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01-Feb-2026 07:03 PM
By FIRST BIHAR
Bihar News: बिहार के औरंगाबाद से बड़ी खबर सामने आ रही है, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। हसपुरा थाना क्षेत्र के सैदपुर (मोती बिगहा) गांव में पांच महादलित नाबालिग किशोरियों ने एक साथ विषैला पदार्थ खा लिया। इस दर्दनाक घटना में चार किशोरियों की मौत हो गई, जबकि एक किशोरी गंभीर हालत में इलाजरत है। गांव और आसपास के इलाकों में यही सवाल गूंज रहा है कि आखिर पांच नाबालिग बच्चियों ने एक साथ मौत जैसा कदम क्यों उठाया।
एक ग्रामीण महिला के अनुसार, यह घटना जमाल बिगहा जाने वाली सड़क के किनारे पइन और तालाब के पास हुई। बताया गया कि पांचों किशोरियां वहां बैठीं और एक साथ ज़हर खा लिया। ज़हर खाने के बाद एक किशोरी किसी तरह अपने घर पहुंचने में सफल रही और परिजनों को पूरी घटना बताई। परिजनों ने तुरंत उसे इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया, जिससे उसकी जान बच सकी। वहीं, बाकी चार किशोरियां पास के गेहूं के खेत में चली गईं, जहां तड़पते हुए उनकी मौत हो गई।
यह घटना गुरुवार की बताई जा रही है, लेकिन शनिवार को जब इसकी जानकारी सार्वजनिक हुई, तब पूरे इलाके में खलबली मच गई। सूचना मिलने के बाद मीडिया टीम गांव पहुंची और सुबह से दोपहर तक हालात का जायजा लिया। गांव में हर तरफ सन्नाटा और डर का माहौल था। लोग घटना की पुष्टि तो कर रहे थे, लेकिन कोई भी खुलकर कुछ बोलने को तैयार नहीं था।
गांव के एक व्यक्ति ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि चारों किशोरियों का अंतिम संस्कार एक साथ मोती बिगहा श्मशान घाट पर कर दिया गया। इसके बाद श्मशान घाट का निरीक्षण करने पर हाल ही में शव जलाने के स्पष्ट निशान भी मिले। ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस के डर से परिजनों ने जल्दबाजी में अंतिम संस्कार कर दिया, ताकि मामला बाहर न जाए।
जब इस मामले को लेकर पुलिस अधिकारियों से संपर्क किया गया, तो उन्होंने शुरुआत में घटना से अनभिज्ञता जताई। पुलिस का कहना है कि गांव में चौकीदार को भेजा गया था, लेकिन किसी भी ग्रामीण ने कुछ बताने से इनकार कर दिया। हालांकि जांच में यह सामने आया कि चौकीदार गुरुवार को ही गांव गया था, उस समय चारों शव गांव में मौजूद थे। इसके बावजूद जानकारी उच्च अधिकारियों तक क्यों नहीं पहुंची, यह एक गंभीर सवाल बन गया है।
घटना के सामने आने के बाद हसपुरा, गोह और आसपास के इलाकों में चर्चाओं का दौर तेज है। लोग तरह-तरह की आशंकाएं जता रहे हैं—क्या बच्चियों पर किसी तरह का दबाव था, क्या वे डर, प्रताड़ना या सामाजिक कारणों से मानसिक तनाव में थीं, या फिर कोई ब्लैकमेलिंग का मामला था। फिलहाल इन सभी सवालों के जवाब अंधेरे में हैं।
दाउदनगर एसडीपीओ अशोक कुमार दास ने बताया कि जैसे ही घटना की जानकारी मिली, हसपुरा थानाध्यक्ष से बात की गई। चौकीदार को गांव भेजा गया था, लेकिन ग्रामीणों ने कुछ भी बताने से इनकार किया। मामले को संज्ञान में लेकर इसकी जांच की जा रही है।