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22-Feb-2026 11:28 AM
By First Bihar
BPSC TRE-3 teacher transfer : बिहार में बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की शिक्षक भर्ती परीक्षा TRE-3 के तहत चयनित हजारों शिक्षकों के लिए ‘घर वापसी’ की उम्मीद अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। हालांकि इसके लिए उन्हें अप्रैल 2026 तक इंतजार करना होगा। शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने सदन में स्पष्ट संकेत दिया है कि अंतरजिला और पारस्परिक स्थानांतरण की नियमित प्रक्रिया निर्धारित नियमावली लागू होने के बाद ही शुरू की जाएगी।
TRE-3 के माध्यम से नियुक्त कई शिक्षक अपने गृह जिले से 100 से 500 किलोमीटर दूर पदस्थापित हैं। इनमें बड़ी संख्या महिला शिक्षिकाओं और दिव्यांग श्रेणी के शिक्षकों की भी है। दूरदराज के जिलों में तैनाती के कारण उन्हें पारिवारिक, सामाजिक और व्यावहारिक स्तर पर गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। कई शिक्षक छोटे बच्चों और बुजुर्ग अभिभावकों की देखभाल से दूर हैं, वहीं लंबी दूरी की आवाजाही से आर्थिक बोझ भी बढ़ा है।
सदन में चर्चा के दौरान शिक्षा मंत्री ने स्वीकार किया कि शिक्षकों की समस्याएं सरकार के संज्ञान में हैं। उन्होंने कहा कि स्थानांतरण और पदस्थापन की प्रक्रिया को व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने के लिए विभागीय स्तर पर एक विस्तृत नियमावली तैयार की जा रही है। इस नियमावली के आधार पर ही आगे की पूरी प्रक्रिया संचालित होगी। सरकार का लक्ष्य है कि अप्रैल 2026 तक इस नियमावली को अंतिम रूप देकर लागू कर दिया जाए, ताकि उसके बाद नियमित अंतरजिला स्थानांतरण प्रक्रिया शुरू की जा सके।
शिक्षा विभाग ने यह भी बताया कि इससे पहले शिक्षकों की परेशानियों को ध्यान में रखते हुए कुछ अंतरिम कदम उठाए जा चुके हैं। विभागीय पत्रांक 2048, दिनांक 22 नवंबर 2024 के तहत विशेष परिस्थितियों में स्थानांतरण चाहने वाले शिक्षकों के लिए आवेदन संबंधी दिशा-निर्देश जारी किए गए थे। इसके अतिरिक्त विभागीय पत्रांक 46/गो०, दिनांक 26 जून 2025 के माध्यम से पारस्परिक स्थानांतरण (म्यूचुअल ट्रांसफर) की व्यवस्था लागू की गई, जिसके तहत दो शिक्षक आपसी सहमति से सीमित दायरे में स्थान बदल सकते हैं। हालांकि यह व्यवस्था सभी प्रभावित शिक्षकों के लिए पर्याप्त समाधान साबित नहीं हुई।
सरकार के ताजा रुख से यह स्पष्ट है कि व्यापक और स्थायी समाधान के लिए ठोस नीति बनाई जा रही है। नई नियमावली में प्राथमिकता के आधार, रिक्तियों का निर्धारण, महिला और दिव्यांग शिक्षकों के लिए विशेष प्रावधान, सेवा अवधि और अन्य मानकों को शामिल किए जाने की संभावना है। विभाग का मानना है कि बिना स्पष्ट नियमों के बड़े पैमाने पर स्थानांतरण करने से प्रशासनिक असंतुलन और शिक्षण व्यवस्था पर असर पड़ सकता है। इसलिए प्रक्रिया को चरणबद्ध और संतुलित तरीके से लागू किया जाएगा।
TRE-3 के तहत नियुक्त शिक्षकों के बीच लंबे समय से ‘घर वापसी’ की मांग उठती रही है। कई शिक्षक संगठनों ने सरकार से जल्द निर्णय लेने की अपील की थी। अब शिक्षा मंत्री के बयान के बाद यह उम्मीद जगी है कि अप्रैल 2026 के बाद नियमित प्रक्रिया शुरू होते ही हजारों शिक्षकों को राहत मिल सकती है। यदि नियमावली समय पर लागू होती है, तो गृह जिला या निकटवर्ती जिले में पोस्टिंग का अवसर मिलना संभव हो जाएगा।
फिलहाल शिक्षकों को कुछ और महीनों का इंतजार करना होगा। लेकिन सरकार के आश्वासन से यह साफ संकेत मिला है कि उनका ‘वनवास’ स्थायी नहीं है। आने वाले समय में स्पष्ट नीति लागू होने के बाद ही यह तय होगा कि कितने शिक्षकों को प्राथमिकता के आधार पर घर के पास तैनाती मिल पाती है। तब तक सभी की निगाहें अप्रैल 2026 पर टिकी रहेंगी।