ब्रेकिंग न्यूज़

बिहार सरकार की सख्ती का असर: काम पर लौटे 30 परीक्ष्यमान राजस्व अधिकारी, बाकी 31 के लिए डेडलाइन तय; क्या बोले डिप्टी सीएम विजय सिन्हा? बिहार सरकार की सख्ती का असर: काम पर लौटे 30 परीक्ष्यमान राजस्व अधिकारी, बाकी 31 के लिए डेडलाइन तय; क्या बोले डिप्टी सीएम विजय सिन्हा? फर्स्ट बिहार-झारखंड का आरोग्य एक्सलेंस अवार्ड 2026: डॉक्टरों के सम्मान में सजी गौरवपूर्ण शाम, डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी, मंत्री अशोक चौधरी ने किया सम्मानित अब पटना में भी दिखेगी काशी जैसी भव्यता… इन घाटों पर होगी गंगा आरती, जान लीजिए पूरा शेड्यूल बिहार में गैस की ब्लैकमार्केटिंग के खिलाफ जिला प्रशासन सख्त, छापेमारी के दौरान भारी मात्रा में LPG सिलेंडर जब्त बिहार में गैस की ब्लैकमार्केटिंग के खिलाफ जिला प्रशासन सख्त, छापेमारी के दौरान भारी मात्रा में LPG सिलेंडर जब्त Bihar News: नीतीश कुमार ने विधान परिषद से दिया इस्तीफा...नेताओं में मायूसी, JDU महासचिव बोले- यह निर्णय भीतर तक झकझोर देने वाला है PMAY-G के तहत बिहार में गरीबों को जल्द मिलेगा पक्का घर, 1.04 करोड़ परिवार वेटिंग लिस्ट में शामिल PMAY-G के तहत बिहार में गरीबों को जल्द मिलेगा पक्का घर, 1.04 करोड़ परिवार वेटिंग लिस्ट में शामिल Success Story: दो सगे भाई, एक सपना… पहले ही प्रयास में दोनों ने फतह किया UP PCS, जानिए इनकी सफलता की कहानी

Home / bihar / बिहार के वीरों ने 18 चीनी सैनिकों का गर्दन तोड़ चेहरे को पत्थरों...

बिहार के वीरों ने 18 चीनी सैनिकों का गर्दन तोड़ चेहरे को पत्थरों से कुचल दिया, जानिये उस रात बिहार रेजीमेंट के जवानों की शौर्यगाथा

20-Jun-2020 02:48 PM

DESK: भारत-चीन सीमा पर कयामत की उस रात 16 बिहार रेजीमेंट के जवानों ने बहादुरी की जो कहानी रच दी, वो दुनिया भर में सैन्य अभियानों के लिए मिसाल बन गयी है. प्रत्यक्षदर्शियों की जुबानी बिहार रेजीमेंट के जवानों की जो कहानी सामने आ रही है वो रोंगटे खड़े कर देने वाली है. भारत-चीन सीमा पर उस रात चीनी सैनिकों की तादाद भारतीय सेना की तुलना में पांच गुणा ज्यादा थी. लेकिन उसके बावजूद बिहार रेजीमेंट के जवानों ने दुश्मनों के होश उड़ा दिये.

जानिये उस रात की पूरी कहानी

अंग्रेजी अखबार डेक्कन हेराल्ड ने सैन्य सूत्रों के हवाले से बिहार रेजीमेंट की शौर्य की पूरी कहानी छापी है. इसके मुताबिक बिहार रेजीमेंट के जवानों ने प्राचीन युद्ध कला का अविश्वसनीय प्रयोग किया. भारत-चीन सीमा पर कयामत की उस रात सबसे पहले चीनी सैनिकों ने धोखे से बिहार रेजीमेंट के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल बी. संतोष बाबू पर वार कर उन्हें मार डाला था. उसके बाद बिहार रेजीमेंट के सैनिकों के सब्र का बांध टूट गया.

दरअसल गलवान घाटी की सीमा पर उस वक्त भारतीय सैनिकों की संख्या काफी कम थी. जब चीनियों ने हमला किया तो बिहार रेजीमेंट के जवानों ने बगल की चौकी से मदद मांगी. भारतीय सेना का “घातक”  दस्ता उनकी मदद के लिए वहां पहुंचा. बिहार रेजीमेंट और घातक दस्ते के सैनिकों की कुल तादाद सिर्फ 60 थी. जबकि दूसरी ओर दुश्मनों की तादाद काफी ज्यादा थी. 

अपने कमांडिंग ऑफिसर की हत्या से बेकाबू हुए बिहार रेजीमेंट के जवानों ने बिना देर किये चीनी सैनिकों पर हमला बोल दिया. फायरिंग करना मना था. लिहाजा प्राचीन युद्ध शैली में पत्थर, डंडा और भाले को हथियार बना लिया गया. बिहार रेजीमेंट के जवानों ने जान की परवाह किये बगैर चीनी सैनिकों पर हमला बोल दिया.

18 चीनी सैनिकों का गर्दन तोड़ कर चेहरे को कुचल डाला

प्रत्यक्षदर्शी बताते हैं कि बिहार रेजीमेंट के जवानों ने कम से कम 18 चीनी सैनिकों को कुचल कर मार डाला. एक सैन्य अधिकारी ने बताया 

“कम से कम 18 चीनी सैनिकों का गर्दन की हड्डी टूट चुकी थी और सर झूल रहा था. कुछ के चेहरे इतनी बुरी तरह से कुचल दिये गये थे कि उन्हें पहचान पाना संभव नहीं था. चीनी सैनिक भी हमला कर रहे थे लेकिन भारतीय सैनिकों का हमला इतना भयानक था कि चीनी संभल नहीं पाये.”

ये लड़ाई लगभग चार घंटे तक चलती रही. अपने कमांडिंग ऑफिसर की मौत से बौखलाये भारतीय सैनिक लगातार नारे लगाते हुए हमला कर रहे थे. हमले की पहले से तैयारी करके बैठे चीनियों के पास तलवार और रॉड थे. भारतीय सैनिकों ने उनसे वे हथियार छीन लिये और उन पर हमला करना शुरू कर दिया. 

सूत्रों के मुताबिक दुश्मनों को हर हाल में सबक सिखाने पर आमदा बिहार रेजीमेंट के जवान इतने खौफनाक हो गये थे कि सैकड़ों की तादाद में जमे चीनी भागने लगे. भारतीय जवानों ने उनका पीछा करना शुरू कर दिया. चीनियों का पीछा करते करते ही भारतीय जवान चीन के क्षेत्र में काफी आगे तक पहुंच गये. उनमें से ही कुछ पकड़ लिये गये. जिन्हें शुक्रवार को चीन ने रिहा किया.

अपने सैनिकों की लाश इकट्ठा करने में चीनियों की हालत पस्त हो गयी

बिहार रेजीमेंट के जवानों के रौद्र रूप का आलम ये था कि चीन को अपने सैनिकों की लाश इकट्ठा करने में पसीने छूट गये. चीनियों के लाश पूरी घाटी में बिखरे पड़े थे. ज्यादातर के चेहरे कुचले हुए थे. उनकी हड्डियां कई जगह से टूटी हुई थी. मारे गये चीनी सैनिकों को चेहेरे से पहचान पाना असंभव था. रात के हमले के बाद पूरे दिन चीनी खेमा अपने सैनिकों की लाशों को समेटने में लगा रहा.