कदम
यह पहल एनएचएआई के उस बड़े लक्ष्य का हिस्सा है जिसमें भारत को तकनीक-आधारित, हाई-एफिशिएंसी हाईवे नेटवर्क की ओर ले जाना है। कैशलेस टोलिंग से यात्रियों को तेज, पारदर्शी और झंझट-मुक्त सफर का अनुभव मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बदलाव से न केवल टोल प्रबंधन और लेन-देन की प्रक्रिया स्मार्ट होगी, बल्कि देश के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को भी मजबूती मिलेगी।
यदि यह बदलाव 2026 से लागू होता है, तो यह भारत के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जाएगा। यात्रियों को केवल FASTag या UPI के जरिए टोल चुकाने की आदत डालनी होगी और नकद भुगतान पूरी तरह इतिहास बन जाएगा। इस कदम से भारत के हाईवे नेटवर्क में तकनीकी नवाचार और दक्षता दोनों बढ़ेंगे, और देशवासियों को तेज़, आसान और सुरक्षित सफर का अनुभव मिलेगा।