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बाढ़ में ‘एक शाम शहीदों के नाम’ कार्यक्रम में खाली रह गई कुर्सियां, प्रचार-प्रसार को लेकर प्रशासन पर उठ रहे सवाल UCC पर डॉ प्रेम कुमार का बड़ा बयान, बोले- ‘एक देश, एक कानून’ पूरे भारत में लागू हो मंत्री अशोक चौधरी बने असिस्टेंट प्रोफेसर, पटना के एएन कॉलेज में ली पहली क्लास मुंगेर के स्कूल में बड़ी चोरी: ताले तोड़कर लाखों की संपत्ति को पहुंचाया नुकसान, निर्माण सामग्री भी किया गायब मुजफ्फरपुर में रामनवमी को लेकर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम: चप्पे-चप्पे पर रहेगी पुलिस की नजर, ड्रोन और CCTV से होगी निगरानी पटना लूट कांड का खुलासा: 20 लाख लूट मामले में एक आरोपी गिरफ्तार, अन्य की तलाश जारी हाजीपुर में निगरानी की बड़ी कार्रवाई, 50 हजार घूस लेते खनन विभाग के दो कर्मचारी रंगेहाथ गिरफ्तार पटना में रामनवमी पर हाई अलर्ट, महावीर मंदिर समेत प्रमुख स्थलों पर कड़ी सुरक्षा के प्रबंध BIHAR: गांव के दबंगों ने दलित युवक को बेरहमी से पीटा, पुलिस से लगाई न्याय की गुहार Bihar News: गंगा में नहाने गए चार दोस्त… अचानक गहराई में समाए, दो की दर्दनाक मौत से गांव में मचा कोहराम

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बाढ़ में ‘एक शाम शहीदों के नाम’ कार्यक्रम में खाली रह गई कुर्सियां, प्रचार-प्रसार को लेकर प्रशासन पर उठ रहे सवाल

बाढ़ के सबेरा सिनेमा हॉल में आयोजित ‘एक शाम शहीदों के नाम’कार्यक्रम में दर्शक नहीं रहने के कारण कुर्सियां खाली रह गयी। ठीक से प्रचार नहीं होने और कार्यक्रम की सूचना पहले से देने की बात कह लोग प्रशासन पर सवाल उठा रहे हैं।

25-Mar-2026 10:43 PM

By First Bihar

PATNA: बाढ़ अनुमंडल के सबेरा सिनेमा हॉल में अनुमंडल प्रशासन द्वारा आयोजित “एक शाम शहीदों के नाम” कार्यक्रम में लोगों की भारी कमी देखने को मिली। कार्यक्रम के दौरान अधिकांश कुर्सियां खाली रहीं, जिससे आयोजन की तैयारियों और प्रचार-प्रसार पर सवाल उठने लगे हैं।


बुधवार को आयोजित इस कार्यक्रम में बाहर से कलाकारों को बुलाया गया था और इसके लिए एक नोडल पदाधिकारी भी नियुक्त किया गया था। बावजूद इसके, स्थानीय लोगों की भागीदारी बेहद कम रही।


बताया जा रहा है कि कार्यक्रम की जानकारी न तो आम जनता तक पहुंचाई गई और न ही स्थानीय जनप्रतिनिधियों को इसकी सूचना दी गई। बाढ़ नगर परिषद के चेयरमैन संजय कुमार उर्फ गायमाता ने कहा कि उन्हें भी इस कार्यक्रम की कोई जानकारी नहीं दी गई थी।


उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि जब नगर के चेयरमैन को ही सूचना नहीं दी गई, तो आम जनता तक जानकारी कैसे पहुंचती। उन्होंने इसे प्रशासन की लापरवाही और शहीदों के प्रति उदासीनता बताया।


स्थानीय लोगों का भी कहना है कि कार्यक्रम का पर्याप्त प्रचार-प्रसार नहीं किया गया, जिसके कारण लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद आयोजन फीका साबित हुआ। इसे लोग पैसे की बर्बादी बता रहे हैं।