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Five Unlucky Cricketers: दुनिया के 5 बदनसीब क्रिकेटर्स जिन्हें कभी नहीं मिला अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट खेलने का मौका

Five Unlucky Cricketers: घरेलू क्रिकेट में रिकॉर्ड बनाने वाले 5 बदकिस्मत खिलाड़ी, जिन्हें कभी इंटरनेशनल डेब्यू का नहीं मिला मौका। रजिंदर गोएल के 750 विकेट से लेकर डॉन शेफर्ड के 2218 विकेट तक, जानें उनकी कहानी..

Five Unlucky Cricketers
5 बदकिस्मत क्रिकेटर
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Deepak Kumar
Deepak Kumar
4 मिनट

Five Unlucky Cricketers: दुनिया भर में घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन के बावजूद कुछ बेहद प्रतिभावान खिलाड़ी इंटरनेशनल स्तर पर कभी कदम नहीं रख पाए। इन खिलाड़ियों ने अपने बल्ले और गेंद से खूब रिकॉर्ड बनाए, लेकिन किस्मत ने उनका साथ नहीं दिया। चाहे वह भारत के रजिंदर गोएल हों, जिनके नाम रणजी में सबसे ज्यादा विकेट हैं या फिर इंग्लैंड के डॉन शेफर्ड, जिन्होंने 2218 विकेट लिए हैं, इन सब का इंटरनेशनल करियर शुरू होने से पहले ही खत्म हो गया। आइए, ऐसे ही पांच बदकिस्मत क्रिकेटरों की कहानी आज जानते हैं..


1. रजिंदर गोएल (भारत)

बाएं हाथ के स्पिनर रजिंदर गोएल को रणजी ट्रॉफी का सबसे घातक गेंदबाज माना जाता है। उन्होंने 157 फर्स्ट-क्लास मैचों में 750 विकेट लिए हैं, हरियाणा और दिल्ली के लिए खेलते हुए यह एक रिकॉर्ड है। उनकी फिरकी ने बल्लेबाजों को खूब परेशान किया, लेकिन 1960-70 के दशक में बिशन सिंह बेदी जैसे दिग्गजों की मौजूदगी ने उनके रास्ते रोक दिए। गोएल की सटीक लाइन-लेंग्थ और किफायती गेंदबाजी के बावजूद, वह कभी नीली जर्सी में नहीं दिखे। उनके प्रशंसक आज भी मानते हैं कि अगर उन्हें मौका मिलता तो वह भारत के लिए कमाल कर सकते थे।


2. डॉन शेफर्ड (इंग्लैंड)

इंग्लैंड के मध्यम गति के तेज गेंदबाज डॉन शेफर्ड ने फर्स्ट-क्लास क्रिकेट में 2218 विकेट लिए हैं, इस रिकॉर्ड तक आज तक कोई गेंदबाज नहीं पहुंच पाया है। इस दिग्गज खिलाड़ी को भी इंटरनेशनल क्रिकेट में कभी मौका नहीं मिला। ग्लैमॉर्गन के लिए खेलते हुए उनकी स्विंग और सटीकता ने बल्लेबाजों को खूब तंग किया तब। 1950-60 के दशक में इंग्लैंड की टीम में फ्रेड ट्रूमैन और ब्रायन स्टैथम जैसे दिग्गज थे, जिसके चलते शेफर्ड को मौका नहीं मिला।


3. जेमी कॉक्स (ऑस्ट्रेलिया) 

ऑस्ट्रेलिया के सलामी बल्लेबाज जेमी कॉक्स ने 1987 से 2005 तक घरेलू क्रिकेट में बड़ा धमाल मचाया। फर्स्ट-क्लास क्रिकेट में 51 शतकों के साथ उन्होंने 18,000 से ज्यादा रन बनाए, लेकिन इंटरनेशनल डेब्यू का सपना अधूरा ही रहा। तस्मानिया और समरसेट के लिए खेलते हुए उनकी तकनीक और धैर्य की तारीफ होती थी, मगर मार्क टेलर, माइकल स्लेटर और मैथ्यू हेडन जैसे बल्लेबाजों की मौजूदगी ने उनके लिए ऑस्ट्रेलियाई टीम में जगह बनाना मुश्किल कर दिया। कॉक्स की कहानी उन खिलाड़ियों की याद दिलाती है जो मेहनत तो करते हैं, लेकिन किस्मत साथ नहीं देती।


4. फ्रैंकलिन स्टीफेंसन (वेस्टइंडीज)

वेस्टइंडीज के ऑलराउंडर फ्रैंकलिन स्टीफेंसन ने फर्स्ट-क्लास और लिस्ट-ए क्रिकेट में 13,000 से ज्यादा रन बनाए और 1240 विकेट लिए हैं। मध्यक्रम में विस्फोटक बल्लेबाजी और तेज गेंदबाजी के साथ-साथ उन्होंने धीमी गेंद (स्लोअर बॉल) को काफी लोकप्रिय बनाया। बारबाडोस और इंग्लिश काउंटी क्रिकेट में उनके प्रदर्शन ने खूब सुर्खियां भी बटोरीं लेकिन 1980 के दशक में वेस्टइंडीज की तूफानी गेंदबाजी और बल्लेबाजी लाइन-अप में मैल्कम मार्शल, विव रिचर्ड्स जैसे सितारों के बीच वह जगह नहीं बना पाए। उनकी प्रतिभा को आज भी क्रिकेट इतिहास में याद किया जाता है।


5. अमोल मजूमदार (भारत) 

मुंबई के बल्लेबाज अमोल मजूमदार ने अपने डेब्यू फर्स्ट-क्लास मैच में ही 260 रनों की पारी खेलकर तहलका मचा दिया था। 48 की औसत से 11,000 से ज्यादा रन और 30 शतक उनके नाम हैं लेकिन सचिन तेंडुलकर, राहुल द्रविड़, वीवीएस लक्ष्मण और सौरव गांगुली जैसे दिग्गजों के दौर में मध्यक्रम में जगह बनाना उनके लिए असंभव रहा। मुंबई क्रिकेट की नर्सरी से निकले अमोल ने रणजी में कई रिकॉर्ड बनाए लेकिन नीली जर्सी का सपना पूरा नहीं हुआ।

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