ईरान में फंसे अमेरिकी पायलटों को 36 घंटे में बचाया, ट्रम्प बोले- इतिहास का सबसे साहसी रेस्क्यू CM नीतीश के स्वागत में बवाल: BJP-JDU विधायकों को अंदर जाने से रोका, सुरक्षाकर्मियों से नोकझोंक छापेमारी के दौरान मदरसा से हथियार बरामद, मौलवी सहित 3 को पुलिस ने दबोचा पश्चिम बंगाल विस चुनाव 2026: BJP ने जारी की 40 स्टार प्रचारकों की लिस्ट आरा में पैसे के विवाद में दोस्त ने दोस्त को मारी गोली, युवक की हालत गंभीर बड़े भाई की हत्या का बदला लेने के लिए खुद पर चलवाई गोली, 3 घंटे में पुलिस ने किया खुलासा बीच सड़क पर रील बनाना पड़ गया महंगा, पुलिस ने कर दी पिटाई, युवक को गाड़ी में जबरन बिठाते वीडियो वायरल पटना में NMCH क्लर्क के घर दिनदहाड़े चोरी, 35 लाख के जेवरात ले उड़े चोर दरभंगा एयरपोर्ट से बेंगलुरु की सीधी उड़ान शुरू, शिक्षा-रोजगार के खुलेंगे नए द्वार दरभंगा एयरपोर्ट से बेंगलुरु की सीधी उड़ान शुरू, शिक्षा-रोजगार के खुलेंगे नए द्वार
19-Jun-2025 12:55 PM
By First Bihar
Bihar News: बिहार के भागलपुर जिले के पीरपैंती में 2400 मेगावाट क्षमता का एक नया ग्रीनफील्ड थर्मल पावर प्लांट स्थापित होने जा रहा है। 21,400 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली यह परियोजना बिहार में निजी क्षेत्र का सबसे बड़ा निवेश है। बिहार स्टेट पावर जेनरेशन कंपनी लिमिटेड ने इसके लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिसमें 25 जून 2025 तक एजेंसियां भाग ले सकती हैं।
11 जुलाई को तकनीकी बोली और 16 जुलाई को वित्तीय बोली खोली जाएगी, जिसमें डीप पोर्टल पर इ-रिवर्स नीलामी के जरिए सबसे कम बोली लगाने वाली एजेंसी को यह मेगा प्रोजेक्ट सौंपा जाएगा। केंद्र सरकार की टैरिफ पॉलिसी 2016 के तहत मंजूरी प्राप्त इस परियोजना के लिए कोल इंडिया से कोयला आवंटन और 1020.60 एकड़ जमीन का अधिग्रहण पहले ही पूरा हो चुका है।
यह परियोजना मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की दूरदर्शी ऊर्जा नीति का परिणाम है, जिसका उद्देश्य बिहार को बिजली के मामले में आत्मनिर्भर बनाना है। वर्तमान में बिहार को अपनी बिजली जरूरतों के लिए अन्य राज्यों पर निर्भर रहना पड़ता है, जिससे लागत बढ़ती है। यह पावर प्लांट चालू होने के बाद बिजली की खरीद पर निर्भरता कम होगी और आम जनता को सस्ती दरों पर विश्वसनीय बिजली मिलेगी।
इस थर्मल पावर प्लांट के बनने से बिहार को कई फायदे होंगे। यह परियोजना न केवल बिजली की लागत कम करेगी बल्कि निर्माण और संचालन के दौरान हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी पैदा करेगी। सस्ती बिजली की उपलब्धता से औद्योगिक इकाइयों को भी बढ़ावा मिलेगा, जिससे राज्य में निवेश और आर्थिक विकास को गति मिलेगी। बता दें कि पहले सौर ऊर्जा संयंत्र का प्रस्ताव था, लेकिन तकनीकी सर्वेक्षण के बाद थर्मल पावर प्लांट को अधिक व्यवहार्य माना गया। कोयले की उपलब्धता और अनुकूल जमीन ने इस निर्णय को और भी मजबूती दे दी।
आने वाले समय में यह पावर प्लांट बिहार के विकास में एक नया अध्याय जोड़ेगा और अगले 15-20 वर्षों तक राज्य की बिजली जरूरतों को बिना किसी रुकावट के पूरा करेगा। वैसे यह परियोजना बिहार को ऊर्जा आत्मनिर्भरता की नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी या नहीं ये तो समय ही बताएगा।