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19-Jun-2025 07:13 AM
By First Bihar
Bihar Electricity: बिहार विद्युत विनियामक आयोग ने बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत देते हुए 1 से 150 किलोवाट तक के नए कनेक्शन के लिए तार और पोल का खर्च माफ कर दिया है। 10 दिसंबर 2024 को लिए गए फैसले में आंशिक संशोधन के बाद आयोग ने यह निर्णय लिया, जिसके तहत उपभोक्ताओं को अब केवल कनेक्शन शुल्क देना होगा। इससे अधिक लोड के कनेक्शन के लिए तार-पोल की लागत उपभोक्ताओं को वहन करनी होगी। आयोग के अध्यक्ष आमिर सुबहानी, सदस्य अरुण कुमार सिन्हा और पीएस यादव ने इस फैसले की घोषणा की है। पहले उपभोक्ताओं को तार-पोल के लिए अलग से एस्टीमेट बनवाकर भुगतान करना पड़ता था, लेकिन अब कंपनी यह खर्च खुद उठाएगी और इसे वार्षिक टैरिफ याचिका में दावा करेगी।
नए नियमों के तहत सिंगल फेज कनेक्शन की दरों में मामूली बदलाव किया गया है। 3 किलोवाट का सिंगल फेज कनेक्शन पहले की तरह 2700 रुपये में मिलेगा, लेकिन 3 से 7 किलोवाट तक के कनेक्शन के लिए अब 900 रुपये प्रति किलोवाट की जगह 1000 रुपये देने होंगे। पहले अगर घर से तार-पोल की दूरी 35 मीटर से अधिक होती थी, तो उपभोक्ताओं को प्रति स्पैन 1612 रुपये चुकाने पड़ते थे, जो 50 मीटर की दूरी पर बढ़ता जाता था। अब इस शुल्क को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है। कंपनी अब उपभोक्ताओं के घर तक तार-पोल लगाने का सारा खर्च खुद वहन करेगी, जिससे कनेक्शन प्रक्रिया में तेजी आएगी और उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा।
लो-टेंशन थ्री फेज कनेक्शन में भी बदलाव किए गए हैं। 5 किलोवाट तक के कनेक्शन के लिए पहले की तरह 4500 रुपये ही लगेंगे, लेकिन 5 से 19 किलोवाट तक के कनेक्शन के लिए अब 1000 रुपये की जगह 1500 रुपये प्रति किलोवाट देना होगा। 20 किलोवाट के कनेक्शन के लिए शुल्क 19,500 रुपये से बढ़कर 21,000 रुपये हो गया है, और 20 से 44 किलोवाट तक के लिए 1000 रुपये की जगह 2000 रुपये प्रति किलोवाट देना होगा। इस श्रेणी में प्रति पोल 4795 रुपये का शुल्क भी माफ कर दिया गया है। हाई-टेंशन कनेक्शन में 45 किलोवाट का शुल्क 3,46,709 रुपये से घटाकर 7,000 रुपये प्रति किलोवाट कर दिया गया है, जो 44 से 150 किलोवाट तक लागू होगा।
यह फैसला बिहार में बिजली कनेक्शन की प्रक्रिया को सरल और उपभोक्ता-अनुकूल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। तार-पोल के खर्च को माफ करने से ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी, खासकर छोटे व्यवसायों और घरेलू उपभोक्ताओं को काफी फायदा होगा। कंपनी की याचिका पर विचार करते हुए आयोग ने माना कि तार-पोल की मापी से कनेक्शन में देरी होती है, इसलिए इस खर्च को टैरिफ में शामिल करना बेहतर होगा। यह निर्णय बिहार में बिजली वितरण कंपनियों NBPDCL और SBPDCL के लिए लागू होगा।