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01-Dec-2025 06:24 PM
By mritunjay
Bihar News: बिहार के बहुचर्चित पुलिस बर्बरता मामले में अरवल की अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए डीएसपी कृति कमल, करपी थानाध्यक्ष उमेश राम सहित कई पुलिसकर्मियों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी कर दिया है। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी मनीष कुमार पांडेय की अदालत ने यह कार्रवाई की है। मामला करपी थाना क्षेत्र का है।
दरअसल, प्रदेश राजद सचिव रामाशीष सिंह रंजन और जिला मुखिया संघ अध्यक्ष अभिषेक रंजन की बहू तनीषा सिंह ने डीएसपी एवं अन्य पुलिसकर्मियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। आरोपों में महिला के साथ अभद्र व्यवहार, मारपीट, गंभीर चोट पहुंचाना, क्रूरता, अनैतिक दबाव और आपराधिक साजिश जैसी बातें शामिल हैं।
तनीषा सिंह का कहना है कि पुलिस अधिकारियों ने पद का दुरुपयोग करते हुए उसके साथ बर्बरतापूर्ण व्यवहार किया। पीड़ित पक्ष का मामला लड़ रहे अधिवक्ता आयुष रंजन और अनिल कुमार शर्मा ने बताया कि लंबे संघर्ष के बाद न्यायालय ने आरोपी अधिकारियों के प्रति कड़ा रुख अपनाया है। उनका कहना है कि अदालत का यह आदेश कानून के सामने सभी की समान जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है और इससे आम जनता का न्यायपालिका पर विश्वास और मजबूत होगा।
मामले के बाद अब अरवल में सबसे बड़ा सवाल उठ खड़ा हुआ है—जब आरोपी स्वयं पुलिस अधिकारी हों तो उनकी गिरफ्तारी कौन करेगा? आम नागरिकों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी होते ही पुलिस तुरंत छापेमारी शुरू कर देती है, जबकि इस मामले में लोगों की नजरें अरवल के पुलिस अधीक्षक मनीष कुमार पर टिकी हैं कि वह क्या कार्रवाई करेंगे।
क्या आरोपी अधिकारियों की गिरफ्तारी आम अभियुक्तों की तरह होगी या फिर वे अपने पद और प्रभाव के कारण बच निकलेंगे—यह चर्चा अब जिले में प्रमुख जन-विमर्श का विषय बन गई है। जनता का कहना है कि जब कानून लागू करने वाला ही कानून तोड़े, तो न्याय का मार्ग कौन सुरक्षित करेगा?