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24-Mar-2026 09:25 AM
By First Bihar
Bihar News : मोकामा के विधायक और चर्चित बाहुबली नेता अनंत सिंह ने जेल से रिहा होने के बाद एक बार फिर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ कहा है कि वह फिलहाल क्षेत्र में तुरंत नहीं जाएंगे, बल्कि करीब 15 दिनों के बाद अपने पूरे विधानसभा क्षेत्र का दौरा करेंगे। इस दौरान वे हर गांव और मोहल्ले में जाकर जनता से सीधे संवाद करेंगे, उनके सुख-दुख जानेंगे और समस्याओं के समाधान का प्रयास करेंगे।
दरअसल, अनंत सिंह हाल ही में चर्चित दुलारचंद यादव हत्याकांड में जेल में बंद थे। उन्हें इस मामले में अदालत से जमानत मिल गई है, जिसके बाद वह दो दिन पहले ही जेल से बाहर आए हैं। रिहाई के बाद उनकी गतिविधियां लगातार चर्चा में बनी हुई हैं।
जेल से निकलने के बाद अनंत सिंह का कार्यक्रम पूरी तरह धार्मिक आस्था से जुड़ा रहा। उन्होंने बताया कि वह अपने पटना स्थित विधायक आवास से सीधे बड़हिया स्थित महारानी मंदिर जाएंगे, जहां पूजा-अर्चना करेंगे। इसके बाद वह अपने पैतृक गांव लदमा स्थित विषहरी स्थान मंदिर में भी माथा टेकेंगे। पूजा के बाद वह फिर पटना लौटकर अपने सरकारी आवास पर रहेंगे।
अनंत सिंह ने क्षेत्र में देरी से जाने की वजह भी साफ की। उन्होंने कहा कि इस समय मोकामा और आसपास के इलाकों में फसल की कटाई का दौर चल रहा है। यह इलाका ‘टाल क्षेत्र’ के नाम से जाना जाता है, जहां बड़ी संख्या में किसान खेती पर निर्भर हैं। ऐसे में किसान और आम लोग इस समय अपने काम में व्यस्त हैं और उनसे मिलने के लिए समय निकालना मुश्किल होगा।
उन्होंने कहा, “हम हमेशा जनता के बीच जाते रहते हैं, लेकिन अभी लोग कटनी में व्यस्त हैं। ऐसे समय में उन्हें परेशान करना ठीक नहीं होगा। इसलिए हम 15 दिन बाद जाएंगे, जब लोग थोड़ा खाली रहेंगे, तब हम आराम से उनसे मिलकर उनकी समस्याएं सुनेंगे।”
राजनीतिक भविष्य को लेकर भी अनंत सिंह ने एक बड़ा संकेत दिया है। उन्होंने कहा कि अगला विधानसभा चुनाव वह खुद नहीं लड़ेंगे। उनकी जगह उनके बेटे को चुनावी मैदान में उतारा जा सकता है। हालांकि, इस पर उन्होंने अंतिम फैसला जनता पर छोड़ दिया है। उनका कहना है कि वह क्षेत्र में जाकर लोगों से राय लेंगे और अगर जनता उन्हें ही चुनाव लड़ने को कहेगी, तभी वह इस पर विचार करेंगे।
अनंत सिंह का यह बयान ऐसे समय में आया है जब बिहार की राजनीति में आगामी चुनाव को लेकर हलचल तेज हो रही है। उनके इस फैसले को मोकामा की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि 15 दिन बाद जब वह क्षेत्र में जाएंगे, तो जनता की प्रतिक्रिया क्या होती है और उनके राजनीतिक भविष्य की दिशा क्या तय होती है।